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छत्तीसगढ़

बिलासपुर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में हो रही खानापूर्ति……. यूटिलाइजेशन, एनुअल मेंटेनेंस वर्क को भी स्मार्ट सिटी के मद में किया जा रहा है खर्च : अमर अग्रवाल

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दीर्घकालिक नियोजन और तात्कालिक आवश्यकताओ की पूर्ति में असफल रहा स्थानीय तंत्र…स्मार्ट शहरों की रैंकिंग में पिछडा बिलासपुर- अमर अग्रवाल

समन्वित और समयबद्ध प्रयासों के अभाव में पूरी स्मार्ट सिटी के लिए कवायद नाकाफी….न जाने कब बनेगा स्मार्ट बिलासपुर?- अमर अग्रवाल

बिलासपुर| प्रदेश के पूर्व नगरीय प्रशासन और वाणिज्य कर मंत्री श्री अमर अग्रवाल ने बिलासपुर स्मार्ट सिटी के कार्य की जा रही कवायद को नाकाफी बताते हुए जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जून 2017 में उनके नगरीय प्रशासन मंत्री के कार्यकाल में माननीय मोदी द्वारा देश मे 100 स्मार्ट शहरों की घोषणा में रायपुर के साथ बिलासपुर को स्मार्ट सिटी घोषित किया गया। प्रत्येक बिलासपुर वासी के लिए यह घोषणा गौरव की बात थी।स्मार्ट सिटी परियोजना के वित्तीय पोषण हेतु केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा 5 वर्षों तक 100 -100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया। 1100 करोड़ रुपए चौदहवें वित्त आयोग तथा केंद्र सरकार की हाउसिंग फॉर ऑल सहित अन्य योजनाओं से एवं शेष राशि का इंतजाम शेष राशि निगम को अपने संसाधनों से और पीपीपी मॉडल किया जाना तय हुआ।श्री अमर अग्रवाल ने कहा एक विकसित, समृद्ध स्मार्ट सिटी के लिए जरूरी है कि अपने हर एक नागरिक को जीवन जीने की मूलभूत सुविधाएं मिले।

बिजली, पानी सड़क ,पेयजल आपूर्ति, घर साथ बेहतर पर्यावरण और परिवेश एवं प्रौद्योगिकी आधारित अधोसंरचना का विकास, नगरीयता के विस्तार तथा तदअनुरूप सुपरिभाषित सामाजिक संरचना हो।श्री अग्रवाल ने बताया केंद्र सरकार ने जीवन जीवन यापन और रहने के लिहाज से कुछ वर्षों पहले बिलासपुर को देश के चुनिंदा 111 शहरों में 13वां सबसे बढ़िया शहर घोषित किया था।उपलब्ध सुविधाओं और दीर्घकालिक नियोजन की दृष्टि से बिलासपुर देश के अग्रणी व्यवस्थित शहरों में जाना जाता रहा है, यहां का शांतिप्रिय माहौल एवं बेहतर परिवेश अन्य शहरों से अलग पहचान देता है।राज्य निर्माण के विगत दो दशकों की विकास यात्रा में बिलासपुर के समग्र विकास की परिकल्पना को प्रतिबद्ध प्रयासों के साथ नगर वासियों ने बढ़ते महानगर के आकार लेते देखा है। स्मार्ट सिटी के रूप में घोषित बिलासपुर शहर नवीन आधारभूत अवसंरचना संरचना के लिहाज कीर्तिमान रचने को तत्पर रहा है।जून 2017 में ही स्मार्ट शहरों की घोषणा के एक सप्ताह के अंतर्गत की एसपीवी बनाकर बिलासपुर की स्मार्ट सिटी हेतु केंद्र सरकार ने 114 करोड़ रुपये जारी भी कर दिए।

