छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सामुदायिक वन संसाधन अधिकार जागरूकता अभियान का किया शुभारंभ
रायपुर| छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वनवासियों को जागरूक करने प्रदेश में 15 अगस्त से 26 जनवरी तक सामुदायिक वन संसाधन अधिकार जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का एक कैलेंडर तैयार किया गया है, जिसका विमोचन विश्व आदिवासी दिवस पर 9 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के क्रियान्वयन की राज्य स्तर पर मार्गदर्शिका तैयार की गई है और मैदानी कर्मचारियों के लिए कार्यशालाएं आयोजित की गई, परंतु ग्राम सभाओं में अभी भी सूचनाएं और प्रक्रियाएं पहुंच नहीं पा रही थी। अब पुनः मुख्यमंत्री ने समीक्षा की और ग्राम सभाओं को जागरूक करने के लिए एक विशेष अभियान की आवश्यकता महसूस की। इसे ध्यान में रखते हुए फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी संस्था ने आदिवासी विकास विभाग और वन विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम सभाओं को प्रक्रियाओं की जानकारी देने सामुदायिक वन संसाधन अधिकार जागरूकता अभियान का एक कैलेंडर तैयार किया। इसका शुभारंभ 9 अगस्त को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। यह अभियान 15 अगस्त 2022 से 26 जनवरी 2023 तक चलाया जाएगा।

स्वतंत्रता दिवस के 75वें वर्ष के समारोह में सभी ग्राम पंचायतों में वन अधिकार कानून के बारे में वाचन करते हुए अभियान की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद जनवरी 2023 तक सभी वन आधारित गांवों में ग्राम सभाओं में सामुदायिक वन संसाधन पर चर्चा प्रस्ताव करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें अगस्त में दावों के शुभारंभ के लिए ग्राम सभा, सितंबर में लोकवाणी के माध्यम से मुख्यमंत्री से बातचीत, अक्टूबर की ग्राम सभा में प्रस्ताव, नवंबर में राज्य स्थापना दिवस पर कार्यक्रम, दिसंबर में हाट बाजार, जनवरी में ग्राम सभा में विचार आदि के संबंध में जागरूकता अभियान संचालित रहेगा. यह अभियान एक साझा अभियान है, जिसमें सभी स्वयंसेवी संस्थाएं जुड़ेंगी, जिन्होंने लंबे समय तक इस कार्य को गति दी है और वर्तमान में संचालित कर रहे हैं। विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त को आदिवासी विकास विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में इस अभियान के शुभारंभ में अभियान गीत के साथ जागरूकता पोस्टर्स एवं धमतरी के नगरी विकासखंड के चारगांव के ग्राम सभा के प्रयासों पर एक फिल्म का प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अभियान को राज्य भर में संचालित करने के लिए आदिवासी विकास विभाग और वन विभाग को निर्देशित किया। स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानते हुए मुख्यमंत्री ने अभियान को सफल बनाने के लिए उनका आव्हान किया। छत्तीसगढ़ अकेला राज्य है, जहां इस तरह के सामुदायिक संसाधनों के अधिकार का लक्ष्य बनाया गया है और उसके लिए ग्राम सभाओं को सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके माध्यम से समुदाय की परंपरागत सांस्कृतिक धरोहर के साथ आजीविका के माध्यम ये वन संसाधन उनकी जिम्मेदारी सहित अधिकार में आएंगे।
फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी संस्था के कार्यकारी निदेशक संजय जोशी के अनुसार संस्था देशभर में सामुदायिक प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन एवं संरक्षण के माध्यम से समुदाय की आजीविका को बेहतर करने पर कार्य करती है। इसी के माध्यम से पर्यावरण के भी स्वास्थ्य को बेहतर रखने का प्रयास किया जाता है। इसी क्रम में संस्था छत्तीसगढ़ शासन के साथ भी सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन को मैदानी स्तर पर मजबूत करने में प्रयासरत है।
वर्तमान में राज्य के कुल 3801 ग्रामों के सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के दावे स्वीकृत हो चुके हैं। इनमें 15,32,316.866 हेक्टेयर का दावा शामिल है। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार में एक पारंपरिक गांव के सीमा के भीतर के वन और राजस्व के छोटे बड़े झाड के जंगल का अधिकार ग्राम सभा को मिलता है, जिसमें उन्हें इन वन क्षेत्रों की सुरक्षा, सरंक्षण, पुनरुत्पादन, प्रबंधन की भी जिम्मेदारी निभानी होती है। दावा प्रस्तुत करने के लिए ग्राम सभाएं वन अधिकार समिति का गठन करती है और दावा मिल जाने पर प्रबंधन के लिए वन प्रबंधन समिति का गठन कर सकती है।
दावों के लिए गांव के बुजुर्ग, महिलाएं, सभी निवासरत जनजाति के प्रतिनिधि सहित पटवारी, वन रक्षक, पंचायत सचिव इत्यादि परम्परागत सीमा की पहचान करते हैं और पड़ोसी गांव के साथ जानकारी साझा करते हैं। साथ ही नजरी नक्शा, गांव का निस्तार पत्रक, बुजुर्गों का कथन और पड़ोसी सीमा के लगे गांव के अनापत्ति पत्र लगाए जाते हैं। इसके बाद उपखंड स्तरीय समिति द्वारा सत्यापन करवाया जाता है। सब सही पाए जाने पर जिला स्तरीय समिति को भेजा जाता है। वहां सही पाए जाने पर अधिकार पत्र मिलता है।
छत्तीसगढ़
‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ : सीएम साय ने कहा – गौ संरक्षण जनभागीदारी से ही बनेगा जनआंदोलन

