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भारत-न्यूजीलैंड अंतर्राष्ट्रीय मैच का टिकट कुछ घंटों में ही सोल्ड आउट

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रायपुर। राजधानी रायपुर में 21 जनवरी को होने वाली पहले अंतर्राष्ट्रीय वनडे क्रिकेट मैच के सारे टिकट बिक गए हैं। दरअसल बुधवार को शाम 4 बजे से ऑनलाइन ऐप पेटीएम के माध्यम से टिकट की बुकिंग शुरू की गई थी। अगले दिन गुरुवार को ही सुबह 11 बजे तक खेलप्रेमियों ने सारे टिकट बुक कर लिए। जैसे ही अन्य लोगोें ने टिकट बुक करना चाहा, तो उनको सीट फुल होने की जानकारी मिली। ऑनलाइन टिकट में 500 से लेकर दस हजार तक की सारी कैटेगरी के टिकट उपलब्ध थे। अब ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले खेलप्रेमियों को दो दिन तक इंतजार करना होगा। स्टेडियम में 65 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता है। चंद घंटों में पूरे टिकट बिकने से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि खेलप्रेमियों किस कदर मैच को लेकर उत्साह है।

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इन्हें कराया जाएगा टिकट उपलब्ध

14 से 17 जनवरी तक जिन लोगों ने ऑनलाइन टिकट बुक कराया है, उनको टिकट उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें किसी को कुरियर के माध्यम से घर पहुंच सेवा मिलेगी, तो किसी को फिजिकल तौर पर काउंटर के माध्यम से टिकट प्राप्त होगा, क्योंकि कई दर्शकों ने ऑनलाइन टिकट बुक के दौरान फ्री डिलीवरी का ऑपशन सलेक्ट किया होगा, उनको घर पहुंच सेवा मिलेगी और यदि फिजिकल का सलेक्ट किया होगा, तो उनको काउंटर के माध्यम सेटिकट उपलब्ध कराया जाएगा।

यहां रुकने की संभावना

19 जनवरी को फ्लाइट से भारत व न्यूजीलैंड की टीम रायपुर पहुंचेगी। जानकारी के अनुसार टीम को लभांडी स्थित कोर्टयार्ड बाय मैरिएट होटल रायपुर में रुकाया जा सकता है। 20 जनवरी को दोनों टीम स्टेडियम में प्रेक्टिस करने पहुंचेगी, वहीं 21 को दोपहर में दोनो देशों के बीच वनडे सीरिज का दूसरा जबरदस्त मुकाबला देखने मिलेगा। स्टूडेंट कोटा की सीटें बची छात्र-छात्राओं के लिए जनरल कैटेगरी के अपर फ्लोर पर लगभग 1500 सीटों का कोटा निर्धारित है। छात्र आईडी दिखाकर एक परिचयपत्र पर एक टिकट ही खरीद सकेंगे, छात्रों के लिए 300 रुपए में टिकट मिलेंगे। 14 जनवरी से आरडीसीए ग्राउंड पर ऑफलाइन माध्यम से टिकट दिया जाएगा। पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर छात्रों को टिकट मिलेगा।

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स्टेडियम में मेंटनेंस कार्य में तेजी

स्टेडियम में मेंटनेंस का कार्य तेजी से किया जा रहा है। ग्राउंड को भी व्यवस्थित किया जा रहा है। साथ ही दर्शक दीर्घा में लगी टूटी कुर्सियां भी बदली जा रही हैं, हजारों की संख्या में नई कुर्सी लगाई गई हैं। इसमें दर्शक दीर्घा में 7500 कुर्सियां बदली जा रही हैं, वहीं गोल्डन पास वाली कुर्सियों पर कुशन लगाया जा रहा है।

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हरेली तिहार : माटी पूजन, कृषि औजारों की पूजा और गेड़ी की परंपरा का पर्व

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छत्तीसगढ़ में हरेली त्यौहार का विशेष महत्व है। हरेली छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह त्यौहार परंपरागत रूप से उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन किसान खेती-किसानी में उपयोग आने वाले कृषि यंत्रों की पूजा करते हैं और घरों में माटी पूजन होता है। गांव में बच्चे और युवा गेड़ी का आनंद लेते हैं। इस त्यौहार से छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक पर्वों की महत्ता भी बढ़ गई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में गेड़ी के बिना हरेली तिहार अधूरा है। परंपरा के अनुसार वर्षों से छत्तीसगढ़ के गांव में अक्सर हरेली तिहार के पहले बढ़ई के घर में गेड़ी का ऑर्डर रहता था और बच्चों की जिद पर अभिभावक जैसे-तैसे गेड़ी भी बनाया करते थे। हरेली तिहार के दिन सुबह से तालाब के पनघट में किसान परिवार, बड़े बजुर्ग बच्चे सभी अपने गाय, बैल, बछड़े को नहलाते हैं और खेती-किसानी, औजार, हल (नांगर), कुदाली, फावड़ा, गैंती को साफ कर घर के आंगन में मुरूम बिछाकर पूजा के लिए सजाते हैं। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं।

