Connect with us

Uncategorized

छत्तीसगढ़ : बीजापुर जिले में पांच नक्सली गिरफ्तार

Published

on

बीजापुर| छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों ने पांच नक्सलियों को गिरफ्तार किया है।मिली जानकारी के अनुसार जिले के नैमेड और मिरतूर थाना क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने पांच नक्सलियों कमलू ओयाम (23), मनीष कलमूम (26), गुड्डु हेमला (30), बिज्जा उर्फ़ बीजा कड़ती (47) और मुड़ा (47) को गिरफ्तार किया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले में संचालित माओवादी विरोधी अभियान के तहत बुधवार को नैमेड़ थाने से जिला बल, डीआरजी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को कैका, कडेर और जपेली गांव की ओर रवाना किया गया था।उन्होंने बताया कि गश्त के दौरान सुरक्षा बलों ने तीन नक्सलियों कमलू, मनीष कलमूम और गुड्डु हेमला को गिरफ्तार कर लिया।

यह भी पढ़ें   CG : स्वास्थ्य संयोजकों की हड़ताल स्थगित

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार नक्सली आगजनी की घटना में शामिल थे ।उन्होंने बताया कि एक अन्य घटना में सुरक्षा बलों ने मिरतुर थाना क्षेत्र में दो नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मिरतुर थाना क्षेत्र में जिला बल और सीआरपीएफ का दल गश्त पर था और दल जब मुण्डेर गांव के जंगल में था तब वहां घेराबंदी कर दो नक्सलियों बिज्जा और मुड़ा को गिरफ्तार कर लिया गया।उन्होंने बताया कि गिरफ्तार नक्सलियों के खिलाफ हत्या, लूट और अन्य घटनाओं में मामले दर्ज हैं।

सोर्स: भाषा

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Uncategorized

बैठकर की जानी चाहिए शिवलिंग की पूजा, तभी मिलता है पूर्ण फल …

Published

on

Dharm Desk – सावन का पवित्र माह भगवान शंकर की भक्ति के लिए सबसे बहुत ही अच्छा समय माना जाता है। इस पूरे महीने शंकर मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। और जलाभिषेक का खास महत्व होता है। खासकर सावन के सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाने का अलग ही महत्व बताया गया है। लेकिन केवल शिवलिंग पर जल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता साथ ही पूजा का सही तरीका अपनाना भी बहुत ही जरूरी है। शास्त्रों में शिवलिंग की पूजा के कुछ नियम बताए हैं, जिनका पालन करने से ही साधक को पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन बातों का रखे ध्यान….

  1. शिवलिंग पर जल बैठकर ही अर्पित करे….. सावन में मंदिरों में अक्सर श्रद्धालु खड़े होकर जल्दी-जल्दी जल चढ़ाते नजर आते हैं।लेकिन यह तरीका शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं माना गया है। भगवान शंकर को जल अभिषेक बैठ कर ही करना चाहिए। बैठकर जल चढ़ाने से मन स्थिर रहता है और पूजा में एकाग्रता बनी रहती है। खड़े होकर जल चढ़ाने से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता जबकि विधिपूर्वक बैठकर जल अर्पित करने से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
  2. पूजा करते समय सही दिशा का ध्यान रखे
    शिवलिंग पूजा में दिशा का खास महत्व बताया गया है। यदि आप सुबह के समय जलाभिषेक कर रहे हैं, तो पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पूजा करना शुभ होता है। वहीं शाम के समय पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके पूजा करनी चाहिए। यदि कोई भक्त विशेष मनोकामना के लिए रात में शिव आराधना करता है तो उसे उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। मंत्र जाप और ध्यान के लिए भी पूर्व और उत्तर दिशा को उत्तम बताया गया है।
  3. शिवलिंग की परिक्रमा का नियम

    शिवलिंग की पूजा करते समय परिक्रमा का भी विशेष विधान है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती बल्कि आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि शिवलिंग से निकलने वाली जलधारा को लांघना निषिद्ध माना गया है। इसलिए भक्त आधी परिक्रमा कर अपनी पूजा को पूर्ण करते हैं।

    4. सावन में नियमों का पालन क्यों जरूरी
    सावन में की गई भोलेनाथ की पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। माना जाता है कि इस महीने भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। ऐसे में यदि पूजा सही विधि और नियमों के अनुसार की जाए तो इसका फल भी कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए मंदिर में जल चढ़ाने के दौरान जल्दबाजी न करें बल्कि शांत मन से बैठकर विधिपूर्वक पूजा करें।
यह भी पढ़ें   अम्बिकापुर : झोला छाप डॉक्टर से न कराएं ईलाज, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने लोगो से की अपील
Continue Reading

Uncategorized

03 अगस्त भस्म आरती: सावन का पहला सोमवार-भगवान महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार, यहां कीजिए दर्शन

