Connect with us

देश

Ram Mandir: राम मंदिर उद्घाटन में 100 से ज्यादा विदेशी मेहमान होंगे शामिल, पीएम मोदी के इस विदेशी समर्थक की हो रही सबसे ज्यादा चर्चा, ये है वजह

Published

on

Ram Mandir News: राम मंदिर उद्घाटन कार्यक्रम के लिए वीएचपी की गेस्ट लिस्ट में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका सहित 53 देशों के मेहमान शामिल हैं. सबसे ज्यादा गेस्ट अमेरिका से हैं.

Ayodhya Ram Mandir Inauguration: अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां लगभग पूरी हो गईं. इस बड़े आयोजन के लिए हजारों मेहमानों को आमंत्रित किया गया है. इन मेहमानों में सिर्फ देश के ही नहीं बल्कि विदेशी मेहमान भी शामिल हैं. विदेश से आने वाले मेहमानों में सबसे ज्यादा चर्चित नाम डॉ. भरत बरई का है. पेशे से ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. बरई वही शख्स हैं, जिन्होंने 2014 की शुरुआत में अमेरिका में नरेंद्र मोदी के लिए वीज़ा मंजूरी की पैरवी की थी.

इनके अलावा इंडियाना में नोकिया बेल लैब्स के एक वरिष्ठ अधिकारी, एक नॉर्वेजियन सांसद, एक न्यूजीलैंड वैज्ञानिक, एक फिजी उद्योगपति और संत जिन्होंने कैरेबियन में हिंदू स्कूल स्थापित किए हैं . ये उन 100 अंतरराष्ट्रीय मेहमानों में से हैं जिन्हें 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर उद्घाटन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है.

यह भी पढ़ें   CG Election: निकाय चुनाव की घोषणा से पहले दावेदारों की भीड़, लॉटरी के बाद मचेगा कोहराम

किस देश से आएंगे कितने मेहमान?

बता दें कि राम मंदिर उद्घाटन कार्यक्रम के लिए विश्व हिंदू परिषद की गेस्ट लिस्ट में अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अफ्रीका सहित 53 देशों के मेहमान शामिल हैं. सबसे अधिक संख्या में निमंत्रण अमेरिका को भेजे गए हैं. यह गेस्ट लिस्ट का लगभग एक-तिहाई है. इसके अलावा हॉन्गकॉन्ग से पांच, दक्षिण कोरिया, मलेशिया और ब्रिटेन से तीन-तीन और जर्मनी और इटली से दो-दो लोगों को आमंत्रित किया गया है.

आखिर कौन हैं डॉ. भरत बरई?

प्रमुख गेस्ट में शामिल डॉ. भरत बरई इससे पहले भी भारत में चर्चा में रह चुके हैं. 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने मोदी के वीजा को मंजूरी देने के लिए अमेरिकी सरकार से पैरवी की थी. दरअसल, उस वक्त नरेंद्र मोदी अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए 10 साल के वीजा प्रतिबंध का सामना कर रहे थे. इन्हें भारतीय जनता पार्टी का प्रबल समर्थक माना जाता है. डॉ. बरई अमेरिका में अपने आवास पर बीजेपी के कई दिग्गजों की मेजबानी कर चुके हैं. इन्होंने इजरायल और भारत के बीच संबंधों को मजबूत करने पर भी काफी काम किया है.

यह भी पढ़ें   सोशल मीडिया पर छाई चूल्हे पर रोटी पकाती हुई ये लड़की, खूबसूरती के कायल हुए लोग, वीडियो वायरल

ये विदेशी मेहमान भी रहेंगे मौजूद

वीएचपी के संयुक्त महासचिव स्वामी विज्ञानानंद जो संगठन के अंतरराष्ट्रीय मामलों को संभालते हैं, ने बताया कि अमेरिका से एक अन्य प्रमुख आमंत्रित व्यक्ति डॉ. अभय अस्थाना हैं, जो इंडियाना में नोकिया बेल लैब्स-सीटीओ के फेलो हैं. डॉ. अभय अस्थाना विश्व हिंदू परिषद ऑफ अमेरिका के अध्यक्ष भी हैं.

