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एक अफसर, एक कारः सरकारी वाहनों के दुरुपयोग रोकने मोदी सरकार का बड़ा फैसला

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One Officer, One Official Car: सरकारी वाहनों के दुरुपयोग रोकने के लिए मोदी सरकार (Modi government) ने बड़ा फैसला लिया है। वाहनों का दुरुपयोग रोकने और खर्च कम करने के लिए सरकार ने ‘एक अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी’ नीति लागू की है। नीति के तहत किसी अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं दी जाएगी।

वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) की ओर से जारी नए कार्यालय ज्ञापन (Office Memorandum) के तहत अब किसी अधिकारी को पहले से सरकारी गाड़ी मिली हुई है तो अतिरिक्त जिम्मेदारी मिलने पर दूसरी सरकारी गाड़ी नहीं दी जाएगी।

जारी आदेश में कहा गया है कि अगर कोई अधिकारी किसी अन्य मंत्रालय, विभाग, सार्वजनिक उपक्रम (PSU) या ऑटोनॉमस बॉडी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहा है, तब भी उसे दूसरी सरकारी कार नहीं दी जाएगी। सरकार ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को इस नई व्यवस्था का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा गया है कि जिन सरकारी वाहनों का उपयोग नहीं हो रहा है, उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखा जाए और उनका बेवजह इस्तेमाल न होने दिया जाए। यह आदेश सितंबर 2022 में जारी दिशा-निर्देशों को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने के उद्देश्य से जारी किया गया है। नया कार्यालय ज्ञापन सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को भेज दिया गया है।

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EPF पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला: पीएफ पर बेसिक सैलरी लिमिट ₹15000 से बढ़ाकर 25 हजार की, 51 लाख कर्मचारियों को होगा फायदा

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Modi Government Big Decision on EPF: कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ (EPF) को पर मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मोदी सरकार ने PF के लिए बेसिक सेलरी लिमिट ₹15000 से बढ़ाकर ₹25 हजार कर दी है। अब कंपनियों को 25 हजार रुपए तक की बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों को PF के दायरे में शामिल करना ही होगा। मोदी कैबिनेट की बैठक में पीएफ पर बेसिक सैलरी लिमिट बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इससे 51 लाख कर्मचारियों को PF बचत और पेंशन का सीधा फायदा मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि पहले 15 हजार रुपए से ज्यादा बेसिक सेलरी वाले कर्मचारियों का PF कटना या न कटना उनकी मर्जी पर डिपेंड करता था। नए आदेश से 25 हजार रुपए की लिमिट होने के बाद PF कटने से कर्मचारी की सेविंग बढ़ेगी और रिटायरमेंट पर बड़ा फंड मिलेगा। इस पर भारत सरकार का अनुमानित खर्च हर साल लगभग 11,339 करोड़ रुपये होगा।

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यहां एक बात यह भी समझना जरूरी है कि EPF में अनिवार्य योगदान की वेतन सीमा ₹15,000 ही रहेगी। यानी कंपनी और कर्मचारी का अनिवार्य EPF योगदान ₹15,000 तक की सैलरी के हिसाब से ही तय होगा। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी और DA मिलाकर ₹20,000 है, तो उसे EPF में शामिल करना अनिवार्य होगा, लेकिन अनिवार्य योगदान ₹15,000 की सीमा तक ही होगा।

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अमित शाह का UCC पर बड़ा ऐलान: 21 राज्यों में लागू होगा समान नागरिक संहिता, 2029 लोकसभा चुनाव से पहले होगा लागू

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Amit Shah Big Announcement On UCC: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी (UCC) पर बड़ा ऐलान किया है। अमित शाह ने 2029 लोकसभा चुनाव (2029 Lok Sabha elections) से पहले देश के 21 राज्य़ों में UCC लागू करने का ऐलान किया है। अमित शाह ने कहा कि 21 BJP-NDA शासित राज्यों साल 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले समान नागरिक संहिता लागू कर दिया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि देश के कई राज्यों में UCC लागू किया जा चुका है। उत्तराखंड, गुजरात और असम में यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले सालों में NDA शासित बाकी राज्यों में भी इसे लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा।

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मुंबई में सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमिच शाह ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लागू करने की प्रक्रिया कई राज्यों में आगे बढ़ चुकी है। सरकार की कोशिश है कि NDA के नेतृत्व वाली सभी राज्य सरकारों में भी इसे लागू किया जाए। UCC का मकसद अलग-अलग धर्मों के लिए अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में समान नागरिक नियम लागू करना है। हालांकि, इसके प्रावधान और लागू करने की प्रक्रिया राज्यों के स्तर पर अलग हो सकती है। शाह ने कहा कि तीन तलाक को खत्म कर मुस्लिम महिलाओं को समान अधिकार दिए गए हैं। हमने कई राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया है और मुझे भरोसा है कि BJP-NDA शासित 21 राज्यों में हम 2029 से पहले UCC लागू कर देंगे।

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उत्तराखंड, गुजरात और असम में UCC लागू
आपको बता दें कि बीजेपी नेतृत्व वाला NDA दिल्ली, पश्चिम बंगाल, असम, उत्तराखंड, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश सहित 19 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में है। उत्तराखंड, गुजरात और असम में UCC लागू हो चुका है। जबकि मध्य प्रदेश ने UCC का मसौदा तैयार करने के लिए एक समिति का गठन किया है।

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New Rule : शराब प्रेमियों को झटका! सरकार ने बदल दिया नियम, इस तारीख से होगा लागू

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New Rule . छत्तीसगढ़ में शराब प्रेमियों को बड़ा झटका लगा है. राज्य सरकार ने शराब बेचने के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है. इसका सीधा प्रभाव ग्राहकों पर पड़ना वाला है. आबकारी विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. यह नया नियम 1 अक्टूबर से लागू होगा.

दरअसल, प्रदेश के प्रीमियम दुकानों में विभाग को लगातार ओवररेटिंग की शिकायतें मिल रह रहीं थी. इसे रोकने के लिए विभाग नई व्यवस्था लागू करने जा रही है. सभी 49 प्रीमियम दुकानों में 1 अक्टूबर से कैशलेस बिक्री ही की जा सकेगी. यानी अब नगद नहीं बल्कि क्यूआर के जरिए शराब बिक्री होगी. इससे बिक्री और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी. साथ ही तय कीमत से अधिक राशि वसूलने की शिकायतों पर भी अंकुश लगने में मदद मिलेगी.

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आबकारी विभाग ने शराब दुकानों में होने वाले लेनदेन को डिजिटल बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है. कैशलेस व्यवस्था से बिक्री और भुगतान के बीच बेहतर निगरानी संभव होगी. साथ ही ओवररेट जैसी शिकायतों की जांच के लिए डिजिटल ट्रांजेक्शन भी एक रिकॉर्ड के रूप में उपलब्ध रहेगा. 

ओवररेट पर लगेगा लगाम
बताया जा रहा है कि  प्रीमियम शराब दुकानों पर निर्धारित दर से अधिक कीमत की लगातार शिकायतें सामने आ रही थी. ऐसे में विभाग ने ओवररेट की समस्या पर नियंत्रण के लिए भुगतान व्यवस्था में बदलाव किया. अगर अब कोई प्रीमियम शॉप में शराब बोतल के ज्यादा पैसे लेगा तो वह सीधे डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगा. इससे निर्धारित कीमत और वास्तविक भुगतान के बीत अंतर की शिकायतों की जांच की संभव हो पाएगा.

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