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आयुर्वेदिक कॉलेज कोविड सेंटर से डिस्चार्ज हुए पहले दो मरीज, स्टाफ ने गुलदस्ता देकर विदा किया

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बिलासपुर। शासकीय आयुर्वेदिक कॉलेज चिकित्सालय के कोविड केयर सेंटर में भर्ती किये गये पहले दो मरीज स्वस्थ होकर आज डिस्चार्ज हुए। इनमें एक 52 वर्ष की महिला व 47 वर्ष का पुरुष शामिल है।यह कोविड सेंटर 30 अप्रैल को प्रारंभ किया गया था, जिसमें पहला मरीज 4 मई को भर्ती किया गया। चकरभाठा की निवासी देवकी निर्मलकर व मस्तूरी विकासखंड के ग्राम चैहा निवासी रामेश्वर धीरही 5 मई को बुखार, खांसी और सर्दी की शिकायत के बाद यहां भर्ती किये गये थे। दोनों की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव थी।

देवकी ने तबियत खराब होने पर 30 अप्रैल को अपना कोविड टेस्ट चकरभाठा में कराया था, जिसमें उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद वे डॉक्टर के बताये अनुसार दवायें लेकर होम आइसोलेशन पर रहीं। सांस लेने में दिक्कत होने पर उसे इस कोविड सेंटर में भर्ती कराया गया। जांच में उनका ऑक्सीजन लेवल 91 पाया गया। उसे ऑक्सीजन सपोर्टेड बेड में रखा गया। तीन दिन से उसका एसपी ओ-2 94 पर स्थिर रहा, जो सामान्य था। इसलिये आज छठवें दिन उसे हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

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इसी तरह रामेश्वर धीरही को भी सांस लेने में दिक्कत तथा बुखार के बाद 5 मई को ही भर्ती किया गया था। उसका भी ऑक्सीजन लेवल विगत 3 दिन से 94 पर स्थिर है। तबियत में लगातार सुधार होने के बाद उसे भी आज डिस्चार्ज कर दिया गया।
दोनों मरीजों ने बताया कि अस्पताल में उनकी अच्छी देखभाल की गई। नियमित समय पर नर्स और स्टाफ उनकी सेहत की जानकारी लेते रहे। उन्हें दवाओं के अलावा पौष्टिक नाश्ता, भोजन के अलावा दोनों समय आयुष काढ़ा का सेवन कराया गया। बेहतर देखभाल के चलते उन्हें जल्दी रिकवर होने में मदद मिली और 5 दिन में ही उन्होंने कोरोना को मात दे दी। दोनों मरीजों को सात दिन होम आइसोलेशन में रहने की समझाइश दी गई है। अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें गुलदस्ता देकर विदा किया।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रक्षपाल गुप्ता ने बताया कि यह कोविड केयर सेंटर विगत 30 तारीख से प्रारंभ है। यहां 15 ऑक्सीजन तथा 10 सामान्य बेड हैं। अस्पताल में पाइपलाइन बिछाने का कार्य चल रहा है, जिससे शीघ्र ही ऑक्सीजन बेड और बढ़ जायेंगे।

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तीसरा बड़ा मंगलवार आज : अपनी मनोकामना के अनुसार हनुमान जी को इन चीजों का लगाए भोग …

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Dharm Desk- ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है. आज 19 मई को तीसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है. जो पुरुषोत्तम मास के साथ पड़ने से और अधिक खास बन गया है. इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. पूजा-अर्चना का विशेष क्रम जारी है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमानजी के मिलन हुआ था. इसी कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. तीसरे बड़े मंगल के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है.

 

1.गुड़-चना चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग अर्पित करना अत्यंत प्रिया है. यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष से जुड़े कष्टों को शांत करने के लिए किया जाता है. नियमित रूप से यह भोग चढ़ाने से जीवन में स्थिरता आती है और बाधाओं में कमी देखने को मिलती है. ऐसे में बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को गुड़ चने भोग लगाकर प्रार्थना करना चाहिए.

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2.नारियल अर्पित करने से क्या होता है

 

इस दिन को लेकर मानता है कि साबुत नारियल पर सिंदूर लगाकर और कलावा बांधकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है. इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि और धन संबंधी समस्याओं में सुधार आता हैं.

 

3.पान का बीड़ा चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करना खास तौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है. जिनके काम अटक रहे होते हैं. पूजा के बाद पान चढ़ाकर कार्य सिद्धि की कामना की जाती है. इससे कठिन और रुके हुए कार्यों में गति आने लगती है और हनुमान जी से प्रार्थना की जाती है कि आप मेरा इस कष्ट या पीड़ा को हारने का बीड़ा आपको मैं सोचता हूं.

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4.इमरती और लड्डू चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को इमरती और बूंदी के लड्डू अत्यंत प्रिय है. इनका भोग लगाने से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं. यह प्रसाद चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में खुशहाली का वातावरण बनता है.

 

5.केसर भात अर्पित करने से क्या होता है

 

केसर भात का भोग हनुमान जी को अर्पित करने से कुंडली के दोषों को शांत करने का प्रयास किया जाता है. यह भोग विशेष रूप से बड़े मंगल के दिन किया जाता है. इससे जीवन में आने वाले संकटों का प्रभाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है. इससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है.

