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बिलासपुर : मतदाता पहचान पत्र से आधार नंबर जोड़ने का अभियान शुरू

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बिलासपुर| जिले के मतदाताओं से आधार डेटा का संग्रह कर मतदाता सूची के डेटा में जोड़कर प्रमाणित करने का अभियान 1 अगस्त से शुरू हो गया है। इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्देश जारी करते हुए कार्यक्रम जारी किया गया है। जारी कार्यक्रम का उद्देश्य मतदाताओं से आधार संग्रह कर निर्वाचकों की पहचान स्थापित करना है। इसके साथ ही मतदाता सूची में प्रविष्टियों का प्रमाणीकरण करना और एक से अधिक बार पंजीबद्ध व्यक्ति के नाम की पहचान कर भविष्य में बेहतर चुनावी सेवाएं प्रदान करना है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा संचालित इस अभियान में अधिक से अधिक मतदाताओं से आधार डेटा का संग्रह कर मतदाता सूची के डेटा में जोड़ने एवं प्रमाणीकरण करने के कार्य में सहयोग की अपील की है।


जारी कार्यक्रम के अनुसार निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी को प्रत्येक व्यक्ति से आधार संख्या प्राप्त करने के लिए अधिकृत किया गया है। 1 जनवरी 2023 को या उससे पूर्व निर्वाचक नामावली में शामिल प्रत्येक व्यक्ति स्वेच्छा से अपने आधार संख्या को सूचित कर सकता है। आधार नम्बर आनलाइन एवं आफलाइन दोनों माध्यम से जमा किया जा सकता है। आनलाइन जमा करने के लिए प्रपत्र 6 बी, एनवीएसपी, वीएचए एप्लिकेशन में सुविधा प्रदान की जायेगी। मतदाता आनलाइन प्रपत्र 6 बी भर सकता है और न्प्क्।प्  के साथ पंजीकृत अपने मोबाइल नंबर प्राप्त होने वाली ओटीपी का उपयोग करके आधार प्रमाणित कर सकता है। यदि मतदाता स्वयं प्रमाणित नहीं करना चाहता है या स्वयं प्रमाणीकरण करने में विफल रहता है, तो मतदाता प्रमाणीकरण के बिना आवश्यक अनुलग्नकों के साथ प्रपत्र 6 बी आनलाइन जमा कर सकता है।

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बूथ लेबल अधिकारी घर-घर जाकर आधार संख्या प्राप्त करेंगे तथा सभी आफलाइन प्रपत्र 6 बी को गरूणा एप्प का उपयोग करके अथवा निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा इरोनेट का उपयोग करके फार्म प्राप्त होने के 7 दिनों के भीतर डिजिटाइज किया जायेगा। मतदाता के पास आधार संख्या नहीं होने तथा वह अपना आधार नंबर प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं है तो, उसे प्रपत्र 6 बी में दर्शित वैकल्पिक दस्तावेजों में से एक प्रति को जमा करना होगा। आधार संख्या एकत्रित करते समय आधार अधिनियम 2016 की धारा 37 के प्रावधानों का पालन किया जायेगा तथा किसी भी परिस्थिति में इसे सार्वजनिक एवं पब्लिक डोमेन में नहीं किया जायेगा। कार्यक्रम के तहत 4 सितम्बर 2022 को विशेष शिविर आयोजित किये जायेंगे। आवश्यकतानुसार सूचना जारी कर आगामी रविवार के दिनों में विशेष शिविर आयोजित कर आधार संग्रहण की कार्यवाही की जायेगी।

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बैठकर की जानी चाहिए शिवलिंग की पूजा, तभी मिलता है पूर्ण फल …

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Dharm Desk – सावन का पवित्र माह भगवान शंकर की भक्ति के लिए सबसे बहुत ही अच्छा समय माना जाता है। इस पूरे महीने शंकर मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। और जलाभिषेक का खास महत्व होता है। खासकर सावन के सोमवार को शिवलिंग पर जल चढ़ाने का अलग ही महत्व बताया गया है। लेकिन केवल शिवलिंग पर जल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता साथ ही पूजा का सही तरीका अपनाना भी बहुत ही जरूरी है। शास्त्रों में शिवलिंग की पूजा के कुछ नियम बताए हैं, जिनका पालन करने से ही साधक को पूर्ण फल की प्राप्ति होती है।

शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय इन बातों का रखे ध्यान….

