शिक्षा
Health Tips : क्या आंखों को देखने से भी हो जाता है आई फ्लू? जानिए कंजक्टिवाइटिस के कुछ आम मिथक
Eye Flu Myths vs Facts: कंजंक्टिवाइटिस या पिंक आई एक एनुअल फ्लू है, जो हर साल मानसून में देखने को मिलता है। इसकी वजह से आंखों में जलन, रेडनेस, दर्द और सूजन होती है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक माइल्ड इन्फेक्शन है, जो अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन यह अत्यधिक संक्रामक होता है और आसानी से फैल सकता है। हालांकि, आज ही कंजंक्टिवाइटिस से जुड़े कई मिथक हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। आज इस आर्टिकल में आई फ्लू से जुड़े इन्हीं मिथकों के बारे में जानेंगे।
मिथकः क्या सिर्फ आंखों में देखने से हो जाता है कंजक्टिवाइटिस?
फैक्टः यह आई फ्लू से जुड़ा एक सबसे आम मिथक है। आपने अक्सर लोगों से सुना होगा कि संक्रमित व्यक्ति की आंख में देखने मात्र से आपको कंजक्टिवाइटिस हो सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह से गलत है, क्योंकि कंजक्टिवाइटिस केवल संक्रमित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाले तरल के सीधे संपर्क से फैलता है।
मिथकः क्या केवल बच्चों की ही आई फ्लू होता है?
फैक्टः नहीं, यह पूरी तरह सच नहीं है। हालांकि, कंजक्टिवाइटिस के मामले बच्चों में ज्यादा देखने को मिलते हैं, लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि यह सिर्फ बच्चों का संक्रमण है। आई फ्लू किसी भी उम्र के व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकता है।
मिथकः अगर आप अपनी आंखें नहीं रगड़ेंगे, तो आई फ्लू नहीं होगा।
फैक्टः गंदे हाथों से अपनी आंखों को छूना सिर्फ एक तरीका है, जिससे आपको कंजक्टिवाइटिस हो सकता है। ऐसे में अगर आप गंदे हाथों से आंखों की नहीं छूएंगे, तब भी अन्य कारणों से आई फ्लू की चपेट में आ सकते हैं। किसी भी दूषित वस्तु या पदार्थ के संपर्क में आने से आंखें संक्रमित हो जाती हैं, जैसे अनुचित तरीके से साफ किए गए कॉन्टैक्ट लेंस, मेकअप, या यहां तक कि आई-ड्रॉप डिस्पेंसर की नोक, जिसका उपयोग कंजक्टिवाइटिस वाली आंख पर किया गया था।
मिथकः कंजंक्टिवाइटिस का कोई इलाज नहीं है?
फैक्टः स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कंजक्टिवाइटिस एक माइल्ड इन्फेक्शन है, जो अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि, कुछ आई ड्रॉप जैसे उपचार मौजूद हैं, जो असुविधा, सूखापन और सूजन को कम कर सकते हैं। पिंक आई अपने आप ठीक हो जाती हैं।
मिथकः अगर आपकी आंखें लाल हैं, तो यह कंजंक्टिवाइटिस ही है।
फैक्टः लाल या ब्लडशॉट आंखें कंजक्टिवाइटिस के अलावा कई चीजों का संकेत हो सकती हैं। एलर्जी, ड्राई आई सिंड्रोम और जलन पैदा करने वाले तत्व आंख के सफेद हिस्से के लाल होने का कारण बन सकते हैं। आंखों की लाली के पीछे कंजंक्टिवाइटिस के अलावा और भी गंभीर कारण हो सकते हैं।
Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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बिलासपुर को मिली नई सौगात
बिलासपुर। क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। Chouksey Group of Colleges के अंतर्गत नया Chouksey College of Ayurved Research Center & Hospital अब राष्ट्रीय आयुर्वेद आयोग (NCISM), नई दिल्ली से संबद्ध हो गया है।
यह उपलब्धि बिलासपुर के लिए गौरव की बात है, क्योंकि अब जिले को अपना पहला और एकमात्र निजी बीएएमएस (BAMS) कॉलेज मिल गया है।
कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि इस वर्ष होने वाली काउंसलिंग में चौकसे आयुर्वेद कॉलेज में NEET 2025 के आधार पर प्रवेश (Admission) दिए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेद शिक्षा एवं आधुनिक सुविधाओं से युक्त प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।
ज्ञात रहे कि इस वर्ष Chouksey Group के इंजीनियरिंग कॉलेज में बिलासपुर संभाग में सर्वाधिक प्रवेश (Admissions) हुए हैं। साथ ही डिग्री पाठ्यक्रमों जैसे B.Com, Law, BBA, BCA, PGDCA की सभी सीटें भी पूर्ण रूप से भर गई हैं। यह विद्यार्थियों के बीच चौकसे ग्रुप की बढ़ती लोकप्रियता और विश्वास को दर्शाता है।

