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छत्तीसगढ़

बिलासपुर में लगभग 89 प्रतिशत कोविड के मरीज हुए स्वस्थ, होम आईसोलेशन में रहते हुए 48 हजार 562 मरीजों ने दी कोरोना को मात

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बिलासपुर। जिले में कोविड संक्रमित 54 हजार 101 मरीज स्वस्थ हो गए है। जो कुल संक्रमितों में लगभग 89 प्रतिशत है। होम आईसोलेशन में रहते हुए 48 हजार 562 लोगों ने कोरोना को मात दी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर ने बताया कि जिले में कोरेाना संक्रमण की शुरूआत से लेकर 12 मई 2021 तक कुल 60 हजार 943 व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हुए।

इनमें 36 हजार 68 पुरूष और 24 हजार 335 महिला शामिल है। ग्रामीण क्षेत्र में 21 हजार 722 संक्रमित लोगों में से 18 हजार 676 मरीज स्वस्थ्य हुए। इसी प्रकार शहरी क्षेत्रों में 39 हजार 221 संक्रमित लोगों में 35 हजार 425 व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हंै। 12 मई को 790 संक्रमित स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। होम आईसोलेशन में रहने वाले 53 हजार 472 संक्रमितों में से 48 हजार 562 व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हैं।


उन्होंने बताया कि जिले में अभी 5 हजार 719 एक्टिव केस है। जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में 2 हजार 796 और शहरी क्षेत्र में 2 हजार 923 केस शामिल है। ग्रामीण क्षेत्र अंतर्गत विकासखण्ड बिल्हा में संक्रमित 6 हजार 562 लोगों में से 5 हजार 744 व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हंै। कोटा विकासखण्ड में 5 हजार 599 संक्रमितों में से 4 हजार 757 व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हंै। मस्तुरी विकासखण्ड अंतर्गत 6 हजार 82 संक्रमितों में से 5 हजार 370 व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हंै। तखतपुर विकासखण्ड अंतर्गत 3 हजार 479 संक्रमितांे में से 2 हजार 850 व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हंै।

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इसी तरह शहरी क्षेत्र अंतर्गत बोदरी नगर पंचायत में 168 संक्रमितों में से 150 व्यक्ति स्वस्थ हो चुके हंै। नगर निगम बिलासपुर अंतर्गत 38 हजार 513 संक्रमितों में से 34 हजार 817 स्वस्थ हो चुके हंैै। अन्य जिलों के व्यक्ति जो यहां के अस्पतालों में भर्ती है उनमें 540 संक्रमितों में से 458 स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो गए।


मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर से प्राप्त कोविड रिपोर्ट के अनुसार 12 मई 2021 की स्थिति में बिलासपुर में 5 हजार 719 सक्रिय केस में से 4 हजार 902 संक्रमित होम आईसोलेशन में हैै। होम आईसोलेशन में रहने वाले 53 हजार 472 संक्रमितों में से 48 हजार 562 व्यक्ति स्वस्थ हो गए। जिले के शासकीय कोविड अस्पताल में 1344 संक्रमित भर्ती किये गये थे। जिसमें 1134 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हो गए।

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अभी 70 मरीज अस्पताल में भर्ती है। चित्रकूट छात्रावास में बनाये गये कोविड केयर सेंटर में 1162 संक्रमितों में से 1096 व्यक्ति स्वस्थ हुए। रेलवे अस्पताल में बनाये गये कोविड अस्पताल में 642 संक्रमितों में से 510 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। इसी तरह एम्स रायपुर में भर्ती जिले के 180 मरीज डिस्चार्ज हुए और मेकाहारा रायपुर में जिले के 82 व्यक्ति स्वस्थ हुए । एनटीपीसी हाॅस्पिटल में 13 मरीज डिस्चार्ज हुए। सिम्स बिलासपुर से 214, सीआरपीएफ भरनी के कोविड अस्पताल से 136, प्रयास आवासीय विद्यालय कोविड केयर सेंटर से 209, सेंदरी मेंटल हाॅस्पिटल कोविड केयर सेंटर से 122 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए।


निजी अस्पतालों में महादेव हाॅस्पिटल से 121,, आरबी हाॅस्पिटल से 104, श्री राम केयर हाॅस्पिटल से 279, किम्स हाॅस्पिटल से 43, स्काई हाॅस्पिटल से 37, एसकेबी हाॅस्पिटल से 29, केयर एंड क्योर हाॅस्पिटल से 79, नारायणी हाॅस्पिटल से 95, सांई हार्ट हाॅस्पिटल से 20 और लाईफ केयर हाॅस्पिटल से 17 मरीज स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए। इसी तरह अन्य अस्पतालों से 609 संक्रमित स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए।

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छत्तीसगढ़

कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।

पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं

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सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है

नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है

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छत्तीसगढ़

तीसरा बड़ा मंगलवार आज : अपनी मनोकामना के अनुसार हनुमान जी को इन चीजों का लगाए भोग …

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Dharm Desk- ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है. आज 19 मई को तीसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है. जो पुरुषोत्तम मास के साथ पड़ने से और अधिक खास बन गया है. इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. पूजा-अर्चना का विशेष क्रम जारी है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमानजी के मिलन हुआ था. इसी कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. तीसरे बड़े मंगल के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है.

 

1.गुड़-चना चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग अर्पित करना अत्यंत प्रिया है. यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष से जुड़े कष्टों को शांत करने के लिए किया जाता है. नियमित रूप से यह भोग चढ़ाने से जीवन में स्थिरता आती है और बाधाओं में कमी देखने को मिलती है. ऐसे में बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को गुड़ चने भोग लगाकर प्रार्थना करना चाहिए.

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2.नारियल अर्पित करने से क्या होता है

 

इस दिन को लेकर मानता है कि साबुत नारियल पर सिंदूर लगाकर और कलावा बांधकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है. इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि और धन संबंधी समस्याओं में सुधार आता हैं.

 

3.पान का बीड़ा चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करना खास तौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है. जिनके काम अटक रहे होते हैं. पूजा के बाद पान चढ़ाकर कार्य सिद्धि की कामना की जाती है. इससे कठिन और रुके हुए कार्यों में गति आने लगती है और हनुमान जी से प्रार्थना की जाती है कि आप मेरा इस कष्ट या पीड़ा को हारने का बीड़ा आपको मैं सोचता हूं.

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4.इमरती और लड्डू चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को इमरती और बूंदी के लड्डू अत्यंत प्रिय है. इनका भोग लगाने से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं. यह प्रसाद चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में खुशहाली का वातावरण बनता है.

 

5.केसर भात अर्पित करने से क्या होता है

 

केसर भात का भोग हनुमान जी को अर्पित करने से कुंडली के दोषों को शांत करने का प्रयास किया जाता है. यह भोग विशेष रूप से बड़े मंगल के दिन किया जाता है. इससे जीवन में आने वाले संकटों का प्रभाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है. इससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है.

 

 

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