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राजनीति

Haryana Chunav Result 2024: लाडवा से नायब सिंह सैनी की जीत, दोबारा बनेंगे हरियाणा के CM!

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Haryana Chunav Result 2024: हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक बार फिर से सत्ता में वापसी की है। लाडवा विधानसभा सीट से नायब सिंह सैनी ने बड़ी जीत हासिल की है और सियासी गलियारों में खबर है कि राज्य के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं।

भाजपा ने चुनाव से कुछ महीने पहले एक अहम कदम उठाते हुए मनोहर लाल खट्टर की जगह नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी थी, और अब इस दांव ने पार्टी को शानदार जीत दिलाई है।

मार्च 2024 में, मनोहर लाल खट्टर के साढ़े नौ साल के कार्यकाल के बाद, पार्टी ने सत्ता विरोधी लहर का सामना करते हुए नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाया। यह कदम पार्टी की ओबीसी और गैर-जाट समुदाय पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा था। सैनी को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद पार्टी ने लगातार विपक्षी हमलों का सामना किया, जिनमें बेरोजगारी, महंगाई, अग्निपथ योजना और किसानों के मुद्दे प्रमुख थे।

हालांकि, सैनी के नेतृत्व में पार्टी ने तुरंत काम करना शुरू किया। उन्होंने हरियाणा ‘अग्निवीर नीति 2024’ को मंजूरी दी, जिससे राज्य के युवाओं को सशस्त्र बलों में सेवा के बाद रोजगार और उद्यमिता के अवसर मिल सकें। इसके साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 10 और फसलों को खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई, जिससे हरियाणा अब 24 फसलों को MSP पर खरीदने वाला एकमात्र राज्य बन गया।

भाजपा के चुनावी वादे

भाजपा ने अपने चुनाव घोषणापत्र में कई लोकलुभावन वादे किए, जिनमें ‘हर घर ग्रहणी योजना’ के तहत 500 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराना, महिलाओं को 2,100 रुपये मासिक वित्तीय सहायता और युवाओं के लिए दो लाख सरकारी नौकरियां देने का वादा शामिल था। इसके अलावा, हरियाणा के अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी।

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सैनी की जीत और भविष्य की रणनीति

चुनाव आयोग के अनुसार, नायब सिंह सैनी ने लाडवा विधानसभा सीट से अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी, कांग्रेस के मेवा सिंह, को 16,054 मतों के अंतर से हराया। यह अंतर काफी बड़ा रहा। भाजपा ने चुनाव से पहले स्पष्ट कर दिया था कि अगर पार्टी सत्ता में वापसी करती है, तो नायब सिंह सैनी ही मुख्यमंत्री बनेंगे। हालांकि, वरिष्ठ नेता अनिल विज ने भी अपनी दावेदारी पेश की थी, लेकिन सैनी की नेतृत्व क्षमता और ओबीसी समुदाय के समर्थन ने उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बना दिया।

सैनी के सीएम बनने से ओबीसी समुदाय और गैर-जाट वोटर्स में भाजपा की पकड़ और मजबूत हुई। इस कदम ने राज्य में जातिगत समीकरणों को भाजपा के पक्ष में झुका दिया, जिससे पार्टी को निर्णायक बढ़त मिली।

कैसा है सैनी का सियासी सफर?

25 जनवरी 1970 को अंबाला के मिर्जापुर माजरा गांव में जन्मे सैनी 2014 से 2019 के बीच खट्टर कैबिनेट में मंत्री रहे। पिछले तीन दशकों में सैनी ने राज्य भाजपा में कई पद हासिल किए। वे हरियाणा भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष और महासचिव के पद पर रहे। वे 2002 में राज्य भाजपा युवा विंग के अंबाला जिला महासचिव थे और तीन साल बाद जिला अध्यक्ष बने। वे 2014 में नारायणगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा और 2019 में कुरुक्षेत्र सीट से लोकसभा के लिए चुने गए।

