राजनीति
झारखंड चुनाव 2024 परिणाम: हेमंत सोरेन की जीत, लोकनीति-सीएसडीएस ने जमीनी हकीकत पर किया विश्लेषण
Jharkhand Election Result 2024: हेमंत ने ऐसे जीता झारखंड का रण, लोकनीति-सीएसडीएस ने करीब से जानी जमीनी हकीकत
प्रभात खबर के अनुरोध पर भारत की मशहूर शोध संस्था सीएसडीएस (सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज, दिल्ली) ने झारखंड विधानसभा चुनाव के परिणाम के विभिन्न पहलुओं का गहन विश्लेषण किया है कि विपक्ष के जोरदार प्रचार अभियान के बावजूद चुनाव में हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन की प्रचंड जीत कैसे हुई. इस गठबंधन के दोबारा सत्ता में आने की क्या वजह रही. आज पढ़िए ऐसे ही अन्य मुद्दों पर आधारित विश्लेषण शृंखला की पहली कड़ी.
Jharkhand Election Result 2024 : लोकनीति-सीएसडीएस के फाउंडर संजय कुमार, एनआइटीटीइ एजुकेशन ट्रस्ट के निदेशक-अकादमिक संदीप शास्त्री और स्टडीज इन इंडियन पॉलिटिक्स के चीफ एडिटर सुहास पलसीकर ने झारखंड में इंडिया गठबंधन की जीत के कारणों को जानने का प्रयास किया है.
क्षेत्रीय दल रहे बीजेपी को रोकने में कामयाब, ये दो रहे मुख्य कारण
फिर एक बार एक क्षेत्रीय पार्टी भाजपा के रास्ते की बाधा बनी. हालांकि चुनावी नतीजा तो विजयी और पराजित प्रत्याशियों के ब्योरे में मिलेगा, लेकिन झारखंड ने जो व्यापक तस्वीर पेश की, उसके दो प्रधान तत्व हैं. एक है राज्य स्तरीय शक्तियों का पूरी क्षमता और दृढ़ता से अखिल भारतीय अतिक्रमण का मुकाबला करना और उसे रोकना. और दूसरा है आदिवासी अस्मिता पर केंद्रित क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक पहचान पर आधारित अखिल भारतीय आक्रामक अभियान के, जिसका लक्ष्य आदिवासियों को अपनी ओर आकर्षित करना था, बीच कड़ा मुकाबला. झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाले गठबंधन की प्रभावी जीत रणनीतिक स्तर पर प्रभावी गठबंधन प्रबंधन और अभियान की जीत है, झामुमो नीत सरकार अपने प्रशासनिक ट्रैक रिकॉर्ड और आदिवासी हितों को सुरक्षित रखने की अपनी छवि की रक्षा कर रही थी. दूसरी ओर, भाजपा नीत गठबंधन ने एक व्यापक विमर्श पेश करने की कोशिश की, जो समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करती थी. इसके अलावा उसने सत्तारूढ़ सरकार की काहिली और भारी भ्रष्टाचार पर तीखा हमला बोला. भाजपा के विमर्श में हिंदूत्व को जगाने की आक्रामक रणनीति भी थी.
झामुमो ने आदिवासी इलाकों में किया स्वीप तो गैर आदिवासी इलाकों में बीजेपी रही मजबूत
झामुमो गठबंधन न सिर्फ अपना आदिवासी वोट बैंक बचाने में सफल रहा, बल्कि कांग्रेस के साथ मिलकर उसने गैर आदिवासी इलाकों में भी पैठ बढ़ायी. भाजपा ने गैर-आदिवासी इलाकों में तो अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन आदिवासी इलाकों में उसकी मजबूत पकड़ नहीं बन पायी. विजयी गठबंधन में झामुमो निश्चित तौर पर नेतृत्वकारी भूमिका में रहा और उसकी जीत का आंकड़ा 80 फीसदी रहा. गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका जूनियर पार्टनर की रही और उसकी जीत का आंकड़ा 50 फीसदी से थोड़ा ही अधिक रहा.
