Connect with us

देश

Janganana 2024 Date: अगले साल होगी जनगणना की शुरुआत, आंकड़े 2026 में होंगे प्रकाशित, इस बार संप्रदाय भी पूछेगी सरकार

Published

on

Janganana 2024 Date: अगले साल होगी जनगणना की शुरुआत, आंकड़े 2026 में होंगे प्रकाशित, इस बार संप्रदाय भी पूछेगी सरकार

Janganana 2025 Date: काफी देरी के बाद आखिरकार अब सरकार राष्ट्रीय जनगणना कराने के लिए कमर कस चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक जनगणना अगले साल शुरू होगी। सूत्रों ने बताया कि जनगणना 2025 में शुरू होगी, जो 2026 तक चलेगी।

दरअसल, जनगणना का काम अभी भी रुका हुआ है। सरकार ने फिलहाल नए कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। उम्मीद है कि सरकार जल्द ही जनगणना के कार्यक्रम की घोषणा करेगी। लंबे अरसे से अटकी दशकीय जनगणना की कवायद को शुरू किए जाने की संभावनाओं पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अगस्त में कहा था कि यह अभ्यास उचित समय पर किया जाएगा और एक बार निर्णय लेने के बाद मैं खुद घोषणा करूंगा कि इसे कैसे किया जाएगा।

भारत में पिछली बार जनगणना 2011 में दर्ज की गई थी। अगला चरण 2021 में शुरू होना था, लेकिन कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कारण इसमें देरी हो गई। तब से अगली जनगणना के आंकड़े कब प्रकाशित होंगे, इस बारे में कई सवाल पूछे जा रहे हैं। अब केंद्र सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने CNN-News18 से पुष्टि की है कि अगली जनगणना के आंकड़े 2026 में उपलब्ध होंगे। एक शीर्ष सूत्र ने कहा, “डेटा रिकॉर्ड करने की प्रक्रिया 2025 में शुरू होगी और फिर रिपोर्ट 2026 में प्रकाशित होगी।” जनगणना का पहला चक्र अब 2025 से 2035 तक और फिर 2035 से 2045 तक और इसी तरह आगे बढ़ेगा। सूत्रों ने बताया कि परिसीमन प्रक्रिया 2028 तक पूरी होने की संभावना है।

संप्रदाय भी पूछ सकती है सरकार

सरकार जनगणना रिकॉर्ड करने की तैयारी में जुटी हुई है। कुछ राजनीतिक दलों द्वारा जाति जनगणना की मांग के बावजूद न्यूज18 को पता चला है कि फिलहाल सरकार की जाति जनगणना की अनुमति देने की कोई योजना नहीं है। दरअसल, मौजूदा फॉर्म में सर्वेक्षण करने वाला हर व्यक्ति अपना नाम, डिटेल्स, फैमिली डिटेल्स आदि प्रकाशित करता है। वहीं उसके पास धर्म का डिटेल्स दर्ज करने का विकल्प होता है। एक और कॉलम है जो उन्हें अनुसूचित जनजाति या अनुसूचित जाति (SC/ST) के रूप में पहचानता है।

यह भी पढ़ें   रायपुर एयरपोर्ट रोड में दर्दनाक सड़क हादसा, दो की मौत

हालांकि, इस बार फॉर्म में एकमात्र अतिरिक्त बात यह होगी कि सर्वेक्षण करने वाले लोगों को अपने धर्म के तहत अपने संप्रदाय का उल्लेख करने की अनुमति होगी। दरअसल, सूत्रों ने बताया कि अब तक जनगणना के दौरान लोगों से उनके धर्म और वर्ग पूछा जाता रहा है। साथ ही सामान्य, अनुसूचित जाति और जनजाति की गणना होती है। हालांकि, इस बार लोगों से यह भी पूछा जा सकता है कि वे किस संप्रदाय के अनुयायी हैं।

विपक्ष कर रहा जाति जनगणना की मांग

कांग्रेस, RJD और कई अन्य पार्टियां जाति जनगणना की मांग कर रही हैं। बिहार में JDU जैसे बीजेपी के गठबंधन सहयोगियों ने भी इस बारे में बात की है, लेकिन केंद्र पर कोई दबाव नहीं डाला है। केंद्रीय स्तर पर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट पर छोड़ दिया गया है। बीजेपी की दूसरी सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी भी मानती है कि जनगणना होनी चाहिए। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू आम जनता खासकर युवा आबादी के फायदे के लिए ‘कौशल जनगणना’ की सक्रिय वकालत कर रहे हैं।

