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Explainer: मालदीव समेत 5 देशों के क्यों पानी में डूबने का खतरा क्या है इसकी वजह

मालदीव देश भारत से संबंध खराब करने की वजह से चर्चा में है। लक्षद्वीप में पीएम मोदी की यात्रा के बाद से ही यह छोटा देश सुर्खियों में है।
इसकी वजह भारत के प्रधानमंत्री पर मालदीव के नेताओं की अपमानजनक टिप्पणी है। मालदीव देश कई छोटे-छोटे द्वीपों को मिलाकर बना है। दुनियाभर में ग्लोबर वार्मिंग का खतरा बढ़ रहा है। इसकी वजह से ग्लेशियर पिछल रहे हैं और समुद्र का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। इस वजह से समुद्र के किनारे बसे शहरों और द्वीपों को ज्यादा खतरा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों ने इस वजह से मालदीव के अस्तित्व को लेकर चिंता जताई है। यह चिंता यह है कि आने वाले समय में मालदीव समुद्र में डूब सकता है। विश्व बैंक का अनुमान है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने की वजह से इस सदी के अंत तक मालदीव समुद्र में डूब सकता है। विशेषज्ञों ने जिन 5 द्वीपों के ग्लोबल वार्मिंग की वजह से डूबने का खतरा जताया है उसमें मालदीव भी एक है।
मालदीव करीब 1200 द्वीपों का समूह है। इसमें से सिर्फ 200 द्वीपों पर ही लोग रहते हैं। समुद्र का जलस्तर थोड़ा भी बढ़ने से इनके डूबने का खतरा है। विश्व बैंक ने अनुमान जताया है कि 21वीं सदी के अंत तक समुद्र का जलस्तर 10 से 100 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। इस वजह से मालदीव पूरी तरह से डूब जाएगा।
मालदीव के लिए तबाही की वजह
वर्ल्ड बैंक ने यह भी कहा है कि 2050 तक मालदीव की कम से कम 80 प्रतिशत जमीन ग्लोबन वार्मिंग की वजह से रहने लायक नहीं रहेगी। 1998 में मालदीव के अधिकारियों का मानना था कि अगले 30 साल में समुद्र के जलस्तर में 20-30 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी और यह मालदीव के लिए तबाही की वजह बन सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ने से बहुत नुकसान हो सकता है। 40 के दशक में एक स्टडी में पाया गया कि समुद्र का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं फिजी और पलाउ के भी इस वजह से डूबने का खतरा है।
कैसे चलती है मालदीव की इकोनॉमी
बता दें कि मालदीव की अर्थव्यस्था बहुत हद तक पर्यटन पर निर्भर है क्योंकि इसी से वहां ज्यादा पैसा आता है। इसके अलावा मछलीपान का भी वहां की अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदान है। इस दो सेक्टर में वहां के 70 प्रतिशत लोगों को रोजगार मिलता है। मछलीपान और मछली पकड़ने के ज्यादातर केंद्र समुद्र के किनारे ही बनाए गए हैं। अगर जलस्तर बढ़ता है तो ये पूरी तरह डूब जाएंगे। इस वजह से मालदीव का बहुत नुकसान होगा। मछली पकड़ने का उद्योग तबाह होने से वहां की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा क्योंकि मालदीव द्वारा किए जाने वाले कुल निर्यात में 90 प्रतिशत मछली का है।
पर्यटकों को लेकर चिंतित है मालदीव
बता दें कि भारत से रिश्ते खराब होने के बाद मालदीव चीन से अपने यहां पर्यटक भेजने की गुहार लगा रहा है। मालदीव को डर है कि अब उसके यहां भारत से पर्यटक नहीं आएंगे। 2020 से पहले चीन से सबसे ज्यादा पर्यटक मालदीव जाते थे लेकिन कोरोना महामारी के बाद भारत ने उसकी जगह ले ली और चीन से मालदीव जाने वाले पर्यटकों में करीब एक लाख की गिरावट आई। भारत के बाद इस समय रूस से सबसे ज्यादा पर्यटक मालदीव जाते हैं। इस समय हर साल 2 लाख 10 हजार भारतीय पर्यटक मालदीव जा रहे हैं।
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।





















