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छत्तीसगढ़

केंद्र, राज्य व असम सरकार को HC का नोटिस

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याचिकाकर्ता का कहना है कि NTCA के एप्रुवल के बिना वन भैसों को लाया गया और नियमों को ताक में रखकर उन्हें बाड़े में रख दिया गया। इस तरह से बाड़े में रखकर वन भैंसों का कुनबा बढ़ाने से वह पालतू हो जाएगा।
छत्तीसगढ़ में लगातार वनभैंसे की घटती संख्या को देखते हुए इनके सरंक्षण के लिए वर्ष 2001 में इसे राजकीय पशु घोषित किया गया। उस समय प्रदेश में वनभैंसों की संख्या करीब 80 थी, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के चलते दिन-ब-दिन संख्या घटती गई। वर्तमान में इनकी संख्या सिर्फ 10 है। प्रदेश में वनभैंसा की संख्या बढ़ाने के लिए असम से वन भैंसा लाने की कवायद पिछले दस साल से चल रही थी। लेकिन NTCA से अनुमति नहीं मिल रही थी। अनुमति मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने असम से चार मादा व एक नर वनभैंसा लाया। रायपुर के वन्य प्रेमी नितिन सिंघवी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

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इसमें बताया गया है कि NTCA ने वन भैंसों को असम से लाकर जंगल में छोड़ने की अनुमति दी है। लेकिन, राज्य शासन का वन अमले ने इन वन भैंसों को बाड़े में बंधक बनाकर रख दिया है। जो वन्य प्राणी अधिनियम के प्रावधान के खिलाफ है। याचिका में बताया गया है कि वन भैंसों को बार नवापारा के जंगल में छोड़ने के बजाए बाड़े में रखकर प्रजनन कराया जा रहा है। इस तरह से प्रजनन कराने से वन भैंसा पालतू किस्म का हो जाएगा। इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्य शासन और असम सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।

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NTCA से नहीं लिया एप्रुवल याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया है कि राज्य शासन ने वन भैंसा लाने के बाद प्रजनन कराने की जानकारी NTCA को नहीं दी है और न ही इसके लिए NTCA से एप्रुवल लिया गया है। NTCA ने असम से वन भैंसा ले जाने की अनुमति दी है। लेकिन, उनका प्रजनन कराने के लिए बाड़े में बंधक बनाकर रखने की अनुमति नहीं दी है।

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छत्तीसगढ़

‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ : सीएम साय ने कहा – गौ संरक्षण जनभागीदारी से ही बनेगा जनआंदोलन

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गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। ये बातें मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कही।

इस अवसर पर सीएम ने प्रदेशव्यापी ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार भी प्रदान किए।

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छत्तीसगढ़

“सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सुनेगी…”, सर्वदलीय बैठक खत्म होते ही किरण रिजिजू का पहला बयान, कल पेश होगा वंदे मातरम् बिल

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संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक ख़त्म हो गई है। इस बैठक के ख़त्म होते ही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, अच्छे माहौल में यह बैठक हुई। सभी ने इस बैठक में अपनी बात रखी। संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक के बाद मिडिया को दिए अपने पहले बयान में कहा कि, सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सत्र के दौरान सुनेगी। इसके अलावा बागी सांसदों को बैठक में बुलाये जाने को लेकर उन्होंने कहा कि, नियमों के मुताबिक़ ही उन्हें बुलाया गया है।

बता दें कि, रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में व्यवधान पैदा करने से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता, बल्कि इससे जनता के पैसे और समय की बर्बादी होती है।

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छत्तीसगढ़

सीएम साय ने अधिकारियों को किया अलर्ट, बारिश से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश…

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।


मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

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