पार्टी द्वारा ओबीसी समुदाय और गैर-जाटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के प्रयास में सैनी को अक्टूबर 2023 में हरियाणा भाजपा प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था। मुख्यमंत्री पद पर उनका उत्थान खट्टर के समान ही था। 2014 में जब भाजपा अपने दम पर सत्ता में आई, तो उसने रामबिलास शर्मा, अनिल विज, कैप्टन अभिमन्यु और ओपी धनखड़ जैसे कई वरिष्ठ पार्टी नेताओं को दरकिनार करते हुए करनाल से पहली बार विधायक बने खट्टर को मुख्यमंत्री पद के लिए चुना। खट्टर अब केंद्रीय मंत्री हैं।

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हरियाणा में भाजपा की जीत के 7 प्रमुख फैक्टर

कमियों को समझना और उन्हें दूर करना: पार्टी ने पिछले चुनावों में हुई गलतियों को समझा और उन्हें समय रहते सुधारा।
जातिगत और बिरादरी समीकरणों का ध्यान रखना: ओबीसी और गैर-जाट समुदायों के वोट को सैनी के नेतृत्व में भाजपा ने मजबूती से साधा।
सही खर्च और प्रचार रणनीति: भाजपा ने अपने चुनाव प्रचार में सुनियोजित तरीके से खर्च किया, जिससे कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई का फायदा उठाया।
कांग्रेस की 7 गारंटी रहीं असफल: कांग्रेस के वादे मतदाताओं को लुभाने में असफल रहे, और जनता ने भाजपा की योजनाओं पर भरोसा किया।
ओबीसी वोट बैंक का झुकाव: सैनी के सीएम बनने से ओबीसी वोट भाजपा के पक्ष में गया।
नए उम्मीदवारों को मौका: पार्टी ने नए चेहरों को टिकट देकर युवाओं और नए मतदाताओं का भरोसा जीता।
दलित वोट पर ध्यान: भाजपा ने दलित समुदाय के मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए विशेष रणनीति अपनाई, जिससे पार्टी की जीत में बड़ा योगदान मिला।
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2024 में नायब सिंह सैनी की जीत ने यह साबित कर दिया कि भाजपा की रणनीति सही दिशा में काम कर रही है। ओबीसी और गैर-जाट समुदायों पर ध्यान केंद्रित करते हुए भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर को भी सफलतापूर्वक मात दी। अब सैनी दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने जा रहे हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी अगुवाई में हरियाणा में क्या बदलाव आते हैं।

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देश

‘मोदी नाम की बीमारी…’ PCC चीफ दीपक बैज का भड़काउ बयान

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रायपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूरे होने पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) देशव्यापी जनसंपर्क अभियान चला रही है। इसी कड़ी में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह दो दिवसीय दौरे पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। रायपुर पहुंचते ही उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला, जिस पर अब छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ा पलटवार किया है। दीपक बैज ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा के नेता ‘मोदी नाम की बीमारी’ से बाहर नहीं आ पा रहे हैं।

गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर साधा था निशाना

छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि पीएम मोदी के कार्यकाल में देश ने तकनीकी, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस को देश में हुआ यह विकास दिखाई नहीं देता।

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सत्ता के नशे में आंखें चौंधिया गई हैं: दीपक बैज

केंद्रीय मंत्री के इस बयान पर पलटवार करने में कांग्रेस ने भी देरी नहीं की। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने मीडिया से बातचीत में कहा:

“भाजपा के लोग मोदी नामक बीमारी से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। एक तरफ देश में महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर के दाम

आम जनता की पहुंच से बाहर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ भाजपा के नेता कह रहे हैं कि विकास हो रहा है।”

‘पेट्रोल पंप जाकर जनता से पूछें विकास की हकीकत’

दीपक बैज ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह को नसीहत देते हुए कहा कि अगर उन्हें असल विकास देखना है, तो सिक्योरिटी छोड़कर किसी भी आम पेट्रोल पंप पर जाएं और वहां खड़े आम नागरिकों से पूछें कि देश में कितना विकास हुआ है। जनता खुद उन्हें सच्चाई का जवाब दे देगी। बैज ने आगे कहा कि गिरिराज सिंह को सत्ता का नशा हो गया है, जिसके कारण उनकी आंखें चौंधिया गई हैं और उन्हें जनता की तकलीफें दिखाई नहीं दे रही हैं।

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देश

पीएम मोदी के नेतृत्व में राज्यों में बीजेपी का विस्तार, कई प्रदेशों में रचा नया राजनीतिक इतिहास

