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छत्तीसगढ़

सीसीटीवी कैमरों से होगी धान खरीदी केंद्रों की निगरानी, तौल में इस्तेमाल होंगे इलेक्ट्रॉनिक कांटा-बाट

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सीसीटीवी कैमरे से होगी धान खरीदी केन्द्रों की निगरानी

इलेक्ट्रानिक कांटा-बाट का होगा तौल में इस्तेमाल
बिलासपुर, 6 नवम्बर 2024/खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के सचिव अन्बलगन पी ने आज मंथन सभाकक्ष में कलेक्टरों की बैठक लेकर बिलासपुर संभाग में धान खरीदी की तैयारी की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि खरीदी केन्द्रों पर गड़बड़ी रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरें से निगरानी रखी जायेगी। प्रत्येक केन्द्र पर दो-दो कैमरे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही धान संग्रहण केन्द्रों और राईस मिल परिसरों में भी कैमरे इन्स्टाल किये जाएंगे।

तौल में गड़बड़ी की आशंका को दूर रखने के लिए इलेक्ट्रानिक कांटा बाट का उपयोग किया जायेगा। शासन के निर्देशानुसार 14 नवम्बर से धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होगी। उन्होंने तमाम तैयारियां इसके पहले पूर्ण कर ओके रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। संभागायुक्त श्री महादेव कावरे, एमडी मार्कफेड रमेश शर्मा सहित संभाग के सभी 8 जिलों के कलेक्टर एवं धान खरीदी कार्य से जुड़े विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

खाद्य सचिव अन्बलगन पी ने कहा कि धान खरीदी का कार्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता का काम है। इसके लिए शासन के दिशा-निर्देश एवं प्रक्रिया स्पष्ट रूप से परिभाषित किए गए हैं। इनका पालन करते हुए गंभीरता पूर्वक किसानों से उनकी मेहनत का उपज खरीदा जाये। उन्होंने कहा कि निर्धारित लिमिट के अंतर्गत वास्तविक किसानों का एक-एक दाना धान खरीदा जाए।

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उन्हें धान बेचने में किसी तरह की दिक्कत नहीं आए, इसका ध्यान रखें। किसानों की सुविधा के लिए छाया-पानी का इंतजाम भी स्थल पर किया जाए। गौरतलब है कि राज्य शासन ने प्रति एकड़ 21 क्विंटल की अधिकतम सीमा निर्धारित की है। बताया गया कि इस बार जारी टोकन तिथि के 7 दिन बाद धान बेचने की बारी आयेगी। खाद्य सचिव ने बारदाने की उपलब्धता एवं किसानों के भुगतान कार्य की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि बैंक से नकद निकासी में किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत न आए। इसके लिए पयाप्त मात्रा में कैश रखा जाए।

खाद्य सचिव ने कहा कि गड़बड़ी की आशंका वाले कम से काम पांच केन्द्रों पर सीधी निगरानी कलेक्टर स्वयं करें। पूर्व के अनुभव के आधार पर इनका चयन कर लिया जाए एवं रोज इसकी रिपोर्ट लिया जाये। उन्होंने कहा कि धान खरीदी अभियान का लाभ हमारे वास्तविक किसानों के लिए है, न कि कोचियों और दलालों के लिए। इसलिए दलाल किस्म के लोगों की पहचान पूर्व से ही कर लिया जाए और उनकी गतिविधि पर नजर रखी जाए। खरीदी प्रक्रिया पर जरा भी बाधा अथवा गड़बड़ी करने वाले पर तत्काल कार्रवाई किया जाये। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता पूर्वक होनी चाहिए।

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उन्होंने खरीदी प्रक्रिया का ट्रायल एवं रन करने के निर्देश भी दिए और आने वाली त्रुटियों को समय रहते सुधार लेने को कहा है ताकि खरीदी शुरू होने के बाद किसी तरह की बाधा न आए। उन्होंने मौसम की अनिश्चितता के मद्देनजर बेमौसम बारिश से फड़ के धान का बचाव के उपाय का इंतजाम रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टरों और प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की शंकाओं का समाधान भी किया। उन्होंने खरीदी केन्द्रों पर चेकलिस्ट के अनुरूप सभी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।

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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।

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इस वजह से हुई मानसून में देरी

सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:

  • सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।

  • न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।

इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

  • जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।

  • मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।

  • केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।

  • वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।

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मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।

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छत्तीसगढ़

कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।

पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं

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सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है

नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है

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