छत्तीसगढ़
Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के गढ़ में बने 9 नए पुलिस कैंपों में शान से फहराए गए तिरंगे, देखें तस्वीरें

Republic Day 2024: गणतंत्र दिवस के मौके पर नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के कई गांवों में इस बार शान से तिरंगा लहराया. स्थानीय ग्रामीणों ने जवानों के साथ नए कैंपों और गांवो में ध्वजारोहण किया.

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मौके पर छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग के कई गांवों में इस बार शान से तिरंगा लहराया. बकायदा स्थानीय ग्रामीणों ने नक्सल मोर्चे पर तैनात सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों के साथ नए कैंपों और गांवो में ध्वजारोहण किया. साथ ही राष्ट्रगान गाया.

दरअसल, नक्सल प्रभावित सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जिले के ऐसे कई गांव हैं, जहां गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस का विरोध करते हुए नक्सली काला झंडा लहराते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से लगातार जवानों की नक्सलियों के गढ़ में पहुंच की वजह से अब यहां न सिर्फ जवान कैंप स्थापित कर रहे हैं, बल्कि वो यहां ग्रामीणों का भरोसा जीतते हुए अब उनके साथ राष्ट्रीय पर्व को भी धूमधाम से मना रहे हैं.

26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन संभाग के ऐसे ही अंदरूनी और सुदूर ग्रामीण अंचलों में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया. इस दौरान जवानों और ग्रामीणों के द्वारा शान से तिरंगा लहराया गया. स्थानीय ग्रामीणों और खासकर बच्चो में इस राष्ट्रीय पर्व को लेकर काफी खुशी देखने को मिली.
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि संभाग के अंतर्गत स्थानीय पुलिस बल और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के द्वारा यहां के सभी नक्सल प्रभावित इलाकों में एंटी नक्सल ऑपरेशन चलाकर अमन, शांति और सुरक्षा लाने का प्रयास किया जा रहा है. पिछले कुछ सालों से बस्तर के नक्सलगढ़ की तस्वीर बदल रही है. इन गांवों तक विकास कार्य पहुंच रहा है.
आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि नक्सलियों की दहशत की वजह से ग्रामीण इन इलाकों में कभी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस नहीं मना पाए. ना ही इन इलाकों में कभी ग्रामीण तिरंगा फहरा पाए, लेकिन अब इन क्षेत्रों में तैनात जवानों के सतत प्रयास से लगातार नक्सलियों के मांद में पैठ जमाने के साथ-साथ यहां नए पुलिस कैंप भी स्थापित किए जा रहे हैं. यहां के स्थानीय ग्रामीणों का भी भरोसा जीता जा रहा है.

आईजी ने बताया कि गणतंत्र दिवस के मौके पर पिछले छह महीनों में नक्सल प्रभावित जिले में कुल नौ नए पुलिस कैंप स्थापित किए गए हैं. इसमें बीजापुर जिले के अंतर्गत पालनार, डुमरीपालनार चिंतावागु, कावड़गांव और सुकमा जिले के अंतर्गत मुलेर, परिया, सलातोंग, मुकराजकोंडा, दुलेड और अन्य क्षेत्रों में क्षेत्र के विकास और नक्सलियों के आतंक को खत्म करने के लिए नए पुलिस कैंप खोले गए हैं.
आईजी ने बताया कि इन सभी कैम्पों और गांवो में बिना किसी भय के गणतंत्र दिवस पूरे शान से मनाते हुए जवानों और स्थानीय ग्रामीणों ने तिरंगा फहराया. बस्तर आईजी सुंदर राज ने बताया कि इन सभी नए स्थापित कैंपों में तैनात पुलिस के जवानों और पैरामीलट्री फोर्स के जवानों ने सभी ग्रामीणों की उपस्थिति में ध्वजारोहण करते हुए उन्हें गणतंत्र दिवस का महत्व और गौरव गाथा बताई.
आईजी ने बताया कि यहां मौजूद सभी लोगों को मिठाई भी बांटा गई. बस्तर में नक्सलियों का आंतक खत्म करते हुए शांति व्यवस्था स्थापित करने के लिए छत्तीसगढ़ की डीआरजी फोर्स, बस्तर फाइटर्स, एसटीएफ, सीएएफ, सीआरपीएफ, कोबरा, एसएसबी, आईटीबीपी और बीएसएफ के जवानों के साथ ही महिला कमांडो भी एंटी नक्सल ऑपरेशन में अपनी पूरी ताकत लगा रही हैं. साथ ही नक्सलियों को उनके मांद से खदेड़ने में कामयाबी भी हासिल कर रही हैं.
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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है





















