छत्तीसगढ़
नो-शो प्रवृत्ति कम करने के लिए भारतीय रेलवे ने अग्रिम आरक्षण अवधि 120 दिनों से घटाकर 60 दिन की, 1 नवंबर 2024 से लागू

वास्तविक यात्रियों को बढ़ावा देने और बढ़ते नो-शो प्रवृत्ति को कम करने के लिए, भारतीय रेलवे ने 120 दिनों की वर्तमान अग्रिम आरक्षण अवधि को 60 दिनों तक घटाया, जो 01.11.2024 से प्रभावी होगा।
यह परिवर्तन रेलवे को वास्तविक यात्रा मांग की बेहतर जानकारी देगा, जिससे विशेष ट्रेनों की पहले से योजना बनाने में मदद मिलेगी।
17 अक्टूबर 2024 भारतीय रेलवे ने वर्तमान 120 दिनों की अग्रिम आरक्षण अवधि (ARP) को घटाकर 60 दिन कर दिया है, जो 01.11.2024 से प्रभावी होगा, यात्रा की तिथि को छोड़कर। इस परिवर्तन की घोषणा रेल मंत्रालय ने भारतीय यात्रियों के लिए की, ताकि वास्तविक यात्रियों को प्रोत्साहित किया जा सके। यह निर्णय रेलवे बोर्ड को भारत में रेल यात्रा की वास्तविक मांग की बेहतर जानकारी प्रदान करने में मदद करेगा। देखा जा रहा था कि 61 से 120 दिन की अवधि में की गई लगभग 21 प्रतिशत आरक्षण रद्द हो रहे थे। इसके अलावा, 5 प्रतिशत यात्री अपने टिकट रद्द नहीं कर रहे थे और न ही यात्रा कर रहे थे। यह नो-शो प्रवृत्ति भी इस निर्णय के पीछे एक प्रमुख कारण थी, जो भारतीय रेलवे को पीक सीजन के दौरान विशेष ट्रेनों की बेहतर योजना बनाने में मदद करेगी।
इस निर्णय का उद्देश्य वास्तविक यात्रियों के लिए टिकट की उपलब्धता में सुधार करना और रद्दीकरण और नो-शो की घटनाओं को कम करना है, जो आरक्षित बर्थ की बर्बादी का कारण बनती हैं। उभरते हुए आरक्षण रुझानों और यात्रा की अनिश्चितता के आधार पर, भारतीय रेलवे समय-समय पर अपनी अग्रिम आरक्षण अवधि नीति में बदलाव करता रहता है। ताज एक्सप्रेस, गोमती एक्सप्रेस आदि जैसी कुछ दिन के समय चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेनों के मामले में कोई बदलाव नहीं होगा, जहां अग्रिम आरक्षण के लिए कम समय सीमा लागू है । विदेशी पर्यटकों के लिए 365 दिनों की सीमा के मामले में भी कोई बदलाव नहीं होगा । 31 अक्टूबर 2024 से पहले 120-दिन अग्रिम आरक्षण अवधि के तहत किए गए सभी मौजूदा बुकिंग वैध रहेंगी। 60 दिनों की नई अग्रिम आरक्षण अवधि से आगे की गई आरक्षण अभी भी रद्दीकरण के लिए पात्र होंगे।
छोटी अग्रिम आरक्षण अवधि के साथ, यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाओं में बेहतर स्पष्टता मिलेगी, जिससे वर्तमान 21% रद्दीकरण दर में कमी आएगी। अग्रिम आरक्षण अवधि की इस महत्वपूर्ण नीति का अंतिम बार संशोधन 1 जनवरी 2015 को 60 दिनों से 120 दिनों तक किया गया था। अतीत में, 1 सितंबर 1995 से 31 जनवरी 1998 के दौरान, यह अवधि 30 दिनों तक कम थी।
नई नीति का उद्देश्य उन यात्रियों से निपटना है, जो बिना टिकट रद्द किए यात्रा नहीं करते, जिससे धोखाधड़ी और गलत पहचान की संभावना बढ़ जाती है। भारतीय रेलवे सभी यात्रियों से इस बदलाव से अवगत रहने और सुचारू यात्रा योजना सुनिश्चित करने के लिए संशोधित अग्रिम आरक्षण अवधि के भीतर जल्दी बुकिंग करने का आग्रह करता है। 60-दिन की बुकिंग विंडो टिकटों की जमाखोरी की संभावना को कम करने में मदद करेगी, जिससे वास्तविक यात्रियों के लिए अधिक टिकट उपलब्ध होंगे।
news
CG Weather Update: छत्तीसगढ़ में अगले 5 दिन भारी बारिश का अलर्ट; आंधी-तूफान के साथ गिर सकती है बिजली

