Viral News
Chandra Grahan 2024 In India: इस एक राशि पर चंद्र ग्रहण का पूरे महीने रहेगा असर, रहें सावधान

Chandra Grahan 2024: 18 सितंबर यानी आज साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगा है. आज ही पितृपक्ष का पहला श्राद्ध भी किया जा रहा है. धार्मिक नजरिए से चंद्र ग्रहण की घटना को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है.
चंद्र ग्रहण के अशुभ साए में शुभ व मांगिलक कार्य करने से बचना चाहिए. यह चंद्र ग्रहण मीन राशि और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में लगने वाला है. ज्योतिषविदों की मानें तो इस चंद्र ग्रहण का असर एक राशि पर पूरे महीने रहेगा. आइए जानते हैं कि चंद्र ग्रहण का किस राशि पर इसका प्रभाव एक महीने तक रहने वाला है.
भारतीय समयानुसार, साल का आखिरी चंद्र ग्रहण 18 सितंबर दिन बुधवार को सुबह 06.12 बजे से लेकर सुबह 10.17 बजे तक रहने वाला है. चंद्र ग्रहण की अवधि 05 घंटे 04 मिनट की होगी. इस दौरान सुबह 08.14 बजे चंद्र ग्रहण अपने पीक पर होगा.
चूंकि यह चंद्र ग्रहण मीन राशि में लग रहा है, इसलिए इस राशि पर ही इसका असर सबसे ज्यादा रहने वाला है. दरअसल, चंद्रमा अपना राशिचक्र 27 दिन 6 घंटे में पूरा करता है. इसलिए चंद्र ग्रहण जिस राशि में लगता है, उस पर ग्रहण का प्रभाव करीब एक महीने तक बना रहता है.
सामान्य जीवन
घर में दुख-दरिद्रता की दस्तक हो सकती है. दांपत्य जीवन में कड़वाहट पैदा हो सकती है. पति-पत्नी के बीच अनबन हो सकती है. गृह क्लेश की प्रबल संभावनाएं हैं. दोस्तों, रिश्तेदारों और सहकर्मियों से अनबन हो सकती है.
धन
चंद्र ग्रहण लगने के बाद मीन राशि के जातकों को आर्थिक मोर्चे पर हानि हो सकती है. आय के स्रोत प्रभावित हो सकते हैं. खर्चों में बढ़ोतरी हो सकती है. व्यापारी वर्ग के लोगों के घाटा झेलना पड़ सकता है. मुनाफे में कमी आ सकती है. कारोबार में मुनाफा कमाने के लिए बहुत अधिक प्रयत्न करने होंगे. शिक्षा या कॉम्पिटीशन एग्जाम की तैयारी में जुटे लोगों की एकाग्रता भंग हो सकती है.
करियर
मीन राशि वालों के नौकरी-व्यापार पर भी चंद्र ग्रहण का प्रतिकूल प्रभाव देखने को मिल सकता है. रोजगार से जुड़ीं समस्याएं उत्पन्न होंगी. नई नौकरी तलाशने में जल्दबाजी न दिखाएं. प्रमोशन-इन्क्रीमेंट के मामलों में विलंब हो सकता है.
सेहत
मीन राशि के लोगों का स्वास्थ्य गड़बड़ हो सकता है. रोग-बीमारियां मुश्किल बढ़ाएंगी. कोई पुराना रोग उभर सकता है. रोग-बीमारियों पर खर्चे भी बढ़ सकते हैं. घर में माता-पिता या बुजुर्गों की सेहत का विशेष ख्याल रखना होगा.
चंद्र ग्रहण के प्रभाव से कैसे बचें?
- चंद्र ग्रहण के दौरान भगवान विष्णु और महामृत्यंजय मंत्र का जाप करें.
- ग्रहण के बाद स्नान करें और घर में गंगाजल का छिड़काव करें.
- ग्रहण के बाद पूजा-पाठ करें और आर्थिक स्थिति के मुताबिक दान करें.
- ग्रहण के बाद अपने गुरु या शिव जी की पूजा करें.
- किसी निर्धन व्यक्ति को सफेद वस्तु का दान करें.
blog
Bilaspur के नामी LCIT Group of Institutions का छात्रों के साथ भयानक फर्जीवाड़ा : वादे बड़े-बड़े, हकीकत पानी-पानी!

