छत्तीसगढ़
अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस 2022: छत्तीसगढ़ में दिव्यांगजन के सशक्तिकरण को किया जा रहा प्रोत्साहित

अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 3 दिसंबर के अवसर पर नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया के मुख्य आतिथ्य और समाज कल्याण मंत्री अनिला भेंड़िया की अध्यक्षता में समाज कल्याण विभाग द्वारा राजधानी रायपुर स्थित जोरा ग्राउंड में अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस समारोह 2022 का आयोजन किया गया।

समारोह में अतिथियों ने उत्कृष्ट कार्य के लिए 8 विभिन्न श्रेणियों में दिव्यांगजन राज्य स्तरीय पुरस्कार दिए और 20 दिव्यांगजनों को अत्याधुनिक कृत्रिम बायोनिक हाथ, कृत्रिम पैर निःशुल्क प्रदान किए गए। निःशक्तजन के कल्याण हेतु उत्कृष्ट कार्य के लिए सर्वाेत्तम जिला श्रेणी में दुर्ग जिले को राज्य स्तरीय पुरस्कार 2022 से सम्मानित किया गया। समारोह में दुर्ग कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने शील्ड, प्रमाण पत्र, प्रशस्ति पत्र प्राप्त किया। अतिथियों ने बुजुर्गजन, दिव्यांगजन एवं उभयलिंगी समुदाय के लिए हेल्पलाईन सेंटर का शुभारंभ एवं लोकार्पण किया। कार्यक्रम में दिव्यांगजनों की डोर-टू-डोर सर्वेक्षण की अंतरिम डाटा संकलन पुस्तिका का विमोचन किया गया। इस अवसर पर संसदीय सचिव अम्बिका सिंहदेव, छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा, रायपुर महापौर एजाज ढेबर, जिला पंचायत अध्यक्ष डोमेश्वरी वर्मा, समाज कल्याण विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संचालक रमेश कुमार वर्मा, विभागीय अधिकारी कर्मचारी सहित दिव्यांगजन और उनके परिजन उपस्थित थे।

नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ. डहरिया ने कहा कि दिव्यांगता की चुनौतियों से निपटने के उपाय और समाज के लिए दिव्यांगों का और दिव्यांगों के लिए समाज का योगदान क्या हो इस पर हमें गौर करने की जरूरत है। राज्य सरकार द्वारा दिव्यांगों के सशक्तिकरण को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक सशक्तिकरण के छोटे-छोटे कामों से दिव्यांगों के लिए बड़ा काम कर सकते हैं।

समाज कल्याण मंत्री भेंडिया ने अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांग दिवस की बधाई देते हुए कहा कि हर दिव्यांग के सुख-दुख में राज्य सरकार साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मार्गदर्शन में दिव्यांगजन के लिए कई काम किये जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में दिव्यांगों के लिए नौकरी में 7 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। साथ ही राज्य में नौकरी में बड़ी संख्या में दिव्यांगों को भी रखा गया है, जिसकी सराहना केंद्र ने भी की है।
इस अवसर पर अतिथियों ने दिव्यांग बच्चों द्वारा तैयार पेंटिंग, कलात्मक वस्तुओं और सजावटी सामानों का भी अवलोकन किया गया। कार्यक्रम में दिव्यांग बच्चों ने रंगा-रंग कार्यक्रम की प्रस्तुति दी, जिसे देख दर्शक दीर्घा में मौजूद दिव्यांगजन अति प्रसन्न हुए। बैंगलोर से आए डॉ. पाशा गुरूजी की टीम ने व्हीलचेयर पर शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुति दी। इस नृत्य की खास बात यह है कि इसके नर्तक मूकबधिर थे, परन्तु संगीत की धुन पर उन्होंने आकर्षक प्रस्तुति दी।
प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर दिव्यांग कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली संस्था और जिले और सर्वाेत्तम दिव्यांग कर्मचारियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाता है। इस साल सर्वाेत्तम दिव्यांग कर्मचारी के दृष्टि बाधित श्रेणी में जांजगीर-चांपा जिले के कमलेश कुमार साहू, श्रवण बाधित श्रेणी में बिलासपुर जिले के राजकुमार वर्मा, अस्थि बाधित श्रेणी में बेमेतरा जिले के रामकुमार सोनकर को पुरस्कृत किया गया।
सर्वाेत्तम स्वैच्छिक संस्था के लिए दृष्टि बाधित श्रेणी में महासमुंद जिले के फॉर्चून फाउंडेशन प्रेतेनडीह, श्रवण बाधित संवर्ग के लिए रायपुर जिले के प्रज्ञा कर्ण बधिर शाला एवं छात्रावास को अस्थि बाधित श्रेणी के लिए कांकेर जिले के ग्रीनबुक एजुकेशन एंड एनवायरमेंट वेलफेयर सोसायटी और प्रमस्तिक अंगाघात/बहु विकलांग गृह की श्रेणी में कोरबा जिले के अंकुर संस्था को दिव्यांगजन राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
छत्तीसगढ़
केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…
बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.
ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.
इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.
जा सकती थी नवजात शिशु की जान
डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,
सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.
परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद
शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.
पहली बार आया अनोखा केस
सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.
छत्तीसगढ़
साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र
छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।
महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार
इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
कैरियर
कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा
Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।
शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।
बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।
लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार
इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।
बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट
पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।
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