इसके अलावा प्रोग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले नॉर्वे के सांसद हिमांशु गुलाटी, न्यूजीलैंड के वैज्ञानिक प्रोफेसर गुना मैगेसन, फिजी के सबसे बड़े कारोबारियों में शामिल जय दयाल, ब्रिटेन में हिंदू स्वयंसेवक संघ के अध्यक्ष धीरज भाई शाह, जर्मनी से अनुभवी विहिप नेता रमेशभाई जैन, इटली से विट्ठल माहेश्वरी, ऑस्ट्रेलिया में वीएचपी अध्यक्ष सुब्रमण्यम राममूर्ति, कनाडा से रतन गर्ग, त्रिनिदाद और टोबैगो के चिन्मय मिशन के संस्थापक और आचार्य स्वामी प्रकाशानंद, गुयाना में प्रतिष्ठित सरस्वती विद्या निकेतन (निजी हिंदू कॉलेज) के संस्थापक और प्रिंसिपल स्वामी अक्षरानंद, श्रीलंका के कारोबारी सदाशिवम और दक्षिण एशिया और अन्य जगहों के विभिन्न देशों के हिंदू नेता गेस्ट लिस्ट का हिस्सा हैं.

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

देश

सीहोर में ब्रिज निर्माण के लिए खुदाई करते समय धंसी मिट्टी, 3 मजदूरों की दबने से मौत

Published

on

मध्य प्रदेश के सीहोर में सोमवार (23 दिसंबर) को बड़ी घटना हो गई। ब्रिज निर्माण के लिए खुदाई करते समय अचानक मिट्टी धंस गई। दबने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। एक को सुरक्षित निकाल लिया।

मध्य प्रदेश के सीहोर में सोमवार (23 दिसंबर) को बड़ी घटना हो गई। बुधनी में ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। पुलिया के पास खुदाई करते समय अचानक मिट्टी धंस गई। मिट्‌टी में दबने से 3 मजदूरों की मौत हो गई। एक को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया है। घटना शाहगंज थाना क्षेत्र के सियागहन गांव की है। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।

यह भी पढ़ें   Viral: रस्मों के दौरान दुल्हन का गुस्सा देख उड़ी दूल्हें के चेहरे की हवाइयां, लोग बोले- ‘इसका तो टाइम अभी से खराब हो गया’

रेस्क्यू कर एक को सुरक्षित बाहर निकाला
शाहगंज थाना क्षेत्र के सियागहन गांव में ब्रिज का निर्माण कार्य चल रहा है। सोमवार को चार मजदूर निर्माण के लिए दूसरी पुलिया के पास से मिट्टी खोद रहे थे। खुदाई के समय अचानक मिट्टी धंस गई। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंची। रेस्क्यू टीम ने एक मजदूर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। तीन की मौत हो गई।

हादसे में इनकी हुई मौत
पुलिस के मुताबिक, लटेरी (विदिशा) निवासी करण (18) पिता घनश्याम, रामकृष्ण उर्फ रामू (32) पिता मांगीलाल गौड और गुना के रहने वाले भगवान लाल पिता बरसादी गौड़ की मौत हो गई। लटेरी निवासी वीरेंद्र पिता सुखराम गौड (25) को सुरक्षित बाहर निकाला गया। वीरेंद्र को नर्मदापुरम रेफर किया है।

यह भी पढ़ें   कोरिया: आज बैकुंठपुर ​के दौरे पर रहेंगे सीएम भूपेश बघेल, आदिवासी सम्मेलन में होंगे शामिल

राजलक्ष्मी कंस्ट्रक्शन करवा रहा निर्माण
प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, राजलक्ष्मी कंस्ट्रक्शन पुलिया का निर्माण कार्य करा रहा है। पुलिया सियागहन और मंगरोल गांव को जोड़ती है। पुलिया की रिटेनिंग वॉल बनाते समय पहले से बनी रोड की रिटेनिंग वॉल का स्लैब धंस गया। पोकलेन मशीन से मिट्टी हटाकर चारों मजदूरों को बाहर निकाला गया, लेकिन तीन की मौत हो गई। वीरेंद्र का इलाज चल रहा है।

Continue Reading

देश

इंजीनियर अतुल के बेटे की कस्टडी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला, 4 साल के बच्चे की तलाश जारी