Published

on

उज्जैन। Mahakal Bhasma Aarti: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार तड़के 2.30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया।

मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया। भांग, चंदन और आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया।

मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। लोगों ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे भी लगा रहे थे। पूरा मंदिर बाबा के जयकारे से गुंजायमान हो रहा था।

यह भी पढ़ें   CG Corona Breaking: छत्तीसगढ़ में आज बढ़े कोरोना के नए मरीज, 31 मरीजों की हुई पुष्टि... 29 हुए स्वस्थ

Continue Reading

Uncategorized

PM Fasal Bima Yojana 2026 : आखिरी तारीख 16 अगस्त तक बढ़ी, जानिए कैसे करें आवेदन

Published

on

Business Desk – PM Fasal Bima Yojana 2026 : खरीफ 2026 सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana – PMFBY) के तहत फसल बीमा कराने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने फसल बीमा की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 16 अगस्त 2026 कर दी है। इससे हजारों ऐसे किसानों को अतिरिक्त समय मिल गया है, जो किसी कारणवश तय समय सीमा तक अपनी फसलों का बीमा नहीं करा सके थे।

योजना का लाभ ऋणी (Loanee), गैर-ऋणी (Non-Loanee) और बटाईदार (Sharecropper) किसान भी ले सकेंगे। प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़, आंधी, कीट एवं रोगों से फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय को सुरक्षित करना और खेती के जोखिम को कम करना है।

PM Fasal Bima Yojana क्या है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की प्रमुख कृषि योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। योजना के तहत बीमित किसानों को नुकसान का आकलन होने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाता है।

किन किसानों को मिलेगा फायदा?
ऋणी किसान (Loanee Farmers)
गैर-ऋणी किसान (Non-Loanee Farmers)
बटाईदार किसान (Sharecropper Farmers)

किन फसलों का कराया जा सकता है बीमा?
खरीफ सीजन की अधिसूचित फसलों का बीमा कराया जा सकता है। राज्य सरकार द्वारा जिलेवार अधिसूचित फसलों को योजना में शामिल किया जाता है। इनमें सामान्य तौर पर धान, सोयाबीन, मक्का, बाजरा, ज्वार, मूंग, उड़द, कपास सहित अन्य खरीफ फसलें शामिल रहती हैं।

फसल खराब होने पर कब मिलता है क्लेम?
सूखा पड़ने पर
बाढ़ या जलभराव होने पर
अतिवृष्टि या कम बारिश होने पर
ओलावृष्टि
चक्रवात और तेज आंधी
भूस्खलन
कीट एवं रोग से फसल नुकसान
कटाई के बाद निर्धारित अवधि में प्राकृतिक आपदा से नुकसान

किसान को कितना Premium देना पड़ता है?
खरीफ फसल: बीमित राशि का 2 प्रतिशत
रबी फसल: बीमित राशि का 1.5 प्रतिशत
व्यावसायिक एवं बागवानी फसल: बीमित राशि का 5 प्रतिशत

कैसे करें Online Apply?
नजदीकी बैंक शाखा
प्राथमिक कृषि साख समिति (PACS)
कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)
अधिकृत बीमा कंपनी
PMFBY पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन

आवेदन के लिए जरूरी Documents
आधार कार्ड
बैंक पासबुक
भूमि संबंधी दस्तावेज
बुआई का विवरण
मोबाइल नंबर
पासपोर्ट साइज फोटो

क्लेम कैसे मिलता है?
यदि प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होती है, तो संबंधित विभाग नुकसान का सर्वे करता है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनी पात्र किसानों के बैंक खाते में क्लेम राशि भेजती है। कुछ परिस्थितियों में स्थानीय नुकसान की सूचना निर्धारित समय सीमा के भीतर देना भी जरूरी होता है।

Last Date बढ़ने से किसानों को क्या फायदा होगा?
31 जुलाई तक आवेदन नहीं कर पाने वाले किसानों को अब अतिरिक्त समय मिल गया है। इससे अधिक किसान योजना में शामिल हो सकेंगे और खरीफ सीजन में प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त कर पाएंगे।

किसानों के लिए जरूरी सलाह
यदि आपने अभी तक खरीफ फसल का बीमा नहीं कराया है, तो अंतिम समय का इंतजार न करें। अपने बैंक, CSC सेंटर या अधिकृत बीमा कंपनी से संपर्क कर 16 अगस्त 2026 से पहले आवेदन पूरा कर लें। आवेदन करते समय सभी दस्तावेज और फसल संबंधी जानकारी सही भरें, ताकि भविष्य में क्लेम लेने में कोई परेशानी न हो।

यह भी पढ़ें   देश में जल्द चलेंगे ₹10 और ₹20 के प्लास्टिक-नोट, ट्रायल होगा शुरू ; कागज के नोट भी चलेंगे
Continue Reading
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement

Trending