इतना ही नहीं, RSS भी जाति जनगणना के पक्ष में है, बशर्ते कि यह किसी पार्टी द्वारा राजनीतिक लाभ के लिए न किया जा रहा हो। इस बीच, सूत्रों ने यह भी कहा कि जब जनगणना के आंकड़े प्रकाशित हो जाएंगे, तो सरकार परिसीमन की प्रक्रिया शुरू कर देगी। इससे आने वाले सालों में देश को अधिक निर्वाचित प्रतिनिधि मिलेंगे। परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही 33 प्रतिशत महिला आरक्षण जैसी व्यवस्था लागू की जा सकेगी।

यह भी पढ़ें   झारखंड से नशीली दवाओं लेकर निकले थे छत्तीसगढ़ में बेचने, बीच में ही पुलिस ने दबोचा

दक्षिण के कई राज्यों खासकर तमिलनाडु ने सख्त जनसंख्या नीति का पालन किया है। इसलिए, सरकार यह देखने के लिए एक प्रस्ताव पर भी विचार कर रही है कि परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से उनके साथ कोई अनुचित व्यवहार न हो। भारत की जनगणना हर दशक में दर्ज की जाती है। पहली जनगणना 1872 में हुई थी। स्वतंत्रता के बाद पहली जनगणना 1951 में और आखिरी जनगणना 2011 में दर्ज की गई थी।

2011 में हुई थी जनगणना

जनगणना के आंकड़े भारत सरकार के लिए नीति निर्माण और कार्यान्वयन और देश में संसाधनों के समान वितरण को सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। जनगणना जनसंख्या, जनसांख्यिकी, आर्थिक स्थिति आदि सहित कई पहलुओं पर प्रकाश डालती है। कोरोना वायरस महामारी के कारण जनगणना के अभाव में भारत सरकार अभी भी 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर निर्भर है।

2011 के आंकड़ों के अनुसार, भारत की जनसंख्या 121.1 करोड़ है, जिसमें 52 प्रतिशत पुरुष और 48 प्रतिशत महिलाएं हैं। इस जनगणना के दौरान ही भारत के इतिहास में पहली बार ट्रांसजेंडर की संख्या को ध्यान में रखा गया था। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश लगभग 20 करोड़ लोगों के साथ सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। लिस्ट में दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र है जिसकी आबादी 11 करोड़ से अधिक है। लगभग छह लाख के साथ सिक्किम सबसे कम आबादी वाला राज्य है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

देश

सीहोर में ब्रिज निर्माण के लिए खुदाई करते समय धंसी मिट्टी, 3 मजदूरों की दबने से मौत

Published

on

मध्य प्रदेश के सीहोर में सोमवार (23 दिसंबर) को बड़ी घटना हो गई। ब्रिज निर्माण के लिए खुदाई करते समय अचानक मिट्टी धंस गई। दबने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। एक को सुरक्षित निकाल लिया।

मध्य प्रदेश के सीहोर में सोमवार (23 दिसंबर) को बड़ी घटना हो गई। बुधनी में ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। पुलिया के पास खुदाई करते समय अचानक मिट्टी धंस गई। मिट्‌टी में दबने से 3 मजदूरों की मौत हो गई। एक को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। घटना शाहगंज थाना क्षेत्र के सियागहन गांव की है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

यह भी पढ़ें   रायपुर एयरपोर्ट रोड में दर्दनाक सड़क हादसा, दो की मौत

रेस्क्यू कर एक को सुरक्षित बाहर निकाला
शाहगंज थाना क्षेत्र के सियागहन गांव में ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। सोमवार को चार मजदूर निर्माण के लिए दूसरी पुलिया के पास से मिट्टी खोद रहे थे। खुदाई के समय अचानक मिट्टी धंस गई। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंची। रेस्क्यू टीम ने एक मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। तीन की मौत हो गई।

हादसे में इनकी हुई मौत
पुलिस के मुताबिक, लटेरी (विदिशा) निवासी करण (18) पिता घनश्याम, रामकृष्ण उर्फ रामू (32) पिता मांगीलाल गौड और गुना के रहने वाले भगवान लाल पिता बरसादी गौड़ की मौत हो गई। लटेरी निवासी वीरेंद्र पिता सुखराम गौड (25) को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वीरेंद्र को नर्मदापुरम रेफर किया है।

