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छत्तीसगढ़

प्रदेश में 10 फरवरी को मनाया जाएगा राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस

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प्रदेश में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टी.एस. सिंहदेव 10 फरवरी को इसका शुभारंभ करेंगे। वे रायपुर के सिविल लाइन स्थित अपने निवास कार्यालय में दोपहर 12 बजे बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाकर इस अभियान की शुरुआत करेंगे। 10 फरवरी को प्रदेश के 30 जिलों में एक वर्ष से 19 वर्ष तक के सभी बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को आंगनबाड़ियों, शासकीय स्कूलों, स्वास्थ्य केन्द्रों, अनुदान प्राप्त निजी स्कूलों और तकनीकी शिक्षा संस्थानों में कृमि की दवा का सेवन कराया जाएगा। रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कृमिनाशक एल्बेन्डाजॉल के साथ फाइलेरिया की भी दवा खिलाई जाएगी। बच्चों व किशोरों के अच्छे स्वास्थ्य, बेहतर पोषण, नियमित शिक्षा तक पहुंच और जीवन की गुणवत्ता में बढ़ोतरी के लिए कृमिनाशक दवा देना आवश्यक है।

शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रम के उप संचालक डॉ. व्ही.आर. भगत ने बताया कि प्रदेश के 30 जिलों में एक वर्ष से 19 वर्ष तक के 88 लाख 59 हजार बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को कृमिनाशक दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। रायपुर, गरियाबंद और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में बच्चों को पहले ही कृमि मुक्ति की दवा खिलाई जा चुकी है। उन्होंने बताया कि स्कूलों में शिक्षकों द्वारा एवं आंगनबाड़ियों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कृमिनाशक दवा एल्बेन्डाजॉल 400 एमजी की दवा का सेवन कराया जाएगा। जो बच्चे 10 फरवरी को दवा खाने से रह जाएंगे, उन्हें 15 फरवरी को मॉप-अप दिवस पर दवा का सेवन कराया जाएगा। कृमिनाशक दवा से बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण के स्तर, एनीमिया की रोकथाम, बौद्धिक विकास तथा शाला में उपस्थिति में सुधार आएगा।

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डॉ. भगत ने बताया कि कृमि मुक्ति के लिए एक वर्ष से दो वर्ष के बच्चों को कृमिनाशक दवा एल्बेन्डाजॉल की आधी गोली पीसकर, दो से तीन वर्ष के बच्चों को एक गोली पीसकर, तीन से पांच वर्ष के बच्चों को एक गोली चबाकर तथा छह वर्ष से 19 वर्ष के बच्चों एवं किशोर-किशोरियों को एक गोली चबाकर पानी के साथ खिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि कृमिनाशक दवा का सेवन बच्चों व किशोरों के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। बच्चों के शरीर में कृमि के कारण कुछ सामान्य प्रतिकूल प्रभाव जैसे जी मिचलाना, उल्टी, दस्त, पेट में हल्का दर्द और थकान का अनुभव हो सकता है। इसके अतिरिक्त जिन बच्चों को तीव्र कृमि संक्रमण होता है, उन्हें आमतौर पर कुछ अस्थायी प्रभाव भी हो सकते हैं, जिसे आसानी से स्कूल और आंगनबाड़ी केन्द्रों में ही देखभाल करते हुए ठीक किया जा सकता है। बच्चों एवं किशोरों में ये लक्षण पाए जाने पर उन्हें पीने का साफ़ पानी दें और उन्हें अपनी निगरानी में रखें।

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कृमि की दवा वर्ष में दो बार देना आवश्यक

राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रो में बच्चों को एक-एक अल्बेंडाजोल की टेबलेट खिलाई जाएगी। ऐसे बच्चे और किशोर-किशोरी जो स्कूल नहीं जाते हैं उन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार पेट में कृमि होने के कई तरह की समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण के प्रति माता-पिता को जागरूक रहना चाहिए। कृमि के कारण बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता व खाने में रूचि घटती है। बच्चे पूरा भोजन तो करते हैं, लेकिन शरीर में नहीं लगता। एल्बेन्डाजॉल की गोली खिलाने से बच्चे एनीमिया का शिकार होने से बच सकते हैं। इससे मानसिक तनाव से छुटकारा मिलता है और बच्चे का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। मानसिक और शारीरिक विकास के लिए एक वर्ष से 19 वर्ष तक के बच्चों को कृमिनाशक दवा खिलाना जरूरी है।

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छत्तीसगढ़

केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

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बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.

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इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.

जा सकती थी नवजात शिशु की जान

डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,

सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.

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परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद

शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.

पहली बार आया अनोखा केस

सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.

 

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छत्तीसगढ़

साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।

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महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार

इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

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कैरियर

कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

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Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।

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बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।

लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार

इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट

पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।

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