Published

on

Atul Subhash Suicide: एआई इंजीनियर का परिवार बिहार के समस्तीपुर में रहता है। निकिता और अतुल का 4 साल का एक बेटा है। अतुल के पिता पीएम मोदी से पोते की कस्टडी दिलाने की गुहार लगा चुके हैं।

Atul Subhash Suicide: बेंगलुरु के इंजीनियर अतुल सुभाष की मां अंजू मोदी ने अपने 4 साल के पोते की कस्टडी के लिए शुक्रवार (20 दिसंबर) को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। सुभाष ने अपने सुसाइड नोट और वीडियो में पत्नी निकिता सिंघानिया और ससुराल पक्ष पर उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। जिसके बाद बेंगलुरु पुलिस ने निकिता समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बता दें कि एआई इंजीनियर अतुल ने पिछले 9 दिसंबर को बेंगलुरु स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

पोते के ठिकाने को लेकर गहरी चिंता
अंजू मोदी ने पोते के ठिकाने का पता लगाने और उसकी कस्टडी सुनिश्चित करने के लिए हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की है। इसमें दावा है कि न तो सुभाष की अलग रह रही पत्नी निकिता सिंघानिया और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य, जो फिलहाल हिरासत में हैं, ने बच्चे के ठिकाने की जानकारी दी है। दूसरी ओर, निकिता ने पुलिस से कहा था कि उसका बेटा फरीदाबाद के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई कर रहा है और उसके चाचा सुशील सिंघानिया की देखरेख में है। लेकिन सुशील ने बच्चे की स्थिति की जानकारी होने से इनकार किया है।

यह भी पढ़ें   हेमा मालिनी की बड़ी बेटी की मैरिड लाइफ में हलचल पति Bharat Takhtani से अलग हुईं ईशा देओल

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा
जस्टिस बीवी नागरथना और जस्टिस एन कोटिस्वर सिंह की बेंच ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कर्नाटक की सरकारों को नोटिस जारी कर बच्चे की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी को होगी।

अतुल सुभाष की आत्महत्या से जुड़ी गिरफ्तारी
इंजीनियर सुभाष की आत्महत्या के मामले में कई गिरफ्तारियां हुई हैं। पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा सिंघानिया और साले अनुराग सिंघानिया को बेंगलुरु पुलिस ने 16 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने सुभाष के छोड़े गए सुसाइड नोट और वीडियो के आधार पर तीनों पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया है। अभी वे न्यायिक हिरासत में हैं।

सिंघानिया फैमिली ने जमानत याचिका लगाई
निकिता सिंघानिया के परिजनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मामले में अग्रिम जमानत के लिए अपील की है। वरिष्ठ वकील मनीष तिवारी ने सुशील सिंघानिया की उम्र (69 वर्ष) और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देते हुए आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का दावा किया। जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव ने सुशील को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके और सख्त शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दी है, जिसमें पुलिस जांच के लिए उपलब्ध रहना और पासपोर्ट सरेंडर करना शामिल है।

यह भी पढ़ें   सोशल मीडिया पर छाई चूल्हे पर रोटी पकाती हुई ये लड़की, खूबसूरती के कायल हुए लोग, वीडियो वायरल

अतुल सुभाष के परिवार की क्या है मांग?

इंजीनियर अतुल सुभाष के परिवार ने आरोप लगाया कि निकिता और उनके परिवार ने झूठे कानूनी मामलों और पैसों की मांग कर अतुल को बुरी तरह प्रताड़ित किया। पिता पवन कुमार और भाई बिकास कुमार ने अतुल की अस्थियों को तब तक न बहाने की कसम खाई है जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता।

भाई बिकास कुमार ने कहा- ‘जो लोग इस घटना के पीछे हैं, उन्हें भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए। जब तक हमारे खिलाफ झूठे मामले वापस नहीं लिए जाते, हमें न्याय नहीं मिलेगा। हमारा संघर्ष जारी रहेगा।’

बिकास ने अपने भतीजे की सुरक्षा पर भी चिंता जताई और कहा- ‘मुझे अपने भतीजे (अतुल के बेटे) की सुरक्षा की चिंता है। हमने उसे हाल की तस्वीरों में नहीं देखा है। हम उसके ठिकाने की जानकारी चाहते हैं और उसकी कस्टडी जल्द से जल्द चाहते हैं।’