यह भी पढ़ें   31 अक्टूबर राशिफ़ल: जानिए कैसा होगा आपका आज का दिन

राजलक्ष्मी कंस्ट्रक्शन करवा रहा निर्माण
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, राजलक्ष्मी कंस्ट्रक्शन पुलिया का निर्माण कार्य करा रहा है। पुलिया सियागहन और मंगरोल गांव को जोड़ती है। पुलिया की रिटेनिंग वॉल बनाते समय पहले से बनी रोड की रिटेनिंग वॉल का स्लैब धंस गया। पोकलेन मशीन से मिट्टी हटाकर चारों मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन तीन की मौत हो गई। वीरेंद्र का इलाज चल रहा है।

Continue Reading

देश

इंजीनियर अतुल के बेटे की कस्टडी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, 4 साल के बच्चे की तलाश जारी

Published

on

Atul Subhash Suicide: एआई इंजीनियर का परिवार बिहार के समस्तीपुर में रहता है। निकिता और अतुल का 4 साल का एक बेटा है। अतुल के पिता पीएम मोदी से पोते की कस्टडी दिलाने की गुहार लगा चुके हैं।

Atul Subhash Suicide: बेंगलुरु के इंजीनियर अतुल सुभाष की मां अंजू मोदी ने अपने 4 साल के पोते की कस्टडी के लिए शुक्रवार (20 दिसंबर) को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुभाष ने अपने सुसाइड नोट और वीडियो में पत्नी निकिता सिंघानिया और ससुराल पक्ष पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। जिसके बाद बेंगलुरु पुलिस ने निकिता समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बता दें कि एआई इंजीनियर अतुल ने पिछले 9 दिसंबर को बेंगलुरु स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

पोते के ठिकाने को लेकर गहरी चिंता
अंजू मोदी ने पोते के ठिकाने का पता लगाने और उसकी कस्टडी सुनिश्चित करने के लिए हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की है। इसमें दावा है कि न तो सुभाष की अलग रह रही पत्नी निकिता सिंघानिया और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य, जो फिलहाल हिरासत में हैं, ने बच्चे के ठिकाने की जानकारी दी है। दूसरी ओर, निकिता ने पुलिस से कहा था कि उसका बेटा फरीदाबाद के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई कर रहा है और उसके चाचा सुशील सिंघानिया की देखरेख में है। लेकिन सुशील ने बच्चे की स्थिति की जानकारी होने से इनकार किया है।

यह भी पढ़ें   अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई कार, कोचिंग टीचर की मौके पर ही मौत

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा
जस्टिस बीवी नागरथना और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की बेंच ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक की सरकारों को नोटिस जारी कर बच्चे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी।

अतुल सुभाष की आत्महत्या से जुड़ी गिरफ्तारी
इंजीनियर सुभाष की आत्महत्या के मामले में कई गिरफ्तारियां हुई हैं। पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया और साले अनुराग सिंघानिया को बेंगलुरु पुलिस ने 16 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने सुभाष के छोड़े गए सुसाइड नोट और वीडियो के आधार पर तीनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। अभी वे न्यायिक हिरासत में हैं।

सिंघानिया फैमिली ने जमानत याचिका लगाई
निकिता सिंघानिया के परिजनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए अपील की है। वरिष्ठ वकील मनीष तिवारी ने सुशील सिंघानिया की उम्र (69 वर्ष) और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का दावा किया। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने सुशील को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और सख्त शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दी है, जिसमें पुलिस जांच के लिए उपलब्ध रहना और पासपोर्ट सरेंडर करना शामिल है।

यह भी पढ़ें   झारखंड से नशीली दवाओं लेकर निकले थे छत्तीसगढ़ में बेचने, बीच में ही पुलिस ने दबोचा

अतुल सुभाष के परिवार की क्या है मांग?