स्मार्ट सिटी के सुचारू क्रियांवन्यन के लिए नगर निगम से अलग कंपनी बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड बनाई गईं। इसके चेयरमैन नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव होते है जबकि कामकाज कंपनी के सीईओ नगर निगम आयुक्त, इनके अलावा कलेक्टर, एसपी, सीईओ चिप्स, केंद्र के प्रतिनिधि मेयर सहित 10 सदस्य शामिल है। बिलासपुर में स्मार्ट सिटी अन्तर्गत स्तरीय सुविधाएं और सेवाएं देने के लिए कुल खर्च 4000 करोड़ खर्च का आकलन किया गया।

4 हजार करोड़ खर्च प्रस्ताव

कार्य                      राशि करोड़ रुपए में

  • कुल लागत            3966 करोड़
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर   -1047.59 करोड़
  • पेयजल सप्लाई  -103,34 करोड़
  • हाउसिंग प्लॉन   -19.28 करोड़
  • उत्थान के कार्यक्रम            662.61 करोड़
  • स्वास्थ्य –     25.6 करोड़
  • ग्रीन बेल्ट विकास -84.43 करोड़
  • कामर्शियल काम्पलेक्स, मार्केट –       1283.79 करोड़़
  • परिवहन व्यवस्था              634.87 करोड़
  • इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम   –   209.50 करोड़
  • बिलासपुर सिटी आपरेशन सिस्टम      – 94 करोड़
  • एकीकरण हेतु – 13.7करोड़
  • बने बिलासपुर 

हेतु         – 26.54करोड़    

प्रथम चरण में 20 वार्ड शामिल-अमर अग्रवाल ने बताया ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट द्वारा तैयार रूपरेखा अनुसार स्मार्ट सिर्टी के लिए पुराने के निगमसीमा अंतर्गत शहर के मध्य क्षेत्र के 20 वार्ड शामिल होंने है। जिसकी सीमाएं रायपुर बिलासपुर रोड से शुरू होकर महाराणा प्रताप चौक, मंदिर चौक, राजेंद्र नगर, नेहरू चौक, देवकीनंदन चौक, सिम्स चौक, कोतवाली चौक, हनुमान मंदिर चौक गांधी चौक, रविदास नगर चौक, शिव टॉकीज चौक, टिकरापारा चौक, वीआर प्लाजा चौक, व्यापार विहार चौक से एवं महाराणा प्रताप नगर चौक तक होंगी। क्रियान्वयन के सोपान में इसे विस्तार किया जाएगा।उन्होंने कहा स्मार्ट सिटी बिलासपुर का मूल प्रोजेक्ट दो विशेषज्ञ कंसलटेंट द्वारा तैयार किया जाना तय किया गया। पहला कंसलटेंट अपनी टीम के साथ शहर के भौगोलिक क्षेत्रफल (इंफ्रास्ट्रक्चर) के हिसाब से योजना तैयार करने का कार्य करेगा एवं दूसरा आईटी विशेषज्ञ बतौर सेवाएं देगा।

