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69वें फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए एनिमल ने हासिल किए 19 नामांकन शाहरुख भी किसी से पीछे नहीं

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे पुराने फिल्म पुरस्कारों में से एक फिल्मफेयर अवॉर्ड्स इस साल 27 और 28 जनवरी को अपने 69वें संस्करण के साथ वापसी के लिए तैयार है। यह समारोह गुजरात के गांधीनगर में होगा।
फिल्मफेयर पुरस्कारों के लिए नामांकन की घोषणा सोमवार (16 जनवरी) को की गई, जिसमें रणबीर कपूर अभिनीत फिल्म एनिमल ने 19 नामांकन हासिल करने में कामयाबी पाई। वहीं, शाहरुख खान इस साल जवान और डंकी में अपने अभिनय के लिए दो सर्वश्रेष्ठ अभिनेता नामांकन में शामिल होने में सफल रहे। कम बजट में बनी फिल्म ’12वीं फेल’ को भी फिल्मफेयर पुरस्कार 2024 की प्रमुख श्रेणियों में कई नामांकन के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
फिल्म निर्माता और निर्देशक करण जौहर तीन साल बाद इस अवॉर्ड शो को होस्ट करने जा रहे हैं। दो दिवसीय पुरस्कार समारोह में अभिनेता रणबीर कपूर, करीना कपूर खान, कार्तिक आर्यन, सारा अली खान, वरुण धवन और जान्हवी कपूर अपनी परफॉर्मेंस से चार चांद लगाएंगे। आइए लिस्ट के जरिए जानते हैं कि किसे किस श्रेणी में नामांकन हासिल करने में कामयाबी हासिल हुई…
सर्वश्रेष्ठ फिल्म (नामांकन)
12वीं फेल
एनिमल
जवान
ओएमजी 2
पठान
रॉकी और रानी की प्रेम कहानी
सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (नामांकन)
अमित राय (ओएमजी 2)
एटली (जवान)
करण जौहर (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
संदीप रेड्डी वांगा (एनिमल)
सिद्धार्थ आनंद (पठान)
विधु विनोद चोपड़ा (12वीं फेल)
सर्वश्रेष्ठ फिल्म (क्रिटिक्स) (नामांकन)
12वीं फेल (विधु विनोद चोपड़ा)
भीड़(अनुभव सिन्हा)
फराज (हंसल मेहता)
जोराम (देवाशीष मखीजा)
सैम बहादुर (मेघना गुलजार)
थ्री ऑफ अस (अविनाश अरुण धावरे)
ज्विगाटो (नंदिता दास)
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता लीड रोल (पुरुष) (नामांकन)
रणबीर कपूर (एनिमल)
रणवीर सिंह (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
शाहरुख खान (डंकी)
शाहरुख खान (जवान)
सनी देओल (गदर 2)
विक्की कौशल (सैम बहादुर)
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (क्रिटिक्स) (नामांकन)
अभिषेक बच्चन (घूमर)
जयदीप अहलावत (थ्री ऑफ अस)
मनोज बाजपेयी (जोराम)
पंकज त्रिपाठी (ओएमजी 2)
राजकुमार राव (भीड़)
विक्की कौशल (सैम बहादुर)
विक्रांत मैसी (12वीं फेल)
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री लीड रोल (नामांकन)
आलिया भट्ट (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
भूमि पेडनेकर (थैंक यू फॉर कमिंग)
दीपिका पादुकोण (पठान)
कियारा आडवाणी (सत्यप्रेम की कथा)
रानी मुखर्जी (मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे)
तापसी पन्नू (डंकी)
सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री (क्रिटिक्स) (नामांकन)
दीप्ति नवल (गोल्डफिश)
फातिमा सना शेख (धक धक)
रानी मुखर्जी (मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे)
सैयामी खेर (घूमर)
शहाना गोस्वामी (ज्विगाटो)
शेफाली शाह (थ्री ऑफ अस)
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (पुरुष) (नामांकन)
आदित्य रावल (फराज)
अनिल कपूर (एनिमल)
बॉबी देओल (एनिमल)
इमरान हाशमी (टाइगर 3)
तोता रॉय चौधरी (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
विक्की कौशल (डंकी)
सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री (नामांकन)
जया बच्चन (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
रत्ना पाठक शाह (धक धक)
शबाना आजमी (घूमर)
शबाना आजमी (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
तृप्ति डिमरी (एनिमल)
यामी गौतम (ओएमजी 2)
सर्वश्रेष्ठ गीत (नामांकन)
अमिताभ भट्टाचार्य (तेरे वास्ते-जरा हटके जरा बचके)
अमिताभ भट्टाचार्य (तुम क्या मिले- रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
गुलजार (इतनी सी बात- सैम बहादुर)
जावेद अख्तर (निकले थे कभी हम घर से- डंकी)
कुमार (चालेया-जवान)
सिद्धार्थ- गरिमा (सतरंगा- एनिमल)
स्वानंद किरकिरे और आईपी सिंह (लुट्ट पुट गया- डंकी)
सर्वश्रेष्ठ संगीत एलबम (नामांकन)