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के कई राज्यों में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करते हुए लगातार चुनावी सफलताओं का नया इतिहास रचा है। एक समय जिन राज्यों में बीजेपी का प्रभाव सीमित था, वहां आज पार्टी न केवल सत्ता में पहुंची है बल्कि लगातार जीत दर्ज कर अपनी स्थिति को और मजबूत किया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक में बीजेपी ने संगठन विस्तार, मजबूत नेतृत्व और प्रभावी चुनावी रणनीति के दम पर देश के विभिन्न हिस्सों में अपना जनाधार बढ़ाया है। महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, त्रिपुरा और ओडिशा जैसे राज्यों में पार्टी ने उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए नई राजनीतिक इबारत लिखी है।

  • महाराष्ट्र और हरियाणा से मिली नई दिशा
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साल 2014 बीजेपी के लिए कई मायनों में ऐतिहासिक साबित हुआ। महाराष्ट्र में पार्टी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में पहली बार पूर्ण रूप से बीजेपी सरकार का गठन हुआ। इसी वर्ष हरियाणा में भी पार्टी ने नया इतिहास रचते हुए मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया। इसके बाद दोनों राज्यों में बीजेपी ने लगातार चुनावी सफलता हासिल कर अपनी मजबूत उपस्थिति बनाए रखी।

  • पूर्वोत्तर में मजबूत हुआ कमल

पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी का विस्तार वर्ष 2016 से तेज़ी से शुरू हुआ। असम में पहली बार पार्टी की सरकार बनी और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री बने। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में पेमा खांडू और मणिपुर में एन. बीरेन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी ने अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की। वर्ष 2018 में त्रिपुरा में वामपंथी दलों के लंबे शासन को समाप्त कर बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

  • ओडिशा में बदला राजनीतिक समीकरण
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वर्ष 2024 में ओडिशा की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। लंबे समय तक सत्ता में रही क्षेत्रीय राजनीति को चुनौती देते हुए बीजेपी ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाकर राज्य में नया राजनीतिक अध्याय शुरू किया।

  • संगठन और रणनीति का मिला लाभ

बीजेपी की लगातार चुनावी सफलताओं को पार्टी संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने विभिन्न राज्यों में स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ते हुए मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाई है।

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देश

राम मंदिर के चंदे पर सियासत तेज: अखिलेश यादव के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार

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नई दिल्ली  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे को लेकर राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा मंदिर के चंदे में कथित गबन और हेराफेरी के आरोपों पर अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई है।

केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने विपक्ष और इंडिया (INDIA) गठबंधन पर देश का माहौल खराब करने का आरोप लगाया है।

  • केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी का बड़ा बयान:  इस पूरे विवाद पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री पंकज चौधरी ने साफ किया कि राम मंदिर से जुड़े मामलों की देखरेख के लिए ट्रस्ट मौजूद है। उन्होंने कहा:

“देखिए, यह ट्रस्ट का काम है। ट्रस्ट ने इसके लिए एक जांच कमेटी बनाई हुई है और मामले की जांच चल रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सख्त सजा दी जाएगी।”

  • ‘विपक्ष का नैरेटिव अब नहीं चलेगा’  पंकज चौधरी ने अखिलेश यादव और विपक्षी गठबंधन पर हमला बोलते हुए कहा कि सपा और पूरा एनडी अलायंस (विपक्ष) केवल देश में एक गलत नैरेटिव (माहौल) तैयार करना चाहता है। उन्होंने कहा कि विपक्ष इसी गलत नैरेटिव के दम पर चुनाव जीतना चाहता है, लेकिन देश की जनता अब उनकी इस राजनीति को अच्छी तरह समझ चुकी है। बंगाल, बिहार, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र के चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि जनता अब इनके झांसे में आने वाली नहीं है।
  • अखिलेश के ‘PDA’ पर साधा निशाना:  अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले पर तंज कसते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सपा का पीडीए सिर्फ कागजों और बयानों में है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव कई बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन उन्होंने कभी किसी ‘पीडीए’ वर्ग का भला नहीं किया, बल्कि सिर्फ अपने परिवार का विकास किया।
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