स्मार्ट सिटी हेतु स्मार्ट समाधान-के लिये प्रोजेक्ट अंतर्गत तात्कालिक जरूरतों और दीर्घकालिक नियोजन की दृष्टि से स्थानीय क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति प्रदान करने के लिए ई-गवर्नेस और नागरिक सेवाएँ के लिए  सार्वजनिक सूचनाएँ एवं शिकायत निवारण तंत्र, इलेक्ट्रॉनिक सेवा वितरण, वीडियो अपराध निगरानी तंत्र का विकास।अपशिष्ट प्रबंधन, अपशिष्ट का ऊर्जा में रूपांतरण, अपशिष्ट जल प्रबंधन तथा अपशिष्ट से कंपोस्ट बनाना।जल प्रबंधन के तहत आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली जैसे आधुनिक मीटर लगाना, जल गुणवत्ता की जाँच,ऊर्जा प्रबंधन हेतु आधुनिक ऊर्जा प्रबंधन, स्मार्ट मीटर, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत का प्रयोग, ऊर्जा दक्ष ग्रीन भवन।शहरी गतिशीलता के लिए स्मार्ट पार्किंग, इंटेलिजेंट यातायात प्रबंधन, एकीकृत मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट का विकास।टेली मेडिसीन एवं शिक्षा, व्यापार सुविधा केंद्र, कौशल केंद्रों की स्थापना के प्रस्तावों को क्रमिक लक्ष्य स्वीकारा गया है।श्री अग्रवाल ने बताया बिलासपुर स्मार्ट सिटी अंतर्गत आरंभिक प्रस्तावों में आधुनिक कमर्शियल काम्प्लेक्स, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना,व्यापार विहार में सड़क व नाली समेत अन्य निर्माण कार्यों के लिए 26 करोड़ रुपए, नेहरू चौक से मंगला चौक तक 8 करोड़ में सौंदर्यिकरण, तालापारा व जतिया तालाब में करोड़ों की लागत से सौंदर्यिकरण के कार्यों समेत शहर में चौक चौराहों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना बनाई थी।वहीं स्मार्ट सिटी में शामिल बड़े प्रोजेक्ट में 40-40 करोड़ की लागत से बृतहस्पति बाजार और पुराना बस स्टैण्ड में मल्टीलेवल कमर्शियल काम्प्लेक्स बनाने की योजना थी।मिशन स्मार्ट सिटी के तय प्रस्तावो में नूतन नगरीय अवसंरचना को स्वरूप देने हेतु शहर बिजली अंडर ग्राउंड की जानी थी, चौबीसों घंटे पेयजल सप्लाई सुविधा , सौर ऊर्जा से बिजली उत्पादन, सीवेज और बरसाती पानी का पुर्न:चक्रण करने का प्रावधान ,घर घर में शौचालय के साथ विश्व स्तरीय सार्वजनिक प्रसाधन की सुविधा तथा शतप्रतिशत प्रतिशत कचरे का वैज्ञानिक विधि से निबटान,रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, तालाबों को जीर्णोद्धार तथा हरित क्षेत्र विकास,सूचना प्रौद्योगिकी की आम जन में पहुंच के लिए सुदृढ़ अधोसंरचना का विकास , नगरीय सेवाओं का कंप्यूटरीकरण ,पैदल यात्रियों एवं दिव्यांग जन के लिए विशेष सुविधायुक्त मार्गों का विकास ,प्रदूषण मुक्त शहरी यातायात के लिए पैदल मार्ग, साइकिलिंग और ई रिक्शा आदि के माध्यम से आवागमन ,विश्व स्तरीय स्वचलित शहरी यातायात प्रणाली एवं आधुनिक पार्किंग क्षेत्र का निर्माण, खुले क्षेत्र, खेल मैदान, तालाबों आदि का सौंदर्यीकरण, उपयोग एवं रखरखाव सुनिश्चित करने प्रणाली विकसित किया जाना,बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों की विशेष सुरक्षा के साथ आमजनों की सुरक्षा की विशेष व्यवस्था,नागरिक परामर्श, सिटीजन लोगो तथा सिटी ब्रांडिंग से युक्त अतिरिक्त स्मार्ट सुविधाओं का विकास ,प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवासनिर्माण ,नए जनताशौचालय ,सामुदायिक भवन ,फुट ओवर ब्रिज एवं फ्लाईओवर ब्रिज का निर्माण, 7 किलोमीटर का बिलासा पथ निर्माण, बायोमेथेनईजेशन , बायो गैस प्लांट की ईकाई लगाना,सरकारी विभागों की समन्वित ऐप सेवा, जिसमें सिटी बस की टाइमिंग से लेकर प्रापर्टी टैक्स तथा आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र सुविधा प्रदायता आदि अनेको लक्ष्य तय किए गए कितुं आज 4 वर्षों बाद भी उक्त सुविधाएं कागजों में सीमित है। निगम अब तक पहली किस्त का 70% खर्च नहीं कर पाया,दुसरीं ओर मौजूदा हालात यह हैं कि सुविधाओं के मामले में बिलासपुर पिछड़ता नजर आ रहा है। स्मार्ट सिटी के तहत संचालित प्रोजेक्ट आधे अधूरे हैं जो प्राथमिकता में थे,उसे छोड़कर अन्य कार्य जोड़ दिए गए है।

