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राजनीति

Sharad Pawar राजनीति छोड़ देंगे, महाराष्ट्र चुनाव से पहले एनसीपी सुप्रीमो ने क्या कहा

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Maharashtra महाराष्ट्र: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के सुप्रीमो शरद पवार ने मंगलवार को घोषणा की कि वे भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। अपने पोते युगेंद्र पवार के प्रचार के लिए बारामती दौरे के दौरान एक रैली को संबोधित करते हुए शरद पवार ने खुलासा किया कि 2026 में राज्यसभा का कार्यकाल समाप्त होने के बाद वे चुनावी राजनीति से दूर हो जाएंगे।

पवार ने कहा, “मैंने 14 बार चुनाव लड़ा है और राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद मैं सोचूंगा कि मुझे अपने संसदीय पद से अलग होना चाहिए या नहीं।” उन्होंने कहा, “मैं लोकसभा में चुनाव नहीं लड़ूंगा। मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा। अब तक आप लोगों ने मुझे किसी भी चुनाव के दौरान घर नहीं जाने दिया। हर बार आपने मुझे जिताया है, इसलिए मुझे कहीं रुक जाना चाहिए। नई पीढ़ी को लाना चाहिए।”

83 वर्षीय नेता ने इस बात पर जोर दिया कि वे फिर से चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन सामाजिक कार्यों और महाराष्ट्र के लोगों, खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता अटल है। उन्होंने कहा, “मैंने सामाजिक कार्य नहीं छोड़ा है, मुझे सत्ता नहीं चाहिए, लेकिन मैंने लोगों की सेवा करना बंद नहीं किया है।

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” महाराष्ट्र के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके और दशकों से राष्ट्रीय राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले पवार ने स्पष्ट किया कि चुनावी राजनीति से पीछे हटने का उनका फैसला युवा नेतृत्व के लिए रास्ता बनाने की दिशा में एक जानबूझकर उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा, “मैं सत्ता में नहीं हूं। मैं राज्यसभा में हूं और आखिरी डेढ़ साल बाकी है। मैं पहले ही 14 चुनाव लड़ चुका हूं, मैं और कितने चुनाव लड़ूंगा? अब मुझे लगता है कि नई पीढ़ी को मौका दिया जाना चाहिए।

मैं सामाजिक कार्य करना जारी रखूंगा, खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों, आदिवासियों के लिए। इस काम को जारी रखने के लिए मुझे किसी चुनाव की जरूरत नहीं है।” अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद करते हुए पवार ने कहा, “30 साल पहले मैंने सिर्फ राष्ट्रीय राजनीति करने का फैसला किया और राज्य की सारी जिम्मेदारी अजित पवार को दे दी। करीब 25 से 30 साल तक राज्य की जिम्मेदारी उन्हीं के पास रही। अब अगले 30 साल के लिए व्यवस्था करनी होगी।”

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पवार की यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पवार परिवार के गढ़ बारामती में हाई-प्रोफाइल राजनीतिक मुकाबला होने वाला है। बारामती विधानसभा सीट पर उनके भतीजे युगेंद्र पवार सात बार के विधायक अजित पवार के खिलाफ एक दुर्लभ पारिवारिक मुकाबले में आमने-सामने हैं। यह साल की दूसरी पवार बनाम पवार लड़ाई है, इससे पहले अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले के खिलाफ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था।

देश

‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

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रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना

छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।

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सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज

केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:

“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम

आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”

‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’

दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।

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देश

पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।

  • महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
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साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।

  • पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल

पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

  • ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
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वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।

  • संगठन और रणनीति का मिला लाभ

बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।

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देश

राम मंदिर के चंदे पर सियासत तेज: अखिलेश यादव के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार

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नई दिल्ली  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा मंदिर के चंदे में कथित गबन और हेराफेरी के आरोपों पर अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है।

केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने विपक्ष और इंडिया (INDIA) गठबंधन पर देश का माहौल खराब करने का आरोप लगाया है।

  • केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का बड़ा बयान:  इस पूरे विवाद पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने साफ किया कि राम मंदिर से जुड़े मामलों की देखरेख के लिए ट्रस्ट मौजूद है। उन्होंने कहा:

“देखिए, यह ट्रस्ट का काम है। ट्रस्ट ने इसके लिए एक जांच कमेटी बनाई हुई है और मामले की जांच चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सख्त सजा दी जाएगी।”

  • ‘विपक्ष का नैरेटिव अब नहीं चलेगा’  पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि सपा और पूरा एनडी अलायंस (विपक्ष) केवल देश में एक गलत नैरेटिव (माहौल) तैयार करना चाहता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इसी गलत नैरेटिव के दम पर चुनाव जीतना चाहता है, लेकिन देश की जनता अब उनकी इस राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है। बंगाल, बिहार, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि जनता अब इनके झांसे में आने वाली नहीं है।
  • अखिलेश के ‘PDA’ पर साधा निशाना:  अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर तंज कसते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सपा का पीडीए सिर्फ कागजों और बयानों में है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन्होंने कभी किसी ‘पीडीए’ वर्ग का भला नहीं किया, बल्कि सिर्फ अपने परिवार का विकास किया।
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