Connect with us

छत्तीसगढ़

पुलिस महानिरीक्षक बद्री नारायण मीणा के निर्देशन में “PROCEDURES & MANDATORY PROVISIONS OF NDPS ACT” विषय पर आयोजित की गई एक दिवसीय कार्यशाला

Published

on

One day workshop organized on "PROCEDURES & MANDATORY PROVISIONS OF NDPS ACT" under the direction of IG Badri Narayan Meena

बिलासपुर| एन.डी.पी.एस. एक्ट के तहत दोषमुक्त हुए प्रकरणों की समीक्षा उपरांत विवेचना कार्यवाही में होने वाली त्रुटियों से विवेचकों को कराया गया अवगत। पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार ड्रग कानून प्रवर्तन के प्रदर्शन, प्रभावशीलता एवं समझ को बेहतर बनाने के लिए बिलासपुर रेंज के जिलों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के लिए दिनांक 11.01.2023 को “PROCEDURES & MANDATORY PROVISIONS OF NDPS ACT” विषय पर कार्यशाला का आयोजन कार्यशाला का शुभारंभ बद्री नारायण मीणा भापुसे, पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज, बिलासपुर एवं पारूल माथुर, उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर की गरिमामय उपस्थिति में जल संसाधन परिसर स्थित ‘‘प्रार्थना सभा भवन’’ में सम्पन्न हुआ।

इस कार्यशाला में रेंज के जिलों से नामांकित 08 राजपत्रित अधिकारियों सहित विवेचक स्तर के 80 पुलिस अधिकारी सम्मिलित हुए। कार्यशाला में एन.सी.बी. इन्दौर मध्यप्रदेश के आई.ओ. रामखिलाड़ी मीणा एवं संयुक्त संचालक अभियोजन, जांजगीर-चांपा माखन लाल पाण्डेय द्वारा प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया। पारूल माथुर, उमनि/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर द्वारा प्रारंभिक उद्बोधन में कार्यशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि स्वापक पदार्थ एवं मनःप्रभावी अधिनियम, 1985 के तहत मामलों में अपराधी को सजा दिलाया जाना पुलिस विभाग के लिए ही नहीं अपितु समाज के लिए भी एक चुनौती है।

अपराधी को सजा हो इसके लिए आवश्यक है विवेचना उच्च स्तर की हो, प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की खामी न हो। न्यायालय में अपराधी को सजा दिलाये जाने की सफलता के लिए आवश्यक है कि पूरी कार्यवाही पारदर्शी एवं विधिक प्रावधान अनुरूप किया जाना चाहिए। बद्री नारायण मीणा, पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि कार्यशाला के आयोजन को समझने के लिए आवश्यक है कि जब कोई व्यक्ति नशे में लिप्त होता है तो उसका दुष्प्रभाव परिवार, समाज पर पड़ता है तथा वह अपराध में लिप्त हो जाता है, इन स्थितियों पर विचार करना सभी का दायित्व है। इस अधिनियम के तहत सबूत का भार आरोपी पक्ष पर है कि वो अपने को निर्दोष सिद्ध करें। एनडीपीएस एक्ट की प्रक्रिया को पुलिस अधिकारी जटिल समझते हैं, जबकि अधिनियम में ही विवेचना के प्रत्येक कड़ी के प्रावधान निहित हैं जिसे इस तरह की कार्यशाला के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है। अधिनियम के तहत मामलों में दोषमुक्ति के कारणों पर प्रकाश डालते हुए मीणा ने बताया कि इसका मूलभूत कारण है कि विवेचक अधिनियम का अध्ययन नहीं करते जिससे विवेचना के दौरान प्रक्रियात्मक त्रुटि करते हैं जिसका लाभ आरोपी को प्राप्त होता है। इस व्यापार में संलिप्त सभी व्यक्तियों के विरूद्ध प्रभावी कार्यवाही किया जाना चाहिए। अवैध व्यापार से अर्जित परिसंपत्तियों का पता लगाकर उसकी कुर्की की कार्यवाही किया जाना चाहिए। एन.सी.बी.इन्दौर से कार्यशाला में प्रशिक्षण देने उपस्थित रामखिलाड़ी मीणा, आई.ओ. द्वारा कार्यशाला के प्रशिक्षण सत्र का आरंभ किया गया जिसमें उनके द्वारा एनडीपीएस एक्ट के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई आसूचना, प्रवर्तन और समन्वय के अनुसार कार्य करते हुए नशीले पदार्थो की आपूर्ति में कमी लाने की गुर बताये गये। नारकोटिक्स ड्रग्स एवं सायकोट्रापिक पदार्थों की पहचान, ड्रग डिटेक्शन में नवीनतम उपकरणों एवं फिल्ड टेस्ट किट का उपयोग तथा ड्रग से अवैध रूप से अर्जित सम्पत्ति की वित्तीय जॉंच एवं इसकी जप्ती की कार्यवाही की प्रक्रिया के संबंध में जानकारी दी गई।