गौमाता भारतीय संस्कृति, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक कृषि और पर्यावरण संरक्षण की आधारशिला है। गौ संरक्षण पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है। जब प्रत्येक परिवार गौसेवा और संरक्षण का संकल्प लेगा, तभी यह अभियान जनआंदोलन का स्वरूप ले सकेगा। ये बातें मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषक सभागार में आयोजित गौ सेवा संगम एवं गौ विज्ञान परीक्षा पुरस्कार वितरण समारोह को संबोधित करते हुए कही।
इस अवसर पर सीएम ने प्रदेशव्यापी ‘मेरा परिवार गौव्रति परिवार’ अभियान का शुभारंभ किया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए संचालित किए जाने वाले वृक्षारोपण अभियान के पोस्टर का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने गौ विज्ञान परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित कर पुरस्कार भी प्रदान किए।
छत्तीसगढ़
“सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सुनेगी…”, सर्वदलीय बैठक खत्म होते ही किरण रिजिजू का पहला बयान, कल पेश होगा वंदे मातरम् बिल

संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक ख़त्म हो गई है। इस बैठक के ख़त्म होते ही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, अच्छे माहौल में यह बैठक हुई। सभी ने इस बैठक में अपनी बात रखी। संसदीय कार्य मंत्री ने बैठक के बाद मिडिया को दिए अपने पहले बयान में कहा कि, सरकार विपक्ष के सभी मुद्दों को सत्र के दौरान सुनेगी। इसके अलावा बागी सांसदों को बैठक में बुलाये जाने को लेकर उन्होंने कहा कि, नियमों के मुताबिक़ ही उन्हें बुलाया गया है।
बता दें कि, रविवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद में व्यवधान पैदा करने से किसी को राजनीतिक लाभ नहीं मिलता, बल्कि इससे जनता के पैसे और समय की बर्बादी होती है।
छत्तीसगढ़
सीएम साय ने अधिकारियों को किया अलर्ट, बारिश से प्रभावित इलाकों में राहत कार्य तेज करने के निर्देश…

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जिलों में हुई अत्यधिक वर्षा एवं जलभराव की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन पूरी सतर्कता और तत्परता के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक प्रभावित एवं जरूरतमंद व्यक्ति तक समय पर राहत और आवश्यक सहायता सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, भोजन, पेयजल, चिकित्सा सहित सभी आवश्यक सुविधाएँ बिना किसी विलंब के उपलब्ध कराई जाएँ। साथ ही जलनिकासी की त्वरित व्यवस्था, क्षतिग्रस्त मार्गों की शीघ्र बहाली तथा जनसुविधाओं को जल्द सामान्य करने के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
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