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मानसून का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है। मौसम विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 5 दिनों तक तेज आंधी-तूफान, गरज-चमक के साथ भारी बारिश और वज्रपात (आकाशीय बिजली) की चेतावनी जारी की है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार अब तेज हो रही है। अगले 3 से 4 दिनों के भीतर मानसून मध्य अरब सागर, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, ओडिशा, झारखंड और बिहार के बचे हुए हिस्सों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों में दस्तक दे सकता है। बीते गुरुवार की रात राजधानी रायपुर समेत कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत दी है।
इस वजह से हुई मानसून में देरी
सामान्य तौर पर छत्तीसगढ़ में मानसून 13 जून के आसपास प्रवेश कर जाता है, लेकिन इस बार मानसूनी गतिविधियां कमजोर पड़ने के कारण इसकी रफ्तार धीमी हो गई थी। हालांकि, अब मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम वर्षा दर्ज की गई है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक:
सर्वाधिक तापमान: गुरुवार को रायपुर में सबसे ज्यादा $38.5^\circ\text{C}$ तापमान दर्ज किया गया।
न्यूनतम तापमान: दुर्ग में सबसे कम $24.2^\circ\text{C}$ तापमान रिकॉर्ड किया गया।
इन जिलों में दर्ज की गई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:
दुर्ग: सबसे ज्यादा 3 सेमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
जशपुर: 2 सेमी बारिश दर्ज हुई।
मनोरा (जशपुर): 1 सेमी बारिश।
केल्हारी (मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर – MCB): 1 सेमी बारिश।
वाड्रफनगर (बलरामपुर): 1 सेमी बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग की चेतावनी: 50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
मौसम विभाग ने आज के लिए विशेष अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। इसके साथ ही 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ (हवाएं) चलने की भी चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें और पेड़ों या बिजली के खंभों के नीचे शरण न लें।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
news
छत्तीसगढ़ में खाद संकट और सुशासन पर सवाल, पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने सरकार को घेरा

छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री Shiv Dahariya ने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और सरकार किसानों से धान खरीदी को लेकर गंभीर नहीं है, जिससे किसान और आम जनता दोनों परेशान हैं। डहरिया ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में सुशासन पूरी तरह खत्म हो चुका है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।
पूर्व मंत्री ने राज्य में प्रशासनिक अराजकता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, अधिकारी जनता की समस्याओं के समाधान में रुचि नहीं दिखा रहे हैं और विपक्ष की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में प्रशासनिक आतंकवाद जैसा माहौल बन गया है, जिससे आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिव डहरिया ने यह भी कहा कि सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं को भी निशाना बनाकर काम किया जा रहा है। उनके मुताबिक, सरकार के भीतर ही असंतोष का माहौल है और राजनीतिक आधार पर फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों की समस्याओं, खाद उपलब्धता और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की।
खाद की कमी और धान खरीदी पर हमला: पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने आरोप लगाया है कि प्रदेश में खाद की भारी कमी है और वर्तमान सरकार किसानों से धान नहीं खरीदना चाहती है, जिससे किसान और आम जनता बेहद परेशान हैं
सुशासन का अभाव: उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सुशासन नाम की कोई चीज़ नहीं रह गई है। उनके अनुसार आदरणीय मुख्यमंत्री और उनकी सरकार पूरी तरह से फेल हो चुकी है
नेताओं को टारगेट करने का आरोप: डहरिया ने यह भी दावा किया कि सत्ता पक्ष के ही कुछ नेताओं को टारगेट करके काम किया जा रहा है





