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सत्ता पक्ष के नेता कोरोना से काम बंद होने का बहाना बना रहे है जबकि देश के अन्य शहरों में कोरोना के बावजूद स्मार्ट सिटी का काम नियमित ढंग से बहुत तेजी से चल रहा है । निगम के परंपरागत कार्यकरण से पृथक स्मार्ट परिणामों के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड का गठन कर दक्ष टीम से शुरुआत की गई थी लेकिन कालांतर में दागी और रिटायर हो गए अफसरों को स्मार्ट सिटी लिमिटेड में भर्ती कर आरामगाह बना दिया गया है।स्मार्ट सिटी के नाम पर करोड़ों रुपए मिले मगर फिर भी न्यायधानी के साथ अन्याय को लेकर बेबसी और लाचारी जुड़ती गई।4000 करोड़ रु की योजना के तहत स्मार्ट सिटी अंतर्गत नागरिकों को स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना तय किया गया लेकिन सुविधाओं के मामले में केवल कागजी घोड़े दौड़ रहे है।

प्रोजेक्ट क्रियान्वयन में खानापूर्ति-श्री अग्रवाल का मानना है स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में किए जाने वाले पूर्व प्रस्तावित बड़े निर्माण कार्यों दरकिनार कर दिया गया है। प्रोजेक्ट में नए कामों को शामिल कर काम के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। अग्रवाल ने कहा कि ढाई वर्षो शासनकाल में कांग्रेस की सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा जारी परियोजनाओं के संचालन में कोई रुचि नहीं ली ।स्मार्ट सिटी हेतु केंद्र से जारी राशि को भी फिजूल- खर्ची में व्यय किया जा रहा है। केवल यूटिलाइजेशन भेजकर अगली किस्त प्राप्त करने के लिए मनोरंजन और सौंदर्यीकरण के कार्यों में राशि खर्च की जा रही है।उन्होंने कहा कि शहरी विकास मंत्रालय द्वारा स्मार्ट सिटी में चल रहे निर्माण कार्यों और सुविधाओं की रैंकिंग में बिलासपुर का नाम पहले 50 शहरों से कोसों दूर है। प्रोजेक्ट के तहत सबसे पहले जनता की सुविधा से जुड़े निर्माण और विकास कार्यों को प्राथमिकता नही देने से बिलासपुर की रैंकिंग तय नही हो पा रही है।रैंकिंग में पीछे होना बिलासपुर की जनता की आशाओं के विपरीत है। लोग जब मुझे मिलते हैं तो पूछते हैं कि आखिर बिलासपुर कब स्मार्ट बनेगा? अमर अग्रवाल ने कहा तय प्रस्तावो का समयबद्ध क्रियान्वयन करा लिया जाता तो स्मार्ट अर्बन ट्रैफिक सिस्टम, मल्टीप्लेक्स पार्किंग व कॉम्लेक्स, आधुनिक संचार और प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएं और सुविधाएं, बेहतर कचरा प्रबंधन और अपशिष्ट नियोजन का विकसित तंत्र शुरू हो जाने से आदि अनेकों समस्याओं से छुटकारा मिल गया होता।अनेकों प्रस्ताव पर चार वर्षों बाद भी काम शुरू नही हुआ है। उन्होंने कहा शहर की मूलभूत समस्या पार्किंग व्यवस्था और कमर्शियल काम्प्लेक्स को पूरा करने का काम पहले शुरू करना था, ताकि समय पर निर्माण पूरा होने से शहर वासियों को सुविधा मिल सके, लेकिन इस ओर ने ध्यान नहीं दिया गया ।अरपा उत्थान और तट संवर्धन का कार्य स्मार्ट सिटी की राशि से करने के पूर्व केंद्र से अनुमति नही ली गई है। श्री अमर अग्रवाल ने कहा कि इंदिरा सेतु से शनिचरी रपटा तक सड़क बनाने के लिए स्मार्ट सिटी लिमिटेड के द्वारा ठेका दिया गया। बिना तैयार ड्राइंग डिजाइन के काम कराया जा रहा है,मद परिवर्तन पर केंद्र से अनुमति के नाम पर क्रियान्वयन एजेसी चूप्पी साध लेती है,अनुमति के प्रत्याशा में सारे मनमाने निर्णय कर लिए जाते है।पूर्व प्रस्तावों में अरपा नदी के सम्बंध में एक सड़क को छोड़कर अन्य कोई प्रस्ताव शामिल नहीं थे।श्री अमर अग्रवाल ने स्मार्ट सिटी के नाम पर केंद्र की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है।हर शहरवासी चाहता है कि उसका नगर तरक्की के सोपनक्रम में आगे बढे कितुं छत्तीसगढ़ की सरकार का ध्यान नगरीय अधोसंरचना के विकास व विस्तार की ओर नहीं है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित स्मार्ट सिटी के लिए राज्याश नही दिया जाता है एव केंद्र से प्राप्त राशि को राज्य की क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा समय पर से किस्तों के समय पर भुगतान नही होने की समस्या हर साल आ खड़ी होती। स्मार्ट सिटी के लिए नगरीय सुविधाओं के विस्तार हेतु किए गए दर्जनों प्रस्ताव केवल कागजों में दम तोड़ रहे हैं, सड़क चौड़ीकरण,पेंटिंग एनुअल मेंटेन्स वर्क को भी स्मार्ट सिटी के मद में खर्च किया जा रहा है जिससे किसी तरह 70% यूटिलाइजेशन भेज कर आने वाले साल के लिए करोड़ों रुपए की किस्त केंद्र सरकार से ले ली जाए और पुनः साल भर खानापूर्ति करके स्मार्ट सिटी के नाम केंद्र की राशि की बंदरबांट होती रहे।

