छत्तीसगढ़
16 महीने बाद एक बार फिर बजी स्कूल की घंटी, स्कूल शिक्षा मंत्री ने बच्चों का तिलक लगाकर किया स्वागत

रायपुर| राज्य शासन के निर्देशानुसार आज 2 अगस्त से प्रदेश में 10वीं, 12वीं, 8वीं एवं प्राथमिक स्कूलों की कक्षाएं प्रारंभ हो गई। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने आज राजधानी रायपुर के आमानाका स्थित स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम शासकीय उत्कृष्ट स्कूल, संजय नगर टिकरापारा शहीद संजय यादव शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शासकीय श्रीराम शर्मा (मिन्टू) उच्चतर माध्यमिक स्कूल डूमरतराई, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माना बस्ती और स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माना कैम्प का निरीक्षण कर बच्चों और शिक्षिकों से चर्चा की। उन्होंने राजधानी रायपुर के आर.डी. तिवारी शासकीय इंग्लिश मीडियम उत्कृष्ट विद्यालय में प्रवेश उत्सव के कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने उत्साह एवं उमंग के प्रतीक रंगीन गुब्बारे छोड़े। मंत्री डॉ. टेकाम ने स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू होने पर डिजिटल बोर्ड पर हाथ से लिख कर बच्चों को बधाई और शुभकामनाएं दी।
मंत्री डॉ. टेकाम ने आगे कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण आज 16 महीने बाद स्कूल एक बार फिर से प्रारंभ हुए है। स्कूली बच्चों में उत्साह एवं उमंग साफ झलक रहा है उन्होंने बच्चों को अच्छे से पढ़ाई करने तथा कोरोना प्रोटोकोल का पालन करने का आह्वान किया। मंत्री डॉ. टेकाम ने इस अवसर पर शाला के नवप्रवेशी बच्चों को मिठाई खिलाकर स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को पुस्तकों के सेट भी प्रदान किए और शासन की सरस्वती सायकल योजना के तहत कक्षा दसवीं की छात्राओं को साइकिल की चाबी भी सौंपी।
मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि बच्चों के पालकों में स्कूल से जो अपेक्षाएं हैं, शिक्षक उसे कम ना होने दें। कोरोना प्रोटोकॉल के तहत सैनिटाइजेशन, साफ-सफाई नियमित रूप से होती रहे। प्रत्येक शिक्षक एवं बच्चे मास्क पहनकर आएं। शिक्षक बच्चों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने बताया कि शासन द्वारा कक्षा में छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत ही रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में उत्कृष्ट शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल प्रारंभ किए गए हैं। यह प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की पहल पर राज्य में शिक्षा की व्यवस्था में परिवर्तन आया है। अंग्रेजी माध्यम स्कूल में अब गरीब परिवार के बच्चे भी दाखिला लेकर निःशुल्क उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि गत वर्ष अंग्रेजी माध्यम स्कूल के 52 शासकीय स्कूल खोले गए थे। इसकी लोकप्रियता एवं मांग को देखते हुए इस सत्र से 120 स्कूल और खोले गए हैं। इन्हें मिलाकर अब प्रदेश में 172 अंग्रेजी स्कूलों का संचालन हो रहा है।
स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. टेकाम ने शहीद संजय यादव शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संजय नगर में संचालित कक्षाओं का अवलोकन करते हुए बच्चों से उनकी पढ़ाई के संबंध में चर्चा की। उन्होंने बच्चों से कोरोना नियमों का कड़ाई से पालन करने की अपील की। उन्होंने यहां अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण भी किया।
डॉ. टेकाम ने शासकीय श्रीराम शर्मा मिंटू हायर सेकेंडरी स्कूल डूमरतराई मैं संचालित स्मार्ट क्लास का अवलोकन किया और बच्चों से प्रश्न भी पूछे और कक्षा दसवीं की छात्रा डीगेश्वरी साहू के सही जवाब पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उसे 500 रूपए का नगद पुरस्कार देते हुए बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
इस मौके पर संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, योग आयोग के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के अध्यक्ष पंकज शर्मा, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव एवं लोक शिक्षण आयुक्त डॉ कमलप्रीत सिंह, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक चतुर्वेदी, जिला शिक्षा अधिकारी अशोक नारायण बंजारा, स्थानीय जनप्रतिनिधि और संबंधित स्कूल के प्राचार्य एवं शिक्षक उपस्थित थे|
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
news
छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है
छत्तीसगढ़
तीसरा बड़ा मंगलवार आज : अपनी मनोकामना के अनुसार हनुमान जी को इन चीजों का लगाए भोग …

Dharm Desk- ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है. आज 19 मई को तीसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है. जो पुरुषोत्तम मास के साथ पड़ने से और अधिक खास बन गया है. इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. पूजा-अर्चना का विशेष क्रम जारी है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमानजी के मिलन हुआ था. इसी कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. तीसरे बड़े मंगल के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है.
1.गुड़-चना चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग अर्पित करना अत्यंत प्रिया है. यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष से जुड़े कष्टों को शांत करने के लिए किया जाता है. नियमित रूप से यह भोग चढ़ाने से जीवन में स्थिरता आती है और बाधाओं में कमी देखने को मिलती है. ऐसे में बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को गुड़ चने भोग लगाकर प्रार्थना करना चाहिए.
2.नारियल अर्पित करने से क्या होता है
इस दिन को लेकर मानता है कि साबुत नारियल पर सिंदूर लगाकर और कलावा बांधकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है. इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि और धन संबंधी समस्याओं में सुधार आता हैं.
3.पान का बीड़ा चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करना खास तौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है. जिनके काम अटक रहे होते हैं. पूजा के बाद पान चढ़ाकर कार्य सिद्धि की कामना की जाती है. इससे कठिन और रुके हुए कार्यों में गति आने लगती है और हनुमान जी से प्रार्थना की जाती है कि आप मेरा इस कष्ट या पीड़ा को हारने का बीड़ा आपको मैं सोचता हूं.
4.इमरती और लड्डू चढ़ाने से क्या होता है
हनुमान जी को इमरती और बूंदी के लड्डू अत्यंत प्रिय है. इनका भोग लगाने से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं. यह प्रसाद चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में खुशहाली का वातावरण बनता है.
5.केसर भात अर्पित करने से क्या होता है
केसर भात का भोग हनुमान जी को अर्पित करने से कुंडली के दोषों को शांत करने का प्रयास किया जाता है. यह भोग विशेष रूप से बड़े मंगल के दिन किया जाता है. इससे जीवन में आने वाले संकटों का प्रभाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है. इससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है.
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