छत्तीसगढ़
न लंबी लाइन की चिंता न टेस्ट के लिए इंतजार, मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना से हो रहा मुफ्त इलाज

जगदलपुर| बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधा का सभी को अधिकार है। लेकिन रोजी-मजदूरी करने वाले श्रमिकों को काम से समय नहीं मिल पाने की वजह से वे स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाते थे। छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के द्वारा अस्पताल और गरीब तबके के लोगों के बीच की इसी खाई को पाटने के लिए मुख्यमंत्री स्लम स्वास्थ्य योजना की शुरूआत की गई। जिसके तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट से शहरी क्षेत्र के स्लम या झुग्गी बस्तियों में रहने वाले श्रमिकों और गरीब लोगों को निरूशुल्क इलाज मुहैया कराई जा रही है।
इस योजना से रोजाना सुबह 8 से 3 बजे तक स्लम क्षेत्रों में मोबाइल मोडिकल यूनिट के द्वारा कैंप लगाया जाता है। जहां पर निरूशुल्क स्वास्थ्य परामर्श, इलाज और सभी तरह के प्राथमिक स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं दी जाती है। इन मोबाइल मेडिकल यूनिट में लोगों की सुविधा के लिए एक डॉक्टर, लैब टैक्निशियन और नर्स की सुविधा होती है। यह सरकार की दूरदर्शिता ही परिणाम है कि आज गरीब वर्ग का हर व्यक्ति इस सुविधा का लाभ ले पा रहा है।
सरकार की मंशा है कि स्वास्थ्य की सुविधाएं हर व्यक्ति की पहुंच तक हो और इन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए नगरीय क्षेत्र के झुग्गी बस्तियों में स्वास्थ्य सुविधा का लाभ रहवासी ले रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण इलाज पहुंचाने के लिए नगर पालिक निगम जगदलपुर में कुल 4 पंजीकृत मोबाइल मेडिकल यूनिट चल रहे हैं जहां सितंबर 2022 की स्थिति में अब तक कुल 2 हजार 135 शिविर लगाए जा चुके हैं, जिसके अंतर्गत कुल 1 लाख 24 हजार 194 मरीजों का इलाज हो चुका है। दवा वितरण की बात करें तो कुल 1 लाख 2 हजार 925 दवाएं वितरित की जा चुकी है। 24 हजार 333 मरीजों को टेस्ट का लाभ भी मिला है और ये आंकड़े निरंतर तेजी से बढ़ रहे हैं।
इसके अलावा नगर पंचायत बस्तर में 2 मोबाइल मेडिकल यूनिट चलाई जा रही है। आंकड़े बताते हैं कि सितंबर 2022 तक नगर पंचायत बस्तर में कुल 31 शिविर लगाए जा चुके हैं जिसमें कुल 1 हजार 524 मरीजों का इलाज, 1 हजार 392 दवाईयों का वितरण और 189 लैब टेस्ट का लाभ यहां के स्थानीय निवासियों को मिला है।
इन मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के माध्यम से आज हर गरीब तबके की पहुंच स्वास्थ्य सुविधाओं तक है, स्लम क्षेत्र में रहने वाली महिलाएं इसका सटिक उदाहरण हैं। महिलाओं को ए.एन.सी., पी.एन.सी. जांच की सुविधा निरूशुल्क मिल रही है। वहीं परिक्षण के दौरान गंभीर बीमारियों का पता चलने पर मरीज को उचित परामर्श के साथ उच्च स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर भी किया जाता है। साथ ही इन मोबाइल मेडिकल यूनिट में बेहतर साफ-सफाई, पीने योग्य पानी, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा की भी सुविधाएं हैं। मोबाइल मेडिकल युनिट में श्रम विभाग के द्वारा श्रमिकों का पंजीयन भी किया जाता है।
मिशन स्कूल पारा, जगदलपुर की रहने वाली बिंदा नाग सरकार को धन्यवाद देते हुए कहती हैं, कि सरकार की गाड़ी आती है, हमें निरू शुल्क दवाई और इलाज मिलता है। यहां पर शुगर, डेंगु और मलेरिया की जांच का फायदा मिल रहा है। छोटी-छोटी परेशानियों का भी इलाज डॉक्टर लोग कर देते हैं। हम अच्छे हैं, स्वस्थ्य हैं इसके लिए मैं सरकार का धन्यवाद करना चाहती हूं कि उन्होंने हमें यह सुविधा दी है।
पनारापारा निवासी अजय पाल सिंह बताते हैं कि पहले समय निकालकर अस्पताल जाना पड़ता था। फिर लंबी लाइन और इंतजार। अब तो ये मेडिकल यूनिट आती है यहां पर घर के पास, मैं अपना बीपी, शुगर टेस्ट करवाता हूं। कोई परेशानी होने पर दवाई भी लेता हूं। अच्छा है हमारा समय बच रहा है और इलाज भी घर के समीप मिल रहा है।
news
CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
news
छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है


