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राज्य की आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल योजना में स्कूलों का स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मद से लेकिन जिक्र केवल राज्य का
पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल का कहना है कि दरअसल जनहित की योजनाओं और केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट को समय पर लागू करने के लिए राज्य सरकार बिल्कुल भी ईमानदार नहीं है।स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मद से शहर के मंगला हायर सेकेंडरी स्कूल,तारबाहर हायर सेकेंडरी, लाला लाजपत राय स्कूल तीन शालाओं का उन्नयन कराया जा रहा है। प्रत्येक शाला में 65 से 80 लाख का जीर्णोद्धार एवं उन्नयन के लिए की राशि खर्च की गई है और राज्य की सरकार आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल को स्वयं की उप्लब्धि बताया जा रहा लेकिन केंद्र सरकार द्वारा जारी स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा खर्च की गई राशि का कहीं भी उल्लेख नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा स्कूलों का उन्नयन अपनी जगह है किन्तु स्मार्ट सिटी मद से किये गए कार्य का उल्लेख होना चाहिए। श्री अग्रवाल का कहना है कि स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा जारी किए गए टेंडरों की सूची अगर आप देखेंगे तो पाएंगे कि अधिकतर कार्य जनता की मूलभूत सुविधाओं को छोड़कर सौंदर्यीकरण, सड़क चौड़ीकरण संबंधित है।बिलासपुर क्लब के जिम के उन्नयन के लिए स्मार्ट सिटी के स्मार्ट सिटी से निविदा बुलाई गई है। पहले से तय किये मूलभूत उद्देश्य एवं परियोजनाओं पर फोकस करने के बजाए स्मार्ट सिटी के नाम पर टेंडर लगाकर राशि की बंदरबांट की जा रही है।