बिलासपुर: LCIT Group of Institutions – Bilaspur, जो हर साल एडमिशन के दौरान बड़े-बड़े वादे और लुभावने दावे करता है, उसकी सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। दावा किया जाता है कि यहां आधुनिक लैब्स, अनुभवी फैकल्टी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा — लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
बारिश आई, लैब्स ने छलनी बनकर स्वागत किया!
हमें मिले वीडियो में कॉलेज की लैब्स से टपकती छतें साफ़ दिखाई दे रही हैं। जहां स्टूडेंट्स को मशीनों के साथ प्रैक्टिकल करना चाहिए था, वहां अब पानी से बचने के लिए प्लास्टिक की बाल्टियाँ रखी जा रही हैं। सवाल ये उठता है कि जब प्रयोगशालाएं ही सुरक्षित नहीं, तो शिक्षा कितनी सुरक्षित होगी?

फैकल्टी? बस कागज़ों पर!
सूत्रों के अनुसार, यहां कई फैकल्टी सदस्य केवल ऑन पेपर मौजूद हैं। यानी नाम तो है, पर काम में कहीं नजर नहीं आते। छात्रों का कहना है कि कई विषयों की क्लास ही नियमित नहीं होती।
इंजीनियरिंग प्रिंसिपल भी सिर्फ नाम के!
कहा जा रहा है कि इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रिंसिपल भी फुल टाइम नहीं है, बल्कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए कागजों पर मौजूद हैं। यह छात्रों के भविष्य के साथ खुला मज़ाक है।

स्टाफ की नियुक्ति पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि अधिकांश स्टाफ या तो यहीं के पुराने छात्र हैं या फिर अन्य कॉलेज से किसी वजह से हटाए गए लोग हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
🎙 बिलासपुर के इस संस्थान की मार्केटिंग चमचमाती है, लेकिन हकीकत में ढहती छतें, दिखावटी स्टाफ और खोखले दावे छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ज़रूरत है कि शिक्षा को सिर्फ व्यापार न बनाकर, जिम्मेदारी समझा जाए
Viral News
165 किलोमीटर की रफ्तार से टकराया तूफान… सेंट्रल अमेरिका में सारा ने मचाई ऐसी तबाही, लोग करने लगे त्राहिमाम

नई दिल्ली. ट्रॉपिकल स्टॉर्म सारा ने हाल के दिनों में मध्य अमेरिका में भारी तबाही मचाई है. यह तूफान गुरुवार दोपहर को कैरेबियन सागर में बना था. यह अटलांटिक तूफान मौसम का 18वां तूफान है और इस महीने का तीसरा.
इस मौसम में इतने सारे उष्णकटिबंधीय तूफान (ट्रॉपिकल स्टॉर्म) और चक्रवात बनने का कारण कैरेबियन सागर और मैक्सिको की खाड़ी का औसत से अधिक गर्म होना है, जिससे इन सिस्टम के डेवलपमेंट और तेजी को अधिक एनर्जी मिलती है.
अपने बनने के बाद से, सारा समुद्री तूफान ने होंडुरास, कोस्टा रिका, निकारागुआ, बेलीज और ग्वाटेमाला को बुरी तरह से प्रभावित किया है, जिससे भारी बारिश, बड़े पैमाने पर बाढ़ और लैंडस्लाइड हुआ है. तूफान की धीमी गति ने नुकसान को और बढ़ा दिया है, जिससे इसका असर लंबे समय तक बना रह सकता है. हालांकि, सारा की ताकत कम हो रही है; गुरुवार को इसकी स्थायी हवाएं 45 मील प्रति घंटे की थीं, लेकिन अंदरूनी इलाकों में जाने के बाद यह थोड़ी कमजोर हो गई, और रविवार तक हवाएं 40 मील प्रति घंटे की रह गईं.
राष्ट्रीय तूफान केंद्र के अनुसार, सारा के सोमवार को युकाटन प्रायद्वीप के दक्षिणी क्षेत्र की ओर उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ते हुए निम्न दबाव के क्षेत्र में बदलने की उम्मीद है. 15 नवंबर की रात से लगातार बारिश हो रही है और 16 नवंबर को भी सैन पेड्रो सुला शहर में यह बारिश जारी रही, जहां तूफान की वजह से एक नदी का पुल बह गया, जिससे एक पूरे समुदाय का संपर्क मुख्य शहर से कट गया. मियामी स्थित नेशनल हरिकेन सेंटर के अनुसार, इस वीकेंड में इस क्षेत्र में जानलेवा फ्लैश फ्लडिंग और लैंडस्लाइड हो सकता है.
वेदर सिस्टम ने 14 नवंबर देर रात होंडुरास-निकारागुआ सीमा पर काबो ग्रासियस ए डिओस से लगभग 105 मील (165 किलोमीटर) पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में लैंडफॉल किया था. हरिकेन सेंटर ने उम्मीद जताई कि तूफान शनिवार और रविवार को “थोड़ी तेज गति से पश्चिम-उत्तर-पश्चिम की ओर” बढ़ते हुए होंडुरास की खाड़ी में प्रवेश करेगा और फिर बेलीज में लैंडफॉल करेगा.
Viral News
टीचिंग छोड़ शुरू किया खाना बनाना, आज हैं देश की सबसे अमीर महिला यूट्यूबर, हर दिन की कमाई लाखों में