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कृषि औजारों को धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ के चीला का भोग लगाया जाता है। अपने-अपने घरों में अराध्य देवी-देवताओं के साथ पूजा करते हैं। गांवों के ठाकुरदेव की पूजा की जाती है। हरेली पर्व के दिन पशुधन के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए औषधियुक्त आटे की लोंदी खिलाई जाती है। गांव में यादव समाज के लोग वनांचल जाकर कंदमूल लाकर हरेली के दिन किसानों को पशुओं के लिए वनौषधि उपलब्ध कराते हैं। गांव के सहाड़ादेव अथवा ठाकुरदेव के पास यादव समाज के लोग जंगल से लाई गई जड़ी-बूटी उबाल कर किसानों को देते हैं। इसके बदले किसानों द्वारा चावल, दाल आदि उपहार में देने की परंपरा रही हैं।

सावन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को हरेली पर्व मनाया जाता है। हरेली का आशय हरियाली ही है। वर्षा ऋतु में धरती हरा चादर ओड़ लेती है। वातावरण चारों ओर हरा-भरा नजर आने लगता है। हरेली पर्व आते तक खरीफ फसल आदि की खेती-किसानी का कार्य लगभग हो जाता है। माताएं गुड़ का चीला बनाती हैं। कृषि औजारों को धोकर, धूप-दीप से पूजा के बाद नारियल, गुड़ का चीला भोग लगाया जाता है। गांव के ठाकुर देव की पूजा की जाती है और उनको नारियल अर्पण किया जाता है।

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राजधानी में निकली तिरंगा यात्रा, CM साय ने भरी हुंकार, कहा- आसानी से नहीं मिली आजादी, वीरों ने दिया बलिदान…

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रायपुर। भारतीय जनता पार्टी ने आज राजधानी रायपुर में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली. ‘मोर तिरंगा, मोर अभिमान-हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत आयोजित इस तिरंगा यात्रा में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत प्रदेश के कई मंत्री, विधायक के साथ बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए.

रायपुर के इंडोर स्टेडियम से भव्य तिरंगा यात्रा की कार्यक्रम का आगाज हुआ. देशभक्ति के रंग से सराबोर इस आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समेत तमाम कैबिनेट मंत्री मौजूद रहे, डिप्टी सीएम अरुण साव, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, मंत्री राजेश अग्रवाल, मंत्री ओपी चौधरी, मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, विधायक राजेश मूणत और विधायक सुनील सोनी समेत बीजेपी के अनेक नेता-कार्यकर्ता के साथ स्काउट एंड गाइड्स, NCC कैडेट्स, स्कूली छात्र-छात्राएं समेत समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हुए.

इंडोर स्टेडियम में बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे. इस दौरान मौजूद युवाओं और स्कूली बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला. तिरंगा यात्रा इंडोर स्टेडियम से निकलकर गणेश मंदिर तिराहा, बूढ़ापारा बिजली ऑफिस, नगर निगम भवन, महिला थाना चौक और फायर ब्रिगेड चौक होते हुए सुभाष स्टेडियम पहुंची.

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धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा के बाद पहली बार तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘जेन Z हमारे बच्चे’, गुमराह किए गए

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धर्मेंद्र प्रधान ने NEET पेपर लीक विवाद पर शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. संबलपुर के सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को कहा कि नीट पेपर लीक मामले को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान जेन जी को गुमराह करने की कोशिशें की गईं. लेकिन पद उनके लिए कभी महत्वपूर्ण नहीं रहा. उन्होंने कहा कि खुद पीएम से अपने इस्तीफे की पेशकश की थी.

कॉकरोच पार्टी प्रोटेस्ट के बाद इस्तीफा देने वाले पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि जेन जी हमारे ही बच्चे हैं. कुछ लोगों के द्वारा वे लोग गुमराह हो रहे है.

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे को लेकर हुए भारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के करीब दो हफ्ते बाद पहली बार सार्वजनिक तौर पर अपनी चुप्पी तोड़ी. प्रधान ने शनिवार को भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर बात की.

आपको याद दिल दे कि NEET पेपर लीक विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के बीच उन्होंने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था.

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