फ्री वाई-फाई की स्मार्ट सुविधा हाई-फाई- उद्घाटन के बाद ठप्प पड़ी-
अग्रवाल का कहना है कि
नेहरू चौक,स्वामी विवेकानंद उद्यान रिवर व्यू रोड,मैग्नेटो मॉल के पास, श्रीकांत वर्मा मार्ग, ‎ ‎पं.दीनदयाल उपाध्याय उद्यान,व्यापार विहार पुलिस ग्राउंड सहित कुल दस स्थानो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बिलासपुर स्मार्ट सिटीलिमिटेड द्वारा शहरवासियों को फ्री वाई-फाई (Free Wi-Fi Facility)की हाई फाई सौगात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के हाथों उदघाटन कराया गया लेकिन शायद ही किसी दिन एक साथ 10 स्थानों पर वाई फाई सुविधा शुरू हुई हो। इस वाईफाई के हाई-फाई उद्घाटन में स्मार्ट सिटी के मद से लाखों रुपए की राशि खर्चा हो गई, 30 जून से 2019 से शुरू फ्री वाई फाई के सीएम के द्वारा शुभारंभ दिवस अधिकारियों के हाई-फाई दावो में बंद पड़ी हुई है।

अग्रवाल ने कहा भू माफियाओ की शरण स्थली बन चुके बिलासपुर शहर में
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट बढ़ती हुई शहरी आबादी के भौतिक, संस्थागत, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे के व्यापक विकास की आवश्यकता है। विकास एवं प्रगति के एक गुणी चक्र की स्थापना में स्मार्ट सिटी का विकास इसी दिशा में एक कदम है।भारत सरकार द्वारा एक अभिनव और नई पहल है कितुं समन्वित और समयबद्ध प्रयासों के अभाव में पूरी कवायद नाकाफी साबित हो रही है जिससे बिलासपुर स्मार्ट सिटी के भविष्य पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।इस हेतु दीर्घकालिक आयोजना के तात्कालिक जरूरतों की आपूर्ति, पारदर्शी प्रशासन, सतत मॉनिटरिंग के साथ सुविधाओं और चुनाव के समय बद्ध उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण कारक है। श्री अग्रवाल ने जारी बयान में कहा कि फोटो खिंचाकर बयानबाजी की नेतागिरी करने वाले वाले नेताओं से अनुरोध है कि शहर विकास की परियोजनाओं को लेकर पुराने प्रश्नों को लेकर उनके मन में जो भी शंका, कुशंका है उसका जवाब समय के साथ मिल जाएगा, निश्चिंत रहे, धैर्य रखे लेकिन विकास की दृष्टि से जन आकांक्षाओं पर खरे उतरना शासन का दायित्व है इस हेतु राजनैतिक महत्वाकांक्षाओं को किनारे रखकर कार्य करना चाहिए।

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छत्तीसगढ़

केले के पत्तों पर 25 दिनों तक रखकर किया गया नवजात शिशु का इलाज, जानिए किस दुर्लभ बीमारी से था ग्रसित…

बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

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बीजापुर। बीजापुर जिला अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु को 25 दिनों तक केले के स्टरलाइज पत्तों में रखकर सफलतापूर्वक उपचार किया गया.

ग्राम कोरसागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल को गंभीर अवस्था में बीजापुर हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था. जाँच उपरांत शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है. यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है.

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की. उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं. शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया.

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इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे. साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके.

जा सकती थी नवजात शिशु की जान

डॉ. नेहा चव्हाण ने लल्लूराम डॉट कॉम से बात करते हुए कहा कि नवजात शिशु का यह बेहद ही रियर केस था. इसमें शरीर का ऊपरी चमड़ी का इंपैक्सन रहता है, संक्रमण बहुत ज्यादा रहता है. और इसकी वजह से शिशु को जान खतरे में जा सकती हैं, इसको डॉक्टर को टाइम से दिखाना रहता है, तभी उसका इलाज संभव हो पाता है,

सही समय पर बच्चे को हमारे पास लाया गया. उसको तुरंत हमने एंटीबायोटिक का थेरेपी लगाकर इलाज शुरू किया. इस बीमारी में केले के पत्ते में रखना और ड्रेसिंग करना होता है, वही हमने किया. पूरी तरह से हाइजीनिक इलाज किया, और अब बच्चा पूरी तरह से स्वास्थ्य हैं.

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परिजनों ने दिया दिल से धन्यवाद

शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया. उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया.

