देश
Pakistan Women Prisoners: पाकिस्तान की जेलों में महिला कैदियों के साथ होती है ऐसी ‘दरिंदगी’
Pakistan Women Prisoners: पाकिस्तान की जेलों में महिलाओं को भेदभाव और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है. कई महिलाओं को मौखिक और शारीरिक शोषण का शिकार होना पड़ता है और यहां तक कि जेल के कर्मचारियों और अन्य कैदियों द्वारा चिकित्सा उपचार से भी इनकार कर दिया जाता है. द नेशन ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है.
जेल में एक महिला का अनुभव अक्सर पीड़ा, अन्याय और धराशायी आशाओं में से एक होता है. कई पाकिस्तानी महिलाएं उन जेल की दीवारों के पीछे एक ऐसी सच्चाई को झेल रही हैं जिसे हम में से ज्यादातर लोग अनुमान ही लगा सकते हैं. वे एक ऐसी प्रणाली से लड़ती हैं जिसने उन्हें भुला दिया है. हालांकि उनकी चीखों को दबा दिया गया है, लेकिन उनकी पीड़ा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है.
पाकिस्तान में महिलाओं के उत्थान के लिए काम कर रही एक शिक्षाविद, परोपकारी और सामाजिक कार्यकर्ता समीना शाह ने कहा, ‘मनमानी बंदी पाकिस्तानी जेलों में महिलाओं के सामने आने वाले सबसे दबाव वाले मुद्दों में से एक है.’शाह ने यह भी कहा, ‘कई महिलाओं को बिना आरोप या मुकदमे के हिरासत में लिया जाता है, अक्सर सांस्कृतिक और सामाजिक मानदंडों के परिणामस्वरूप जिनमें महिलाओं को संपत्ति के रूप में देखा जाता है और जो उनकी आवाजाही की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करते हैं.’
2020 में ड्रग्स की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद 27 वर्षीय एक महिला, शुमैला कंवल की हिरासत में मौत हो गई. उसकी मौत पाकिस्तान में हिरासत में होने वाली मौतों के मुद्दे को सामने लाई, जिनके साथ अक्सर पुलिस और जेल कर्मचारियों द्वारा दुर्व्यवहार से जुड़ी होती हैं. ह्यूमन राइट्स वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की जेलों में अधिकांश महिलाएं ड्रग्स से संबंधित अपराधों के लिए बंद हैं. ये महिलाएं ड्रग्स की तस्कर नहीं हैं, बल्कि निम्न स्तर के कोरियर या नशा करने वाली हैं जो ड्रग्स को लाने ले जाने को मजबूर हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘पाकिस्तानी जेलों में बंद महिलाओं को कानूनी परामर्श देने में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ता है..’ द नेशन के अनुसार, यह आंशिक रूप से, कानूनी सहायता संगठनों के बीच संसाधनों और कौशल की कमी के अलावा सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोणों की वजह से होता, जो कानूनी प्रतिनिधित्व की बात करते समय महिलाओं को कम सम्मान देते हैं.कानूनी मदद की जेल में बंद महिलाओं तक पहुंचना जरूरी है.
यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है कि महिलाओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार नहीं किया जाए और कानूनी प्रक्रिया के दौरान उनके अधिकारों को बनाए रखा जाए.पाकिस्तानी जेलों में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोणों को संबोधित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. इसके लिए लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की जरूरत है. इसमें लिंग आधारित हिंसा और भेदभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने के अभियान के साथ-साथ महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक विकास के कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं.स्वास्थ्य सेवाओं की कमी बढ़ती है मुश्किलस्वास्थ्य सेवाओं की कमी जेल में बंद महिलाओं की पीड़ा को और बढ़ा देती है. यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि महिलाओं की महत्वपूर्ण दवाओं और मेडिकल उपकरणों के साथ-साथ कुशल मेडिकल पेशेवरों तक पहुंच हो जो उचित देखभाल प्रदान कर सके.इसके अलावा, रेड क्रॉस की अंतर्राष्ट्रीय समिति के अनुसार, कुशल मेडिकल कर्मचारियों की कमी और खराब मेडिकल सुविधाओं के कारण पाकिस्तानी जेलों में कई महिलाएं अनुपचारित बीमारियों और चोटों से पीड़ित हैं.
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान
रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत
रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
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परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
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भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
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खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास
नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।
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