सभी समाजों ने किया इंडिया गठबंधन का समर्थन, एनडीए बीजेपी पर रहा निर्भर
लोकनीति-सीएसडीएस का सर्वे उन तत्वों को चिह्नित करता है, जिसने इंडिया गठबंधन की जीत में भूमिका निभायी है. इंडिया गठबंधन में जहां तमाम पार्टियों के बीच बेहतर तालमेल था और जिसे राज्य के सभी क्षेत्रों से समर्थन मिला, वहीं एनडीए गठबंधन ज्यादातर भाजपा पर निर्भर था. इंडिया गठबंधन के साथियों के बीच सीटों का बेहतर वितरण हुआ, जबकि एनडीए में हर 10 सीटों में से सात पर भाजपा लड़ रही थी. इंडिया गठबंधन में सभी साथियों के साझा संदेश का उनको लाभ मिला. वोटरों के सभी आयु वर्गों के बीच इसे समर्थन मिला. ग्रामीण इलाकों में इंडिया गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया. गरीब, मध्य वर्ग और कम पढ़े-लिखे वोटरों का समर्थन इसके साथ था. अनुसूचित जातियों-जनजातियों, मुस्लिमों तथा यादवों का इसे समर्थन मिला. इसके सामाजिक गठजोड़ का पता इसमें शामिल झामुमो, कांग्रेस, राजद तथा कम्युनिस्ट पार्टियों को देखकर चलता है.
मतदाताओं ने पहले से मन बना लिया था किसे करना है वोट
लोकनीति-सीएसडीएस का सर्वे राज्य के वोटरों के बीच के तीव्र ध्रुवीकरण का पता देता है. हेमंत सोरेन सरकार के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट दो तिहाई मतदाताओं ने सत्तारूढ़ गठबंधन के पक्ष में वोट दिया. दूसरी तरफ सत्तारूढ़ गठबंधन के कामकाज से असंतुष्ट दो तिहाई लोगों ने एनडीए गठबंधन के पक्ष में वोट दिया. इससे साफ है कि संतुष्टि से ज्यादा मतदाताओं द्वारा पहले से एक गठबंधन के पक्ष में वोट देने के फैसले से यह परिणाम आया. हालांकि सोरेन सरकार की तुलना में मोदी सरकार के प्रति कुल संतुष्टि ज्यादा थी, लेकिन झामुमो के प्रति मतदाताओं के समर्थन ने वोटिंग पैटर्न को प्रभावित किया.
जमीनी स्तर पर मतदाता सरकार के विकास कार्य से नहीं थे संतुष्ट
आंकड़े बताते हैं कि राज्य के मतदाता जमीनी स्तर पर सरकार के विकास कार्यक्रमों से बहुत संतुष्ट नहीं थे. वे यह मान रहे थे कि पिछले पांच वर्षों में उद्योगों के स्तर पर स्थिति खराब हुई है और भ्रष्टाचार बढ़ा है. जबकि सांप्रदायिक हिंसा और नक्सलवाद के मोर्चे पर हालत में सुधार आया है. पर जिन लोगों ने बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई और विकास के अभाव की चर्चा की, उन्होंने इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों को वोट दिया.
महिलाओं ने बड़ी संख्या में किया इंडिया गठबंधन को वोट
दूसरी बात यह कि महिला मतदाताओं ने इंडिया गठबंधन को तरजीह दी. जिस एक और तत्व ने इंडिया गठबंधन के पक्ष में भूमिका निभायी, वह दरअसल मतदाताओं की यह सोच थी कि इस चुनाव में झारखंड राज्य का मुद्दा सबसे बड़ा है. एनडीए गठबंधन के समर्थन में आये राष्ट्रीय नेताओं का भी चुनावी नतीजे पर असर पड़ा.
