देश
किसी बड़े गैंग का हिस्सा है संजय रॉय? आरजी कर अस्पताल के डॉक्टरों ने जताया शक
कोलकाता के आरजी कार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में लेडी डॉक्टर की रेप के बाद हत्या की घटना को लेकर देशभर में खूब गुस्सा है. इस बीच अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के कई साथियों ने आशंका जताई है कि वह कुछ ऐसा जानती थी, जो उसे नहीं जानना चाहिए था और शायद इसी कारण उसे निशाना बनाया गया.
आरजी कार मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सेकंड ईयर पीजी की छात्रा के माता-पिता और साथी भी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि इस मामले में अब तक गिरफ्तार संजय रॉय, ‘सिर्फ एक छोटा गुंडा या बलि का बकरा हो सकता है और असली अपराधी अभी तक पकड़े नहीं गए हैं.’ वहीं लेडी डॉक्टर के एक साथ ने कहा, ‘हमें शक है कि यह रेप और हत्या का साधारण मामला नहीं? उसे निशाना बनाया गया था. सिविक वॉलंटियर को कैसे पता चला कि वह उस समय सेमिनार हॉल में अकेली थी?’
वहीं लेडी डॉक्टर ने अपनी डायरी में बताया था कि वह बहुत प्रेशर में थी और पिछले कुछ हफ्तों से उस पर बहुत काम का बहुत ज्यादा बोझ था. सेकंड ईयर की छात्रा होने के नाते, वह एक साल से संस्थान में थी और एक जूनियर डॉक्टर के रूप में उसे लगातार 36 घंटे काम करना पड़ता था. आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में उसके साथ ही काम करने वाले दूसरे डॉक्टरों ने बताया कि यहां ‘सज़ा के तौर पर ज़्यादा काम’ एक आम बात थी, जिस पर पूर्व प्रिसिंपल संदीप घोष सख्ती से नज़र रखते थे.
उधर पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को दावा किया कि इस जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर का विसरा पुलिस ने जांच के नाम पर बदल दिया था. अधिकारी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उन्हें कुछ जानकारियां मिली हैं जो केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के लिए काम की हो सकती है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय एजेंसी को इसकी जांच करनी चाहिए.
बीजेपी नेता ने लिखा, ‘मैंने अपने कई विश्वसनीय स्रोतों से जो जानकारी एकत्र की है, वह सीबीआई द्वारा की गई जांच के मकसद से अहम हो सकती है.’ अपने पोस्ट में उन्होंने 5 सनसनीखेज दावे किए हैं…
मृतका डॉक्टर का विसरा कोलकाता पुलिस द्वारा जांच के नाम पर बदल दिया गया है.
इस जघन्य अपराध और घटनास्थल में कई व्यक्तियों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है.
खून से सने वस्तुओं को बाद में बदल दिया गया है और कोलकाता पुलिस द्वारा की गई जब्ती में जो दर्शाया गया है, वह वास्तविक सामान नहीं हैं, जिसे डीएनए परीक्षण द्वारा अच्छी तरह से पता लगाया जा सकता है.
वॉश बेसिन को हटाकर एक नया बेसिन लगाया गया है.
परिसर के किसी दूसरे कोने में डॉक्टर की हत्या करने के बाद शव को आरजी. कर मेडिकल कॉलेज के सेमिनार हॉल में ले जाया गया.
उन्होंने उम्मीद और भरोसा जताया है कि सीबीआई जांच के दौरान इन पहलुओं पर भी गौर करेगी, क्योंकि ‘मामले को दबाने के लिए की जा रही औपचारिक जांच की कोलकाता के पुलिस आयुक्त सीधे निगरानी कर रहे थे और उनके निर्देश पर जांच की जा रही थी’.
इस भयावह घटना ने देशभर को हिलाकर रख दिया है और देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और जांच में त्वरित कार्रवाई की मांग की जा रही है. दिल्ली, कोलकाता, हैदराबाद और अन्य शहरों के अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में जूनियर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और जल्द न्याय की मांग की.
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
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परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
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भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
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खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।
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