इंजीनियर अतुल सुभाष के परिवार ने आरोप लगाया कि निकिता और उनके परिवार ने झूठे कानूनी मामलों और पैसों की मांग कर अतुल को बुरी तरह प्रताड़ित किया। पिता पवन कुमार और भाई बिकास कुमार ने अतुल की अस्थियों को तब तक न बहाने की कसम खाई है जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।

भाई बिकास कुमार ने कहा- ‘जो लोग इस घटना के पीछे हैं, उन्हें भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। जब तक हमारे खिलाफ झूठे मामले वापस नहीं लिए जाते, हमें न्याय नहीं मिलेगा। हमारा संघर्ष जारी रहेगा।’

बिकास ने अपने भतीजे की सुरक्षा पर भी चिंता जताई और कहा- ‘मुझे अपने भतीजे (अतुल के बेटे) की सुरक्षा की चिंता है। हमने उसे हाल की तस्वीरों में नहीं देखा है। हम उसके ठिकाने की जानकारी चाहते हैं और उसकी कस्टडी जल्द से जल्द चाहते हैं।’

Continue Reading

देश

10 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें निर्माणाधीन, 200 रेक का निर्माण प्रौद्योगिकी साझेदारों के जिम्मे: अश्विनी वैष्णव

Published

on

  • विश्व स्तरीय यात्रा के अनुभव के लिए भारतीय रेल अप्रैल 2018 से केवल एलएचबी कोच बना रहा है; 2004-14 की तुलना में 2014-24 के दौरान निर्मित एलएचबी कोचों की संख्या 16 गुना से अधिक है।
  • “सुगम्य भारत मिशन” के हिस्से के रूप में भारतीय रेल दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों को अधिकांश मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों और वंदे भारत ट्रेनों में व्यापक सुविधाएं प्रदान करता है।

वर्तमान में देश में लंबी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए 10 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें निर्माणाधीन हैं। पहला प्रोटोटाइप निर्मित हो चुका है और इसका फील्ड ट्रायल किया जाएगा। इसके अलावा, 200 वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण का काम भी प्रौद्योगिकी भागीदारों को सौंपा गया है। सभी रेलगाड़ियों के उपयोग में आने की समयसीमा उनके सफल परीक्षणों पर निर्भर है। 02 दिसंबर 2024 तक, देश भर में छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए भारतीय रेल के ब्रॉड गेज विद्युतीकृत नेटवर्क पर 136 वंदे भारत रेलगाड़ी सेवाएं जारी हैं।

यह भी पढ़ें   CG: साइबर ठगी के अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश, कुरियर सर्विस के नाम पर करते थे ठगी

रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक वक्तव्य में कहा कि विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए भारतीय रेल के ब्रॉड गेज विद्युतीकृत नेटवर्क पर वर्तमान में चेयर कार वाली 136 वंदे भारत रेल सेवाएं जारी हैं। अक्टूबर 2024 तक वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की कुल क्षमता 100% से अधिक होगी।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल की उत्पादन इकाइयां अप्रैल 2018 से केवल एलएचबी कोच बना रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में एलएचबी कोच का उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2014-24 के दौरान निर्मित एलएचबी कोच की संख्या 2004-14 के दौरान निर्मित (2,337) संख्या से 16 गुना (36,933) अधिक है। भारतीय रेल (आईआर) ने एलएचबी कोचों की भरमार कर दी है जो तकनीकी रूप से बेहतर हैं और इनमें एंटी क्लाइम्बिंग व्यवस्था, विफलता संकेत प्रणाली के साथ एयर सस्पेंशन और कम संक्षारक शेल जैसी विशेषताएं हैं।

यह भी पढ़ें   कांग्रेस ने हमेशा वोट बैंक के लिए आतंकवाद का बचाव किया है : पीएम मोदी

“सुगम्य भारत मिशन” (सुलभ भारत अभियान) के हिस्से के रूप में, भारतीय रेल दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुगमता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत, रैंप, सुलभ पार्किंग, ब्रेल और स्पर्शनीय संकेत, कम ऊंचाई वाले काउंटर और लिफ्ट/एस्कलेटर जैसी व्यापक सुविधाएँ प्रदान की गई हैं।

नवंबर 2024 तक भारतीय रेल ने 399 स्टेशनों पर 1,512 एस्कलेटर और 609 स्टेशनों पर 1,607 लिफ्टें स्थापित की थीं जो पिछले दशक की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है – क्रमशः 9 और 14 गुना की वृद्धि। इसके अलावा, अधिकांश मेल और एक्सप्रेस रेलगाड़ियों में चौड़े प्रवेश द्वार, सुलभ शौचालय और व्हीलचेयर पार्किंग वाले कोच उपलब्ध हैं, जबकि वंदे भारत रेलगाड़ियां दिव्यांगजनों के लिए स्वचालित दरवाजे, निर्धारित स्थान और ब्रेल साइनेज जैसी सुविधाओं के साथ बेहतर सुगमता प्रदान करती हैं।

Continue Reading
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Trending