पहली बार आया अनोखा केस

सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर ने लल्लूराम से कहा कि मैं डॉ. नेहा चव्हाण और उनकी टीम को बधाई देती हूं. इस तरह का केस हमारे हॉस्पिटल में पहली बार आया था, और हमारे डॉक्टरों की टीम ने सही तरीके इलाज कर एक नवजात शिशु को को नई जिंदगी दी है. अगर इस तरह ग्रामीण स्तर पर कोई भी केस आए तो निश्चित ही जिला हॉस्पिटल का लाभ लें.

 

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छत्तीसगढ़

साय कैबिनेट की बैठक कल, विधानसभा के विशेष सत्र समेत अन्य मुद्दों पर हो सकती है चर्चा

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक , 29 अप्रैल को सुबह 11:30 बजे नवा रायपुर अटल नगर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित होगी। बताया जा रहा है कि इस बैठक में विधानसभा के विशेष सत्र समेत कई मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

30 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र

छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र 30 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में विधानसभा सचिवालय ने आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इसमें बताया गया है कि छठवीं विधानसभा का नवम सत्र 30 अप्रैल को आयोजित होगा। इस सत्र में कुल एक ही बैठक होगी, जिसमें शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे।

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महिला आरक्षण पर सियासी घमासान के आसार

इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा महिला आरक्षण को लेकर संभावित सियासी टकराव माना जा रहा है। सत्ता पक्ष भाजपा इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका को लेकर सदन में निंदा प्रस्ताव ला सकती है। वहीं कांग्रेस इस विषय पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

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कैरियर

कल आएंगे 10वीं-12वीं बोर्ड के रिजल्ट, शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की घोषणा

Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

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Chhattisgarh Board Result : सत्या राजपूत,रायपुर। छत्तीसगढ़ में 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल बुधवार को जारी होगा। इसकी घोषणा शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने की है। बता दें कि 29 या 30 अप्रैल को 10वीं-12वीं के रिजल्ट आने की खबर प्रकाशित की थी, जिस पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मुहर लगा दी है।

शिक्षा मंत्री यादव ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि इंतजार की घड़ियां अब समाप्ति की ओर है। बुधवार दोपहर 2:30 बजे माध्यमिक शिक्षा मंडल के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम औपचारिक रूप से घोषित किए जाएंगे। यह केवल अंकों की घोषणा नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, अनुशासन और अभिभावकों व शिक्षकों के सतत मार्गदर्शन का प्रतिफल है। इस अवसर पर सभी विद्यार्थियों को धैर्य बनाए रखने, परिणाम को सकारात्मक दृष्टिकोण से स्वीकार करने और भविष्य की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की शुभकामनाएं। प्रत्येक परिणाम एक नई शुरुआत का संकेत है और हर विद्यार्थी में आगे बढ़ने की अपार संभावनाएं निहित हैं।

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बता दें कि बोर्ड परीक्षाएं 20 और 21 फरवरी से शुरू हुई थीं, जो 18 मार्च तक चलीं। पहले बोर्ड ने 15 अप्रैल तक परिणाम जारी करने की योजना बनाई थी। हिंदी पेपर लीक होने का मामला सामने आने के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा आयोजित करनी पड़ी थी, जिसके कारण रिजल्ट में देरी हुई।

लाखों छात्र कर रहे रिजल्ट का इंतजार

इस वर्ष हाईस्कूल (कक्षा 10वीं) परीक्षा में कुल 3,20,535 विद्यार्थी पंजीकृत थे, जबकि हायर सेकेंडरी (कक्षा 12वीं) में 2,45,785 छात्रों ने परीक्षा दी है। बड़ी संख्या में विद्यार्थी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के लिए रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

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बेहतर रहा थापिछले साल का रिजल्ट

पिछले वर्ष 7 मई 2025 को बोर्ड ने परीक्षा परिणाम घोषित किया था। उस समय कक्षा 10वीं में 68.76% विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए थे, जबकि कक्षा 12वीं का रिजल्ट 82.25% रहा था। अब सभी की नजरें बोर्ड की आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं, जिससे छात्रों और अभिभावकों का इंतजार खत्म हो सके।

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