  1. शिवलिंग पर जल बैठकर ही अर्पित करे….. सावन में मंदिरों में अक्सर श्रद्धालु खड़े होकर जल्दी-जल्दी जल चढ़ाते नजर आते हैं।लेकिन यह तरीका शास्त्रों के अनुसार उचित नहीं माना गया है। भगवान शंकर को जल अभिषेक बैठ कर ही करना चाहिए। बैठकर जल चढ़ाने से मन स्थिर रहता है और पूजा में एकाग्रता बनी रहती है। खड़े होकर जल चढ़ाने से पूजा का पूरा फल नहीं मिलता जबकि विधिपूर्वक बैठकर जल अर्पित करने से भगवान भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं।
  2. पूजा करते समय सही दिशा का ध्यान रखे
    शिवलिंग पूजा में दिशा का खास महत्व बताया गया है। यदि आप सुबह के समय जलाभिषेक कर रहे हैं, तो पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पूजा करना शुभ होता है। वहीं शाम के समय पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके पूजा करनी चाहिए। यदि कोई भक्त विशेष मनोकामना के लिए रात में शिव आराधना करता है तो उसे उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करना श्रेष्ठ माना गया है। मंत्र जाप और ध्यान के लिए भी पूर्व और उत्तर दिशा को उत्तम बताया गया है।
  3. शिवलिंग की परिक्रमा का नियम

    शिवलिंग की पूजा करते समय परिक्रमा का भी विशेष विधान है। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती बल्कि आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि शिवलिंग से निकलने वाली जलधारा को लांघना निषिद्ध माना गया है। इसलिए भक्त आधी परिक्रमा कर अपनी पूजा को पूर्ण करते हैं।

    4. सावन में नियमों का पालन क्यों जरूरी
    सावन में की गई भोलेनाथ की पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। माना जाता है कि इस महीने भगवान शिव अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। ऐसे में यदि पूजा सही विधि और नियमों के अनुसार की जाए तो इसका फल भी कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए मंदिर में जल चढ़ाने के दौरान जल्दबाजी न करें बल्कि शांत मन से बैठकर विधिपूर्वक पूजा करें।
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03 अगस्त भस्म आरती: सावन का पहला सोमवार-भगवान महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार, यहां कीजिए दर्शन

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उज्जैन। Mahakal Bhasma Aarti: विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सावन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि सोमवार तड़के 2.30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। महाकाल की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया।

मंदिर के पट खुलने के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन कर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक पूजन किया। भांग, चंदन और आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया।

मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।सुबह भस्म आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। लोगों ने नंदी महाराज का दर्शन कर उनके कान के समीप जाकर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद मांगा। इस दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल की जयकारे भी लगा रहे थे। पूरा मंदिर बाबा के जयकारे से गुंजायमान हो रहा था।

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PM Fasal Bima Yojana 2026 : आखिरी तारीख 16 अगस्त तक बढ़ी, जानिए कैसे करें आवेदन

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Business Desk – PM Fasal Bima Yojana 2026 : खरीफ 2026 सीजन में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PM Fasal Bima Yojana – PMFBY) के तहत फसल बीमा कराने वाले किसानों के लिए राहत की खबर है। सरकार ने फसल बीमा की अंतिम तारीख 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 16 अगस्त 2026 कर दी है। इससे हजारों ऐसे किसानों को अतिरिक्त समय मिल गया है, जो किसी कारणवश तय समय सीमा तक अपनी फसलों का बीमा नहीं करा सके थे।

