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यूपी उपचुनाव: 2027 से पहले सेमीफाइनल की जंग, 9 सीटों पर कांटे की टक्कर

Uttar Pradesh By-Election: झारखंड विधानसभा चुनाव के दूसरे सत्र और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के साथ-साथ बुधवार को उत्तर प्रदेश में नौ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने हैं। इन सीटों पर बीजेपी और एसपी आमने-सामने हैं, जिसे लोकसभा चुनावों के बाद पहली चुनावी लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है।
जबकि कांग्रेस उपचुनाव नहीं लड़ रही है और अपने इंडिया गठबंधन साथी समाजवादी पार्टी का समर्थन कर रही है। बहुजन समाज पार्टी सभी नौ सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ रही है।
असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली AIMIM ने गाजियाबाद, कुंदरकी और मीरापुर सीटों से अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने सिसामऊ को छोड़कर सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। उपचुनाव में कुल 90 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें गाजियाबाद विधानसभा क्षेत्र से सबसे अधिक 14 उम्मीदवार हैं, जबकि खैर (एससी) और सिसामऊ विधानसभा क्षेत्रों से प्रत्येक में न्यूनतम पांच उम्मीदवार हैं।
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हालांकि उपचुनाव के नतीजों का 403 सदस्यीय यूपी विधान सभा पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह विभिन्न राजनीतिक दलों को एक संदेश देगा। जहां एसपी सदन में अपनी संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी और उसकी सहयोगी आरएलडी विधानसभा में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की कोशिश करेंगे।
किसके पास कितने विधायक?
वर्तमान में, बीजेपी के पास विधानसभा में 251 विधायक हैं, इसके बाद एसपी के पास 105 विधायक हैं। बीजेपी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) के पास 13 विधायक हैं, आरएलडी के पास 8 विधायक हैं, एसबीएसपी के पास 6 विधायक हैं और निषाद पार्टी के पास 5 विधायक हैं। कांग्रेस और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के पास दो-दो विधायक हैं, जबकि बसपा के पास एक विधायक है।
यह लोकसभा चुनावों के बाद राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में इंडिया ब्लॉक और एनडीए की पहली चुनावी परीक्षा होगी। मतदान से पहले, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को मतदाताओं से अपनी पार्टी के लिए वोट करने की अपील की। वहीं, यूपी बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने मंगलवार को समाजवादी पार्टी पर तंज कसते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी उपचुनाव हारने से डर रही है। अखिलेश यादव हार का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़कर जिम्मेदारी से बचना चाहते हैं।”
कैसे खाली हुए यूपी के 9 विधानसभा सीट?
उपचुनाव 20 नवंबर को अंबेडकर नगर के कटेहरी, मैनपुरी के करहल, मुजफ्फरनगर के मीरापुर, गाजियाबाद, मिर्जापुर के मझवां, कानपुर शहर के सिसामऊ, अलीगढ़ के खैर, प्रयागराज के फूलपुर और मुरादाबाद के कुंदरकी में होंगे। परिणाम 23 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इनमें से आठ विधानसभा क्षेत्रों की सीटें तब खाली हुईं जब वर्तमान विधायक लोकसभा के लिए चुने गए थे, जबकि सिसामऊ का उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि वर्तमान एसपी विधायक इरफान सोलंकी को एक आपराधिक मामले में दोषी ठहराया गया था।
2022 विधानसभा चुनावों में सिसामऊ, कटेहरी, करहल और कुंदरकी पर एसपी का कब्जा था, जबकि बीजेपी ने फूलपुर, गाजियाबाद, मझवां और खैर जीते थे। मीरापुर सीट राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने जीती थी, जो अब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में बीजेपी का सहयोगी है।
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।






















