छत्तीसगढ़
अबूझमाड़ में नई सुबह, किसानों को मिलने लगा उनका हक, किसान क्रेडिट कार्ड सहित कृषि और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं का मिला लाभ

रायपुर| नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र के किसान वैसे तो शुरू से ही खेती करते आ रहे हैं, लेकिन गांव का सर्वे नहीं होने के कारण उनके पास पट्टे नहीं थे। इस वजह से न तो वे लैम्पस में धान बेच पा रहे थे और न ही उन्हें शासन की किसी योजना का लाभ मिल पा रहा था। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व मेें अबूझमाड़ क्षेत्र के गांवों में राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता के साथ सर्वे का काम तेजी से किया जा रहा है।
ओरछा विकासखंड के चार गांव जहां राजस्व सर्वेक्षण का कार्य पूरा हो चुका है, वहां किसानों को मसाहती पट्टों का वितरण किया गया है। मसाहती पट्टा मिलने के बाद ऐसे किसानों को अब शासन की योजनाओं का लाभ भी मिलना प्रारंभ हो गया है। इस क्षेत्र के कुरूसनार गांव के एक किसान सत्यनारायण उसेंडी ने इस वर्ष पहली बार लैम्पस में धान समर्थन मूल्य पर बेचा और उन्हें धान के एवज में 16 हजार रूपए की राशि मिली। साथ ही राजीव गांधी किसान न्याय योजना की पहली किश्त की राशि भी मिली है। हलांकि उन्होंने अभी अपने खाते की जांच कर नहीं देखा है कि उनके खाते में कितनी राशि आयी है।
सत्यनारायण उसेंडी ने शनिवार 19 जून को नारायणपुर जिले में विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल से वर्चुअल चर्चा के दौरान उन्हें पट्टा मिलने पर धन्यवाद देते हुए बताया कि अब उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ मिलना शुरू हो गया है। उन्होंने बताया कि वे शुरू से ही खेती कर रहे थे। लेकिन अबूझमाड़ क्षेत्र में धान की खरीदी नहीं की जाती थी। मसाहती पट्टा मिलने से इस बार पहली बार उन्होंने लैम्पस में धान बेचा। उनका किसान क्रेडिट कार्ड बन गया है। जिन गांवों का सर्वे हो गया है, वहां शासन की योजना के तहत किसानों के खेत में भूमि समतलीकरण और डबरी निर्माण किया गया है। पूरे गांव की फैंसिंग की गई है और किसानों के खेत में बोरवेल्स भी लगाए गए हैं। कृषि विभाग से अब किसानों को विभिन्न फसलों के बीज वितरण के साथ-साथ मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि उद्यानिकी विभाग की योजना में उनके खेत में ड्रीप लाईन बिछायी गई है और पाली हाउस बनाया गया है। जिनमें वे बरबट्टी की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन की योजना से उन्हें काफी लाभ हुआ है।
मुख्यमंत्री बघेल ने उनसे पूछा कि उनके गांव में कितने किसान खेती कर रहे हैं और उनके पास कितनी जमीन है। सत्यनारायण उसेंडी ने बताया कि उनके गांव में लगभग 40 किसान खेती कर रहे हैं। किसानों के पास 4 एकड़ से लेकर 8 एकड़ जमीन है। इस बार उन्होंने 10 क्विंटल धान पहली बार बेचा। मुख्यमंत्री ने उसेंडी से कहा कि वे शासन की योजनाओं का लाभ उठाएं और दूसरे लोगों को योजनाओं के बारे में बताएं। राज्य सरकार विशेषकर आदिवासियों के लिए अनेक योजनाएं लेकर आयी है, इनमें उद्यानिकी, मछलीपालन, सब्जी उत्पादन, धान उत्पादन से जुड़ी अनेक योजनाएं है। ज्याद से ज्यादा लोगों को इन योजनाओं का लाभ लेना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि नारायणपुर जिले के ओरछा और नारायणपुर विकासखंड के गांवों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। ओरछा के 237 और नारायणपुर विकासखंड के 9 गांवों में सर्वेक्षण नहीं हो पाया था। राज्य सरकार द्वारा इन गांवों का सर्वेक्षण प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है। ओरछा विकासखंड के 4 गांवों को प्रारंभिक सर्वेक्षण पूरा हो गया है। उन्हें भुइंया सॉफ्टवेयर से जोड़ दिया गया है। इससे अब वहां के 1041 किसान शासन की योजनाओं का लाभ ले सकेंगे।
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है


