योजना का लाभ ऋणी (Loanee), गैर-ऋणी (Non-Loanee) और बटाईदार (Sharecropper) किसान भी ले सकेंगे। प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, सूखा, ओलावृष्टि, बाढ़, आंधी, कीट एवं रोगों से फसल खराब होने की स्थिति में किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय को सुरक्षित करना और खेती के जोखिम को कम करना है।

PM Fasal Bima Yojana क्या है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की प्रमुख कृषि योजनाओं में से एक है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं या अन्य कारणों से फसल खराब होने पर किसानों को आर्थिक सुरक्षा देना है। योजना के तहत बीमित किसानों को नुकसान का आकलन होने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाता है।

किन किसानों को मिलेगा फायदा?
ऋणी किसान (Loanee Farmers)
गैर-ऋणी किसान (Non-Loanee Farmers)
बटाईदार किसान (Sharecropper Farmers)

किन फसलों का कराया जा सकता है बीमा?
खरीफ सीजन की अधिसूचित फसलों का बीमा कराया जा सकता है। राज्य सरकार द्वारा जिलेवार अधिसूचित फसलों को योजना में शामिल किया जाता है। इनमें सामान्य तौर पर धान, सोयाबीन, मक्का, बाजरा, ज्वार, मूंग, उड़द, कपास सहित अन्य खरीफ फसलें शामिल रहती हैं।

फसल खराब होने पर कब मिलता है क्लेम?
सूखा पड़ने पर
बाढ़ या जलभराव होने पर
अतिवृष्टि या कम बारिश होने पर
ओलावृष्टि
चक्रवात और तेज आंधी
भूस्खलन
कीट एवं रोग से फसल नुकसान
कटाई के बाद निर्धारित अवधि में प्राकृतिक आपदा से नुकसान

किसान को कितना Premium देना पड़ता है?
खरीफ फसल: बीमित राशि का 2 प्रतिशत
रबी फसल: बीमित राशि का 1.5 प्रतिशत
व्यावसायिक एवं बागवानी फसल: बीमित राशि का 5 प्रतिशत

कैसे करें Online Apply?
नजदीकी बैंक शाखा
प्राथमिक कृषि साख समिति (PACS)
कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)
अधिकृत बीमा कंपनी
PMFBY पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन

आवेदन के लिए जरूरी Documents
आधार कार्ड
बैंक पासबुक
भूमि संबंधी दस्तावेज
बुआई का विवरण
मोबाइल नंबर
पासपोर्ट साइज फोटो

क्लेम कैसे मिलता है?
यदि प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होती है, तो संबंधित विभाग नुकसान का सर्वे करता है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनी पात्र किसानों के बैंक खाते में क्लेम राशि भेजती है। कुछ परिस्थितियों में स्थानीय नुकसान की सूचना निर्धारित समय सीमा के भीतर देना भी जरूरी होता है।

Last Date बढ़ने से किसानों को क्या फायदा होगा?
31 जुलाई तक आवेदन नहीं कर पाने वाले किसानों को अब अतिरिक्त समय मिल गया है। इससे अधिक किसान योजना में शामिल हो सकेंगे और खरीफ सीजन में प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा प्राप्त कर पाएंगे।

किसानों के लिए जरूरी सलाह
यदि आपने अभी तक खरीफ फसल का बीमा नहीं कराया है, तो अंतिम समय का इंतजार न करें। अपने बैंक, CSC सेंटर या अधिकृत बीमा कंपनी से संपर्क कर 16 अगस्त 2026 से पहले आवेदन पूरा कर लें। आवेदन करते समय सभी दस्तावेज और फसल संबंधी जानकारी सही भरें, ताकि भविष्य में क्लेम लेने में कोई परेशानी न हो।

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