छत्तीसगढ़
बिलासपुर : आदिम जाति विकास मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने की विभागीय काम-काज की समीक्षा

बिलासपुर | आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि जिला स्तरीय अत्याचार निवारण समिति की बैठक नियमित रूप से होने चाहिए। हर तीन महीने के अंतराल पर एक बैठक अनिवार्य रूप से आयोजित होने चाहिए। मंत्री टेकाम शुक्रवार को जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में बिलासपुर एवं सरगुजा संभाग के सहायक आयुक्त एवं परियोजना प्रशासकों की संयुक्त बैठक को सम्बोधित कर रहे थे। बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव डी.डी.सिंह एवं आयुक्त शम्मी आबिदी सहित संचालनालय एवं दोनों संभाग के विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
मंत्री टेकाम ने लगभग 5 घण्टे तक चली लम्बी बैठक में जिलेवार संचालित योजनाओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आदिवासियों का सर्वांगीण विकास और उनकी समस्याओं का निदान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बजट एवं अन्य संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता के बावजूद योजनाओं एवं निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 265 एवं 275 के अंतर्गत आदिवासियों के विकास के लिए केन्द्र सरकार द्वारा पर्याप्त अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। इन योजनाओं में जितनी जल्दी काम होगा, उसी गति से और बजट मिलेगा। इसलिए तेज गति से काम किये जाये। उन्होंने अन्य निर्माण कार्याे में भी धीमी प्रगति पर असंतोष प्रकट किये। उन्होंने अधिकारियों को स्वयं होकर निर्माण कार्यों की प्रगति की मॉनीटरिंग कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।
मंत्री टेकाम ने कहा कि आदिवासियों के लिए हॉस्टल, आश्रम एवं स्कूल के लिए विभिन्न एजेन्सियों को बजट उपलब्ध कराने से ही हमारा लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता है। निर्माण एजेन्सियों से समन्वय बनाकर समय पर पूर्ण कराकर वास्तविक हितग्राहियों को लाभ दिलाना हमारा उद्देश्य होने चाहिए। मंत्री टेकाम ने कहा कि आदिवासियों के पोषण स्तर और सेहत में सुधार करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से मिलकर काम करें। यदि जरूरत पड़े तो निजी क्षेत्र की विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं भी ली जानी चाहिए। मंत्री टेकाम ने बैठक में वन अधिकार पत्र के निर्माण एवं वितरण की भी समीक्षा की। इस काम में भी धीमी प्रगति पर असंतोष प्रकट किया। उन्होंने कहा कि जिन-जिन ग्रामों में संभावना हैं, वहां का दौरा कर वनवासियों को आवेदन के लिए प्रोत्साहित करें और उन्हें समझाएं। उन्होंने नगरीय क्षेत्रों में भी वन अधिकार पत्र बांटने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि वनवासियों को अधिकार प्रमाण पत्र के साथ ऋण पुस्तिका भी दिएं ताकि वे विकास कार्यों के लिए बैंक से लोन प्राप्त कर सकें। आदिम जाति मंत्री श्री टेकाम ने कहा कि स्कूल खुलने के पहले आश्रम एवं छात्रावासों की जरूरी मरम्मत के काम पूर्ण कर लिए जाएं ताकि बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने पहाड़ी कोरवा, बैगा, बिरहोर एवं पण्डो विकास प्राधिकरण के कार्यों की भी समीक्षा करते हुए तेज गति से उनको शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए। बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के एडिशनल डॉयरेक्टर आर.एस.भोई एवं गौड़ भी उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
news
छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है
छत्तीसगढ़
तीसरा बड़ा मंगलवार आज : अपनी मनोकामना के अनुसार हनुमान जी को इन चीजों का लगाए भोग …

Dharm Desk- ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है. आज 19 मई को तीसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है. जो पुरुषोत्तम मास के साथ पड़ने से और अधिक खास बन गया है. इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. पूजा-अर्चना का विशेष क्रम जारी है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमानजी के मिलन हुआ था. इसी कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. तीसरे बड़े मंगल के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है.
1.गुड़-चना चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग अर्पित करना अत्यंत प्रिया है. यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष से जुड़े कष्टों को शांत करने के लिए किया जाता है. नियमित रूप से यह भोग चढ़ाने से जीवन में स्थिरता आती है और बाधाओं में कमी देखने को मिलती है. ऐसे में बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को गुड़ चने भोग लगाकर प्रार्थना करना चाहिए.
2.नारियल अर्पित करने से क्या होता है
इस दिन को लेकर मानता है कि साबुत नारियल पर सिंदूर लगाकर और कलावा बांधकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है. इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि और धन संबंधी समस्याओं में सुधार आता हैं.
3.पान का बीड़ा चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करना खास तौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है. जिनके काम अटक रहे होते हैं. पूजा के बाद पान चढ़ाकर कार्य सिद्धि की कामना की जाती है. इससे कठिन और रुके हुए कार्यों में गति आने लगती है और हनुमान जी से प्रार्थना की जाती है कि आप मेरा इस कष्ट या पीड़ा को हारने का बीड़ा आपको मैं सोचता हूं.
4.इमरती और लड्डू चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को इमरती और बूंदी के लड्डू अत्यंत प्रिय है. इनका भोग लगाने से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं. यह प्रसाद चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में खुशहाली का वातावरण बनता है.
5.केसर भात अर्पित करने से क्या होता है
केसर भात का भोग हनुमान जी को अर्पित करने से कुंडली के दोषों को शांत करने का प्रयास किया जाता है. यह भोग विशेष रूप से बड़े मंगल के दिन किया जाता है. इससे जीवन में आने वाले संकटों का प्रभाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है. इससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है.
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