नई दिल्ली. निशा मधुलिका का नाम आज भारतीय डिजिटल मीडिया में प्रेरणादायक कहानियों में सबसे आगे है. एक समय में शिक्षिका रहीं निशा ने यूट्यूब की दुनिया में “Nisha Madhulika” चैनल के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है.
उत्तर प्रदेश में एक साधारण परिवार में जन्मी निशा मधुलिका ने अपने जीवन की शुरुआत शिक्षिका के रूप में की थी और अपने पति एम.एस. गुप्ता के साथ उनके व्यापार में भी सहयोग किया. बाद में वह अपने पति के साथ नोएडा शिफ्ट हो गईं और यहीं से उनके यूट्यूब करियर की शुरुआत हुई.
निशा ने 2009 में अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया, जिसमें वह सरल और पारंपरिक भारतीय शाकाहारी रेसिपी बनाती हैं. हिंदी भाषा में वीडियो बनाकर उन्होंने देश-विदेश में लाखों दर्शकों को अपने चैनल से जोड़ा है. आज उनके चैनल पर 14.5 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं और उन्होंने 2,300 से अधिक वीडियो पोस्ट किए हैं. सरल भाषा और आसान विधियों से खाना बनाना सिखाने के कारण उनके वीडियो हर आयु वर्ग के लोगों में लोकप्रिय हैं. उनके वीडियो में स्नैक्स से लेकर मिठाई और रोजमर्रा के खाने तक की रेसिपीज़ शामिल हैं, जो आसानी से उपलब्ध सामग्री का उपयोग करके बनती हैं.
सबसे अमीर महिला यूट्यूबर
निशा मधुलिका के चैनल को भारत में सबसे बड़े यूट्यूब फूड चैनलों में से एक माना जाता है. उनकी नेट वर्थ लगभग 43 करोड़ रुपये आंकी गई है, और वह हर महीने लाखों रुपये कमा रही हैं. निशा को 2017 में सोशल मीडिया समिट एंड अवॉर्ड्स में टॉप यूट्यूब कुकिंग कंटेंट क्रिएटर के खिताब से सम्मानित किया गया था, जो उनके योगदान और सफलता को दर्शाता है. कुछ खबरों के अनुसार, वह देश की सबसे अमीर महिला यूट्यूबर भी हैं.
दर्शकों से जुड़ाव जरूरी
उनका कहना है कि यूट्यूब पर सफल होने के लिए नियमितता और अपने दर्शकों के साथ जुड़ाव बनाए रखना जरूरी है. उनका यह विश्वास कि “हर घर में स्वाद और आनंद लाने” का उनका मिशन, उन्हें आगे बढ़ाता है. निशा मधुलिका का यह सफर केवल एक चैनल या बिजनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन महिलाओं के लिए भी प्रेरणा है, जो अपने पैशन को फॉलो कर यूट्यूब जैसी डिजिटल माध्यमों में पहचान बनाना चाहती हैं. निशा का यूट्यूब चैनल केवल रेसिपी सिखाने का प्लेटफॉर्म नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच बन चुका है जहाँ लोग उनकी सादगी और सरलता के कारण जुड़ते हैं.




