चौकसे ग्रुप ऑफ कॉलेजेस के प्रबंध निदेशक डॉ. आशीष जायसवाल ने कहा —
“हमारा संकल्प विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। बिलासपुर में पहला निजी बीएएमएस कॉलेज खुलना न केवल विद्यार्थियों बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। हमें विश्वास है कि यह कॉलेज आयुर्वेद शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा।”
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Bilaspur के नामी LCIT Group of Institutions का छात्रों के साथ भयानक फर्जीवाड़ा : वादे बड़े-बड़े, हकीकत पानी-पानी!
बिलासपुर: LCIT Group of Institutions – Bilaspur, जो हर साल एडमिशन के दौरान बड़े-बड़े वादे और लुभावने दावे करता है, उसकी सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आने लगी है। दावा किया जाता है कि यहां आधुनिक लैब्स, अनुभवी फैकल्टी और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा — लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
बारिश आई, लैब्स ने छलनी बनकर स्वागत किया!
हमें मिले वीडियो में कॉलेज की लैब्स से टपकती छतें साफ़ दिखाई दे रही हैं। जहां स्टूडेंट्स को मशीनों के साथ प्रैक्टिकल करना चाहिए था, वहां अब पानी से बचने के लिए प्लास्टिक की बाल्टियाँ रखी जा रही हैं। सवाल ये उठता है कि जब प्रयोगशालाएं ही सुरक्षित नहीं, तो शिक्षा कितनी सुरक्षित होगी?

फैकल्टी? बस कागज़ों पर!
सूत्रों के अनुसार, यहां कई फैकल्टी सदस्य केवल ऑन पेपर मौजूद हैं। यानी नाम तो है, पर काम में कहीं नजर नहीं आते। छात्रों का कहना है कि कई विषयों की क्लास ही नियमित नहीं होती।
इंजीनियरिंग प्रिंसिपल भी सिर्फ नाम के!
कहा जा रहा है कि इंजीनियरिंग कॉलेज का प्रिंसिपल भी फुल टाइम नहीं है, बल्कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए कागजों पर मौजूद हैं। यह छात्रों के भविष्य के साथ खुला मज़ाक है।

स्टाफ की नियुक्ति पर भी सवाल
बताया जा रहा है कि अधिकांश स्टाफ या तो यहीं के पुराने छात्र हैं या फिर अन्य कॉलेज से किसी वजह से हटाए गए लोग हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाता है।
🎙 बिलासपुर के इस संस्थान की मार्केटिंग चमचमाती है, लेकिन हकीकत में ढहती छतें, दिखावटी स्टाफ और खोखले दावे छात्रों के सपनों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। ज़रूरत है कि शिक्षा को सिर्फ व्यापार न बनाकर, जिम्मेदारी समझा जाए
कोरबा
ई.वी.पी.जी. कॉलेज कोरबा में जनभागीदारी शिक्षक नियुक्ति की मांग पर भूगोल विभाग के छात्रों का आवेदन

कोरबा जिले के प्रतिष्ठित ई.वी.पी.जी. कॉलेज में भूगोल विभाग के विद्यार्थियों ने शिक्षक नियुक्ति और शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए प्राचार्या के समक्ष आवेदन दिया है। छात्रों का कहना है कि विभाग में केवल दो शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, जिनमें एक विभागाध्यक्ष और एक अतिथि शिक्षिका नियुक्त हैं। पहले, विभाग में जनभागीदारी शुल्क के माध्यम से एक जनभागीदारी शिक्षक भी नियुक्त किया जाता था, जिससे शैक्षणिक जरूरतें पूरी होती थीं।
हालांकि, नए प्राचार्या के आने के बाद से इस व्यवस्था में अनियमितता देखी जा रही है, और सत्र 2024-25 में अभी तक किसी भी जनभागीदारी शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है, जिससे शिक्षण का स्तर प्रभावित हो रहा है। 5 नवंबर 2024 को भूगोल विभाग के छात्रों ने प्राचार्या से 7 दिनों के भीतर जनभागीदारी शिक्षक की नियुक्ति का आग्रह किया और किसी अड़चन के लिए उचित दस्तावेज प्रस्तुत करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि यदि नियुक्ति में कोई समस्या है, तो वे इसे रायपुर उच्च शिक्षा आयुक्त के पास ले जाकर समाधान मांग सकते हैं।
विद्यार्थियों ने पूर्व में भी विभागाध्यक्ष के माध्यम से प्राचार्या से अनुरोध किया था, लेकिन उस पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए। छात्रों का कहना है कि जनभागीदारी शिक्षक की अनुपस्थिति से शैक्षिक गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, इसलिए उन्होंने अब यह कदम उठाया है।
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