 

 

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छत्तीसगढ़

एडमिशन फेयर 2026 : रायपुर में 20 और 21 मई को लगेगा देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों का मेला, फ्री एंट्री के लिए ऐसे करें रजिस्ट्रेशन

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रायपुर. क्या आप भी अपने उच्च शिक्षा की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके लिए गुड न्यूज है. राजधानी रायपुर में अफेयर्स लेकर आ गया है “एडमिशन फेयर 2026“. इस दो दिवसीय कार्यक्रम में प्रमुख्य विश्वविधायालयों का मेला लगेगा, जहां एक ही छत के नीचे उच्च शिक्षा से जुड़े हर सवालों के जवाब और बेहतर करियर पाथ चुनने का मौका मिलेगा. एडमिशन फेयर 2026 खास तौर पर कक्षा 12वीं के छात्रों, माता-पिता और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए आयोजित किया जा रहा है. यह कार्यक्रम 20 मई और 21 मई को  ‘बेबीलॉन कैपिटल’ में सुबह 11 बजे से लेकर शाम 7 बजे तक चलेगा.

यह एडमिशन फेयर भारत के वर्तमान शिक्षा परिदृश्य को देखते हुए बेहद प्रासंगिक है. इस फेयर में देशभर के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के संस्थानों के साथ-साथ एडमिशन डायरेक्टर से सीधे संवाद कर छात्र अपने सभी सवालों के जवाब प्राप्त कर सकते हैं. यहां कक्षा 12वीं या उससे आगे के पाठ्यक्रम विकल्प, फीस, प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता, स्कॉलरशिप विकल्प समेत कई महत्वपूर्ण जानकारियां सटीक, विश्वसनीय और नवीनतम रूप में उपलब्ध कराई जाएंगी. खास बात यह है कि यह सारी जानकारी छात्रों को एक ही छत के नीचे और कुछ ही घंटों में मिल जाएगी.

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अफेयर्स एग्जीबिशन एंड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर और सीईओ विवेक शुक्ला ने कहा कि हम एक बार फिर रायपुर में ‘एडमिशन फेयर’ आयोजित करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं. हमारा उद्देश्य छात्रों को भारतीय उच्च शिक्षा में हो रहे बदलावों से अपडेट रखना और उन्हें अपने भविष्य को लेकर इन्फोर्मड डिसीजन लेने के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है. उन्होंने कहा कि यह एडमिशन फेयर छात्रों के लिए ज्ञानवर्धक मंच साबित होगा और एक बेहतर करियर की शुरुआत का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा.

इस एडमिशन फेयर में भारत के प्रमुख विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को showcase किया जाएगा, जिसमें Manipal Academy of Higher Education (MAHE), Amity University Raipur, Symbiosis Skills University – Indore & Pune, VIT – Mauritius, Bharati Vidyapeeth (Deemed to be University) – Pune, SRM University – Chennai, Ramapuram & Tiruchirappalli Campus, Symbiosis Institute of Technology – Nagpur, O.P. Jindal University –  Raigarh, Chhattisgarh, IMS Unison University – Dehradun, Parul University – Vadodara & Goa, NITTE University – Mangalore, Nitte, Bangalore, Bennett University – Greater Noida, Mahindra University – Hyderabad, Apollo Knowledge Institutions, Alliance University – Bengaluru, MIT World Peace University – Pune, Goa, MIT Vishwaprayag University – Solapur, Maharashtra, Noida Institute of Engineering and Technology (NIET) – Greater Noida, DIT University – Dehradun, GMRIT Deemed to be University – Rajam, Andhra Pradesh, Aditya University – Kakinada, Andhra Pradesh, ICFAI University, MATS University – Raipur, The Institute of Company Secretaries of India (ICSI), ArizeNxt Overseas – Durg, Chhattisgarh जैसे और भी बहुत से कॉलेज शामिल है.

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फेयर के आयोजक रितेश जयसवाल ने कहा कि अफेयर्स एग्जीबिशंस एंड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित यह एडमिशनस फेयर, पिछले दो दशकों से अधिक समय से भारत के सबसे अग्रणी और पुराने हायर एजुकेशन फेयर में से एक है. भारत के हजारों प्रमुख संस्थानों के भरोसेमंद, इस एडमिशन फेयर का मकसद देशभर के 12 से अधिक शहरों के छात्रों को प्रमुख विश्वविद्यालयों से जोड़ना है, जिनमें से कई NAAC से मान्यता प्राप्त और NIRF QS रैंक वाले हैं.

यह कार्यक्रम पूरी तरह नि:शुल्क है और इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण https://admissionsfair.in/raipur/ पर शुरू हो चुका है. छात्रों को कार्यक्रम में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए पंजीकरण कराने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है.

 

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केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

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बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.

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इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.

जा सकती थी नवजात शिशु की जान

डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,

सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.

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परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद

शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.

पहली बार आया अनोखा केस

सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.

 

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