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छत्तीसगढ़

CG: मनरेगा राशि के भुगतान न होने से नाराज सरपंच संघ

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डोंगरगढ़। छत्तीसढ़ में शासन द्वारा कई प्रकार की योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिसके कारण मनरेगा भुगतान को लेकर अक्सर समस्याएं आती हैं, एक बार फिर सरपंच संघ द्वारा जनपद पंचायत के पास धरना दिया गया है। पांच सरपंच आमरण अनशन पर बैठे हैं, वहीं अफसर इस मामले में कुछ कह नहीं रहे हैं। सरपंच संघ की माने तो पिछले ढाई वर्षों से ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को गति के लिए कई ग्राम पंचायतों के सरपंच कर्ज से मटेरियल लेकर शासन की योजनाओं के तहत निमार्ण कार्य करा रहे हैं जिसकी वहज से वे कर्ज में डूब गए हैं, लेकिन प्रशासन कोई ध्यान नहीं रहा है।

अधिकतर सरपंच कर्ज में डूबे

सरपंचों के अनुसार शासन की सबसे महत्वकांक्षी योजना नरवा गरवा घुरवा बाड़ी अंतर्गत गौठान निर्माण, धान खरीदी केंद्रों में चबूतरा निर्माण, नौनिहाल बच्चों के पढ़ाई हेतु आंगनवाड़ी भवन निर्माण, जल निकासी हेतु नाली निर्माण, दाह संस्कार हेतु मुक्तिधाम व प्रतीक्षालय, महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए बकरी शेड, मुर्गी शेड, इत्यादि बहुत सारे निर्माण कार्य सरपंच अपनी जिम्मेदारी से मटेरियल खरीद कर निर्माण कार्यों को पूर्ण किए हैं और जिसकी वजह से अधिकतर सरपंच कर्ज में डूबे हुए हैं जिससे सरपंचों को मानसिक तनाव से रोजाना जूझना पड़ता है।

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वे कहते हैं कि आखिर कब तक ग्राम पंचायतों के मुखिया कहे जाने वाले सरपंच ऐसे ही कर्ज के बोझ में डूबे रहेंगे? शासन अक्तूबर 2022 में पूरे छत्तीसगढ़ में 150 करोड़ रुपए भुगतान किए हैं। किंतु जनपद पंचायत छुरिया के साथ सौतेला व्यवहार करते हुए 5 करोड़ 31 लाख रुपए में एक भी रुपए वेंडरों के खाते में नहीं डाला। जिससे समस्त सरपंच आक्रोशित होकर जनपद पंचायत छुरिया के गेट के पास धरना में बैठे हैं।

सरपंचों को प्रदान किए वेंडरों की दिवाली नहीं

जनपद पंचायत छुरिया के सरपंचों के मन में चिंता है कि अभी सामने सबसे बड़ा त्योहार कहे जाने वाले दिवाली होगी किंतु जनपद पंचायत छुरिया के सरपंचों व जनपद पंचायत छुरिया के सरपंचों को प्रदान किए वेंडरों की दिवाली नहीं होगी। क्योंकि मनरेगा का मटेरियल भुगतान 1 वर्ष में एक से दो बार ही होता है, जो इस दिवाली भी नहीं हो पाया। आखिर पूरे छत्तीसगढ़ में जिला राजनांदगांव में जनपद पंचायत छुरिया का भुगतान क्यू रुका? इसका कारण क्या है? यह जान पाना अभी मुश्किल होगा।

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मामले में अधिकारी कर्मचारियों को पूछे जाने पर इसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं कहा जाता है। सरपंचों का कहना है कि आखिर कब तक इसी तरह ग्राम पंचायत के मुखिया सरपंचों को कर्ज के तले डूबे रहना पड़ेगा। एक तरफ महंगाई की मार समस्त बिल्डिंग मटेरियल आज की स्थिति में दोगुनी दर पर प्राप्त हो रहा है जिससे अब ग्राम पंचायतों में विकास कार्य करना असंभव सा प्रतीत होता है आखिर मनरेगा मैटेरियल राशि भुगतान में इतना देरी क्यों जब कार्य पूर्ण हो जाता है तो मूल्यांकन व सत्यापन के पश्चात तत्काल राशि प्रदान किया जाना चाहिए। जब तक मटेरियल राशि का भुगतान नहीं होगा तब तक हम आमरण अनशन से नही हटेंगे।

छत्तीसगढ़

कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

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रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प

पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।

  • बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
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नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:

  • परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।

  • भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।

  • खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।

“सुशासन सरकार का संकल्प”

सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।

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छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

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छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।

पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

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शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।

खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं

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सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है

नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है

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छत्तीसगढ़

तीसरा बड़ा मंगलवार आज : अपनी मनोकामना के अनुसार हनुमान जी को इन चीजों का लगाए भोग …

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Dharm Desk- ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. इन्हें बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के रूप में मनाया जाता है. आज 19 मई को तीसरा बड़ा मंगल मनाया जा रहा है. जो पुरुषोत्तम मास के साथ पड़ने से और अधिक खास बन गया है. इस दिन हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिल रही है. पूजा-अर्चना का विशेष क्रम जारी है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, ज्येष्ठ माह के मंगलवार को भगवान राम और हनुमानजी के मिलन हुआ था. इसी कारण इस दिन हनुमानजी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. तीसरे बड़े मंगल के अवसर पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया है.

 

1.गुड़-चना चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को गुड़ और चने का भोग अर्पित करना अत्यंत प्रिया है. यह उपाय विशेष रूप से मंगल दोष से जुड़े कष्टों को शांत करने के लिए किया जाता है. नियमित रूप से यह भोग चढ़ाने से जीवन में स्थिरता आती है और बाधाओं में कमी देखने को मिलती है. ऐसे में बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को गुड़ चने भोग लगाकर प्रार्थना करना चाहिए.

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2.नारियल अर्पित करने से क्या होता है

 

इस दिन को लेकर मानता है कि साबुत नारियल पर सिंदूर लगाकर और कलावा बांधकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक परेशानियों से राहत मिलती है. इस उपाय को करने से घर में सुख-समृद्धि और धन संबंधी समस्याओं में सुधार आता हैं.

 

3.पान का बीड़ा चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को पान का बीड़ा अर्पित करना खास तौर पर उन लोगों द्वारा किया जाता है. जिनके काम अटक रहे होते हैं. पूजा के बाद पान चढ़ाकर कार्य सिद्धि की कामना की जाती है. इससे कठिन और रुके हुए कार्यों में गति आने लगती है और हनुमान जी से प्रार्थना की जाती है कि आप मेरा इस कष्ट या पीड़ा को हारने का बीड़ा आपको मैं सोचता हूं.

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4.इमरती और लड्डू चढ़ाने से क्या होता है

 

हनुमान जी को इमरती और बूंदी के लड्डू अत्यंत प्रिय है. इनका भोग लगाने से भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति की कामना करते हैं. यह प्रसाद चढ़ाने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में खुशहाली का वातावरण बनता है.

 

5.केसर भात अर्पित करने से क्या होता है

 

केसर भात का भोग हनुमान जी को अर्पित करने से कुंडली के दोषों को शांत करने का प्रयास किया जाता है. यह भोग विशेष रूप से बड़े मंगल के दिन किया जाता है. इससे जीवन में आने वाले संकटों का प्रभाव कम होता है और मानसिक शांति मिलती है. इससे हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है.

 

 

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