माखन लाल पाण्डेय, संयुक्त संचालक, अभियोजन द्वारा एन.डी.पी.एस. एक्ट के अंतर्गत की जाने वाली कार्यवाही में होने वाली प्रक्रियात्मक त्रुटियों को समझाया गया। एन.डी.पी.एस. मामलों की केस स्टडी के साथ इसमें आरोपियों के दोषमुक्त होने के कारणों को प्रकट करते हुए एन.डी.पी.एस. एक्ट के साथ ही दंड प्रक्रिया संहिता की कार्यवाही को भी समझाया गया। इस अधिनियम के तहत समय-समय पर माननीय न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों पर चर्चा करते हुए एन.डी.पी.एस. की प्रक्रिया एवं उसके निराकरण के संबंध में नवीनतम् दिशा निर्देशों एवं नियमों से अवगत कराया गया। कार्यशाला का समापन दीपमाला कश्यप, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, कार्यालय पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज द्वारा बिलासपुर रेंज में विगत वर्षों में हुए दोषमुक्ति के प्रकरणों की समीक्षा कर विवेचकों द्वारा की गई त्रुटियों के बारे में अवगत कराया गया।

अर्चना झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही द्वारा प्रशिक्षण में उपस्थित अधिकारियों का आभार व्यक्त किया गया। पुलिस महानिरीक्षक मीणा द्वारा प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस कार्यशाला प्रशिक्षण में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) बिलासपुर राजेन्द्र जायसवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही अर्चना झा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मुंगेली प्रतिभा पाण्डेय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) बिलासपुर राहुल देव शर्मा, संदीप कुमार पटेल (भापुसे) नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाईन बिलासपुर, नगर पुलिस अधीक्षक कोरबा विश्वदीपक त्रिपाठी, उप पुलिस अधीक्षक (बा.अ.अ.अ.ई.) जांजगीर-चांपा चंद्रशेखर परमा, उप पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) सक्ती अंजली गुप्ता, उप पुलिस अधीक्षक (लाईन) बिलासपुर मंजूलता केरकेट्टा उपस्थित रहे।

यह भी पढ़ें   छत्तीसगढ़: स्कूल में 5 छात्र निकले कोरोना पॉजिटिव
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

छत्तीसगढ़

केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

Published

on

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.

यह भी पढ़ें   मुंगेली : सहायक शिक्षक संवर्ग सीधी भर्ती - 2019, अनुपूरक सूची से पात्र पाए गए अभ्यर्थियों की पदांकन सूची जारी

इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.

जा सकती थी नवजात शिशु की जान

डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,

सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.

यह भी पढ़ें   छत्तीसगढ़ में अब तक 825.1 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद

शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.

पहली बार आया अनोखा केस

सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.

 

Continue Reading

छत्तीसगढ़

साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

Published

on

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।

यह भी पढ़ें   ITI की परीक्षाओं में हो रही देरी को लेकर ABVP ने किया कलेक्ट्रेट को घेरने का ऐलान

महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार

इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

Continue Reading

कैरियर

कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

Published

on

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।

यह भी पढ़ें   छत्तीसगढ़ में अब तक 108.5 मि.मी. औसत वर्षा दर्ज

बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।

लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार

इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें   कोरिया: मोबाइल दुकान में हुए चोरी का पर्दाफाश, दो आरोपी एक नाबालिक गिरफ्तार

बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट

पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।

Continue Reading
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Trending