एनडीए गठबंधन पूरी तरह पीएम मोदी पर निर्भर, लेकिन जनता को सीएम के तौर पर हेमंत पसंद
एनडीए गठबंधन को वोट देने वालों में से ज्यादातर ने नरेंद्र मोदी की भूमिका को रेखांकित किया. ऐसे ही, इंडिया गठबंधन को वोट देने वालों ने राहुल गांधी के असर को स्वीकारा. सर्वे में शामिल लोगों में से एक तिहाई हेमंत सोरेन को फिर से मुख्यमंत्री देखना चाहते थे. इस तरह भाजपा जहां नरेंद्र मोदी के करिश्मे पर पूरी तरह निर्भर था, वहीं इंडिया गठबंधन में प्रांतीय और राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं ने अपने प्रत्याशियों के पक्ष में वोट मांगे. इस तरह इंडिया गठबंधन की जीत आदिवासी इलाकों में झामुमो के और गैर आदिवासी इलाकों में उसकी सहयोगी पार्टियों के असर के कारण संभव हुई. जनसांख्यिकी के विभिन्न पैमाने पर इंडिया गठबंधन का समर्थन एनडीए से अधिक दिखा.
नहीं चला बंग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा, मतदाताओं ने स्थानीय मुद्दों को दी तरजीह
बेशक सत्तारूढ़ गठबंधन के दौर में भ्रष्टाचार की बात उभर कर सामने आयी, लेकिन दूसरे वोटिंग पैटर्न के हावी होने के कारण इंडिया गठबंधन सत्ता में दोबारा वापस आया. भाजपा ने समान नागरिक संहिता और बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दों पर मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने की कोशिश की, लेकिन राज्य के मतदाताओं पर स्थानीय मुद्दों का असर ज्यादा था, जो कि सरना पहचान पर मतदाताओं की प्रतिक्रियाओं से पता चलता है. संताल समुदाय को छोड़कर भाजपा राज्य के और किसी आदिवासी समुदाय को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पायी. दीर्घावधि में भाजपा के सामने इस राज्य के आदिवासियों को अपने पक्ष में एकजुट करने की चुनौती रहेगी. इसे साधने के अलावा राज्य में हिंदुत्व के मुद्दे को धार दे पाने में उसकी सफलता से ही झारखंड में भविष्य का राजनीतिक मुकाबला तय होगा.
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।
देश
राम मंदिर के चंदे पर सियासत तेज: अखिलेश यादव के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार
नई दिल्ली अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा मंदिर के चंदे में कथित गबन और हेराफेरी के आरोपों पर अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है।
केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने विपक्ष और इंडिया (INDIA) गठबंधन पर देश का माहौल खराब करने का आरोप लगाया है।
- केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का बड़ा बयान: इस पूरे विवाद पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने साफ किया कि राम मंदिर से जुड़े मामलों की देखरेख के लिए ट्रस्ट मौजूद है। उन्होंने कहा:
“देखिए, यह ट्रस्ट का काम है। ट्रस्ट ने इसके लिए एक जांच कमेटी बनाई हुई है और मामले की जांच चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सख्त सजा दी जाएगी।”
- ‘विपक्ष का नैरेटिव अब नहीं चलेगा’ पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि सपा और पूरा एनडी अलायंस (विपक्ष) केवल देश में एक गलत नैरेटिव (माहौल) तैयार करना चाहता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इसी गलत नैरेटिव के दम पर चुनाव जीतना चाहता है, लेकिन देश की जनता अब उनकी इस राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है। बंगाल, बिहार, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि जनता अब इनके झांसे में आने वाली नहीं है।
- अखिलेश के ‘PDA’ पर साधा निशाना: अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर तंज कसते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सपा का पीडीए सिर्फ कागजों और बयानों में है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन्होंने कभी किसी ‘पीडीए’ वर्ग का भला नहीं किया, बल्कि सिर्फ अपने परिवार का विकास किया।
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