एनिमल (प्रीतम, विशाल मिश्रा, मनन भारद्वाज, श्रेयस पुराणिक, जानी, भूपिंदर बब्बल, आशिम केम्सन, हर्षवर्द्धन रामेश्वर, गुरिंदर सीगल)
डंकी (प्रीतम)
जवान (अनिरुद्ध रविचंदर)
पठान (विशाल और शेखर)
रॉकी और रानी की प्रेम कहानी (प्रीतम)
तू झूठी मैं मक्कार (प्रीतम)
जरा हटके जरा बचके (सचिन-जिगर)
सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक (पुरुष) (नामांकन)
अरिजीत सिंह (लुट्ट पुट गया- डंकी)
अरिजीत सिंह (सतरंगा- एनिमल)
भूपिंदर बब्बल (अर्जन वैली- एनिमल)
शाहिद माल्या (कुदमयी- रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
सोनू निगम (निकले थे कभी हम घर से- डंकी)
वरुण जैन, सचिन- जिगर, शादाब फरीदी, अल्तमश फरीदी (तेरे वास्ते फलक- जरा हटके जरा बचके)
सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका (नामांकन)
दीप्ति सुरेश (अरारारी रारो- जवान)
जोनिता गांधी (हे फिकर- 8 एएम मेट्रो)
शिल्पा राव (बेशरम रंग-पठान)
शिल्पा राव (चलेया-जवान)
श्रेया घोषाल (तुम क्या मिले-रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
श्रेया घोषाल (वे कमलेया- रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
सर्वश्रेष्ठ कहानी (नामांकन)
अमित राय (ओएमजी 2)
अनुभव सिन्हा (भीड़)
एटली (जवान)
देवाशीष मखीजा (जोराम)
इशिता मोइत्रा, शशांक खेतान और सुमित रॉय (रॉकी और रानी की प्रेम कहानी)
करण श्रीकांत शर्मा (सत्यप्रेम की कथा)
पारिजात जोशी और तरूण डुडेजा (धक धक)
देश
‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना
छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।
सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज
केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:
“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम
आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”
‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’
दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।
छत्तीसगढ़
कम लागत, ज़्यादा मुनाफ़ा: छत्तीसगढ़ में नैनो उर्वरक लिख रहे हैं किसानों की समृद्धि की नई इबारत

रायपुर: छत्तीसगढ़ की सुशासन सरकार किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती से जोड़कर उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। इसी कड़ी में राज्य सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र में नैनो उर्वरकों (नैनो यूरिया और नैनो डीएपी) के उपयोग और उपलब्धता को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और किसान-हितैषी नीतियों के माध्यम से खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
- कम लागत में बेहतर उत्पादन का बेहतरीन विकल्प
पारंपरिक खाद के मुकाबले नैनो यूरिया और नैनो डीएपी किसानों के लिए बेहद किफायती और असरदार साबित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, नैनो उर्वरकों के उपयोग से न केवल फसलों का उत्पादन बेहतर होता है, बल्कि किसानों की जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम होता है।
- बचेंगे पैसे, घटेगी मेहनत
नैनो उर्वरकों की सबसे बड़ी खासियत इनकी सुगमता है। जहां पहले भारी-भरकम खाद की बोरियों को लाने-ले जाने और भंडारण (Storage) में काफी दिक्कतें आती थीं, वहीं अब नैनो तकनीक के कारण:
परिवहन (Transportation) का खर्च बेहद कम हो गया है।
भंडारण की समस्या से मुक्ति मिली है।
खेतों में छिड़काव के लिए लगने वाली मजदूरी की लागत में भारी कमी आई है।
“सुशासन सरकार का संकल्प”
सरकार का मुख्य उद्देश्य आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुँचाना है, ताकि लागत कम हो और मुनाफा ज़्यादा। आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर छत्तीसगढ़ के किसान अब समृद्धि और आत्मनिर्भरता की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।
देश
पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।
- महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।
- पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल
पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
- ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।
- संगठन और रणनीति का मिला लाभ
बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।





