Continue Reading

देश

10 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें निर्माणाधीन, 200 रेक का निर्माण प्रौद्योगिकी साझेदारों के जिम्मे: अश्विनी वैष्णव

Published

on

  • विश्व स्तरीय यात्रा के अनुभव के लिए भारतीय रेल अप्रैल 2018 से केवल एलएचबी कोच बना रहा है; 2004-14 की तुलना में 2014-24 के दौरान निर्मित एलएचबी कोचों की संख्या 16 गुना से अधिक है।
  • “सुगम्य भारत मिशन” के हिस्से के रूप में भारतीय रेल दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों को अधिकांश मेल/एक्सप्रेस रेलगाड़ियों और वंदे भारत ट्रेनों में व्यापक सुविधाएं प्रदान करता है।

वर्तमान में देश में लंबी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए 10 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें निर्माणाधीन हैं। पहला प्रोटोटाइप निर्मित हो चुका है और इसका फील्ड ट्रायल किया जाएगा। इसके अलावा, 200 वंदे भारत स्लीपर रेक के निर्माण का काम भी प्रौद्योगिकी भागीदारों को सौंपा गया है। सभी रेलगाड़ियों के उपयोग में आने की समयसीमा उनके सफल परीक्षणों पर निर्भर है। 02 दिसंबर 2024 तक, देश भर में छोटी और मध्यम दूरी की यात्रा के लिए भारतीय रेल के ब्रॉड गेज विद्युतीकृत नेटवर्क पर 136 वंदे भारत रेलगाड़ी सेवाएं जारी हैं।

यह भी पढ़ें   अब इतने बजे के बाद नहीं कर पाएंगे मां बम्लेश्वरी के दर्शन

रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक वक्तव्य में कहा कि विश्व स्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए भारतीय रेल के ब्रॉड गेज विद्युतीकृत नेटवर्क पर वर्तमान में चेयर कार वाली 136 वंदे भारत रेल सेवाएं जारी हैं। अक्टूबर 2024 तक वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ियों की कुल क्षमता 100% से अधिक होगी।

एक अन्य प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल की उत्पादन इकाइयां अप्रैल 2018 से केवल एलएचबी कोच बना रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में एलएचबी कोच का उत्पादन लगातार बढ़ा है। 2014-24 के दौरान निर्मित एलएचबी कोच की संख्या 2004-14 के दौरान निर्मित (2,337) संख्या से 16 गुना (36,933) अधिक है। भारतीय रेल (आईआर) ने एलएचबी कोचों की भरमार कर दी है जो तकनीकी रूप से बेहतर हैं और इनमें एंटी क्लाइम्बिंग व्यवस्था, विफलता संकेत प्रणाली के साथ एयर सस्पेंशन और कम संक्षारक शेल जैसी विशेषताएं हैं।

यह भी पढ़ें   Road Accident: जांजगीर-चांपा, NH-49 पर हादसों का सिलसिला 1 की मौत, बेटी घायल, मां की हालत गंभीर

“सुगम्य भारत मिशन” (सुलभ भारत अभियान) के हिस्से के रूप में, भारतीय रेल दिव्यांगजनों और कम गतिशीलता वाले यात्रियों के लिए सुगमता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति कर रहा है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत, रैंप, सुलभ पार्किंग, ब्रेल और स्पर्शनीय संकेत, कम ऊंचाई वाले काउंटर और लिफ्ट/एस्कलेटर जैसी व्यापक सुविधाएँ प्रदान की गई हैं।

नवंबर 2024 तक भारतीय रेल ने 399 स्टेशनों पर 1,512 एस्कलेटर और 609 स्टेशनों पर 1,607 लिफ्टें स्थापित की थीं जो पिछले दशक की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है – क्रमशः 9 और 14 गुना की वृद्धि। इसके अलावा, अधिकांश मेल और एक्सप्रेस रेलगाड़ियों में चौड़े प्रवेश द्वार, सुलभ शौचालय और व्हीलचेयर पार्किंग वाले कोच उपलब्ध हैं, जबकि वंदे भारत रेलगाड़ियां दिव्यांगजनों के लिए स्वचालित दरवाजे, निर्धारित स्थान और ब्रेल साइनेज जैसी सुविधाओं के साथ बेहतर सुगमता प्रदान करती हैं।

Continue Reading
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Trending