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छत्तीसगढ़

बारनवापारा अभ्यारण्य में सफारी के दौरान पर्यटकों को दिख रहें वन्यप्राणी, सैकड़ों की संख्या में बार का नजारा देखने पहुँच रहें सैलानी

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(चंदन जायसवाल – सवांददाता, कसडोल )
कसडोल। बलौदाबाजार वन-मंडल के अंतर्गत वाइल्डलाइफ सेंचुरी बारनवापारा अभ्यारण्य (Bar Navapara Wildlife Sanctuary) किसी परिचय का मोहताज नहीं रहा।इसकी लोकप्रियता भी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।पर्यटकों की सुविधा के मद्देनजर भी यहाँ काम-काज होते रहा है।वैसे भी यह अभ्यारण अपने में प्राकृतिक छटा को संजोए हुए अनेक जीव-जंतुओं से भरा-पूरा जंगल है।

रेंजर एवं अधीक्षक कार्यालय बारनवापारा अभ्यारण्य
रेंजर एवं अधीक्षक कार्यालय बारनवापारा अभ्यारण्य
वन-भ्रमण करने से अपने अनेक विविधताओं से परिचित कराते हुये मनोरम दृश्य अपने आप को अलग अनुभव का अहसास दिलाता है।और मन को मंत्र मुग्ध करते हुये अपने आप को विशिष्ट भी बनाता है।नियम-कायदे भी यहाँ महत्व रखते हैं।लिहाजा 1 नवंबर से 15 जून या 30 जून तक पर्यटकों के लिए खुलने वाले इस अभ्यारण्य में वन-भ्रमण करते समय स्वतंत्र रूप से विचरण करते अनेक जंगली जानवरों को देख पर्यटक प्रसन्नचित्त होते हैं। 244.66 वर्ग किलोमीटर की क्षेत्रफल में फैला बारनवापारा अभ्यारण्य दो विभक्त बार और कोठारी परिक्षेत्रों में यहाँ चारों ओर हरियाली एवं प्रदूषण मुक्त व सालभर तापमान बहुत सुखद होने के कारण सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

बारनवापारा अभ्यारण्य में सफारी के दौरान पर्यटकों को दिख रहें वन्यप्राणी
बारनवापारा अभ्यारण्य में सफारी के दौरान पर्यटकों को दिख रहें वन्यप्राणी
हालिया जानकारी है कि इस सेंचुरी में भ्रमण के दौरान तेंदुए का दीदार भी कई सैलानियों को हुआ है।पर्यटकों का भी इससे उत्साहित व आकर्षित होना स्वाभाविक ही है।इसके अलावा इस बीच गौर,भालू,बायसन,चीतल,मोर,सांभर,कोठरी,जंगली सुअर व अन्य जीव दिख रहे हैं।रेंजर सुनील खोब्रागड़े ने बताया कि नवम्बर 2023 से 24 जनवरी 2024 तक कुल 7035 पर्यटक आ चुके हैं।अभी माह फरवरी से जून 2024 तक और भी पर्यटक आयेंगे।पर्यटक बारनवापारा अभ्यारण्य में वनभ्रमण/सफारी हेतु पिछले 4 वर्षों की तुलना में इस वर्ष 03 माह के अवधि में लगभग 60% पर्यटक बारनवापारा आ चुके हैं।

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सैकड़ों की संख्या में बार का नजारा देखने पहुँच रहें सैलानी
सैकड़ों की संख्या में बार का नजारा देखने पहुँच रहें सैलानी
प्रतिवर्ष पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो रही है।पर्यटकों की सुविधा का पुरा-पुरा ध्यान रखते हुए वनभ्रमण/सफारी हेतु 25 जिप्सी 6 सीटर एवं 02 जेनॉन 12 सीटर सफारी हेतु वाहन उपलब्ध कराये गये हैं।पर्यटक ग्राम बारनवापरा में पर्यटकों के रूकने हेतु व्यवस्था की गई है। जिसमे 34 कमरे पर्यटक ग्राम बारनवापारा में उपलब्ध है साथ ही साथ उत्तम भोजन व्यवस्था हेतु रेस्टोरेंट का भी संलाचन किया जा रहा है।आमोद-प्रमोद के लिए पर्यटन ग्राम में झूला,ओपन थिएटर,इंटरप्रिटेशन सेंटर मौजूद है।

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पर्यटक ग्राम, प्रकृति के बीच घर
पर्यटक ग्राम, प्रकृति के बीच घर
वही इस अभ्यारण्य में घूमने आने वाले पर्यटकों को जंगल भ्रमण कराने वाले प्रशिक्षित गाईड और जिप्सी ड्राइवर से जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि 27 जनवरी शनिवार को 3 तेंदुआ अलग-अलग रूटों में जंगल सफारी करते समय दिखा है।आगे बताया कि इस सीजन में 1 नवंबर से अब तक कई बार अच्छा खासा तेंदुआ के साथ-साथ बायसन,भालू,चीतल,सांभर,लकड़बग्घा सहित कई अनेक मौजूद जानवर दिखते रहे हैं।खुला जंगल है 30 किलोमीटर का राउंड रहता है।घूमते-घूमते कहीं न कहीं कोई भी जंगली जानवर दिख सकता है और दिखता ही है।

सैलानियों को भ्रमण के दौरान दिखा तेंदुआ
सैलानियों को भ्रमण के दौरान दिखा तेंदुआ
बस वन भ्रमण करते समय सैलानियों को ओपन जंगल और जू-घर के बीच अन्तर को समझना होगा।वन भ्रमण करते समय धैर्य और शांति बनाये रखना जरूरी होता है।तभी आप जंगल-भ्रमण का आनंद पा सकते है।यह पर्यटक स्थल स्वच्छ और सुंदर होने के कारण सबको अपनी और आकर्षित करता है।वहीं यहाँ कई नियमित पर्यटक भी आते हैं।विदेशी भी यहाँ पर्यटन पर आते है

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CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।

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इस वजह से हुई मानसून में देरी

सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:

  • सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।

  • न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।

इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश

बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

  • जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।

  • मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।

  • केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।

  • वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।

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मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।

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छत्तीसगढ़

कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।

पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं

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सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है

नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है

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